दिल्ली से 1,171 किलोमीटर दूर भी ‘कोई’ कर रहा है PM मोदी के भाषण का इंतज़ार : जानिए कौन हैं वह ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 14 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। हर साल की तरह इस बार भी 15 अगस्त की सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजधानी दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे, परंतु उनके इस भाषण का इंतज़ार भारत से बाहर भी कोई कर रहा है। इतना ही नहीं, उसने तो मोदी से मदद मिलने पर उनकी मूर्ति लगाने की भी घोषणा कर दी है।

आप सोच रहे होंगे कि इस तरह की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करोड़ों में प्रशंसकों या फैन्स में से किसी ने की होगी, परंतु आपको जान कर आश्चर्य होगा कि जिसने यह घोषणा की है, वह एक महिला है, जो मोदी की फैन तो हैं ही, परंतु साथ ही मोदी से उन्होंने बड़ी उम्मीदें बांध रखी हैं। उनका नाम नायला क़ादरी है और वह 70 सालों से पाकिस्तान की ग़ुलामी की जंजीरों में जकड़े बलूचिस्तान की बलूच महिला नेता हैं, जो बलूचिस्तान की आज़ादी के लिये लड़ रही हैं। 2016 में 15 अगस्त के भाषण में पीएम नरेन्द्र मोदी ने बलूचिस्तान, गिलगिट और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का उल्लेख किया था। इसके बाद से बलूच आज़ादी की माँग तेज हो गई है। बलोच नेताओं और वहाँ की जनता का कहना है कि पीएम मोदी ने उनकी आज़ादी की लड़ाई को संबल दिया है। अब वो दिन जरूर आएगा जब बलूचिस्तान पाकिस्तान के कब्जे से आज़ाज होगा। जब बलूचिस्तान आज़ाद होगा, उस समय भारत के पीएम मोदी की वहाँ प्रतिमा लगाई जाएगी।

नायला कादरी ने पीएम मोदी के लिये क्या कहा ?

नायला कादरी भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी को हीरो बताते हुए कहती हैं कि मोदी ने जिस साहस के साथ फैसला किया है, उस तरह से विश्व के किसी नेता ने आवाज़ नहीं उठाई। वह हमारे हीरो हैं और हमारे भाई हैं। उन्होंने कहा कि बलोच समुदाय एक कटोरा पानी के बदले सौ साल तक वफा करते हैं। बलोच लोगों ने जान की कुर्बानियाँ देकर भी हिंगलाज माता के मंदिर की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद भारत के साथ-साथ बलूचिस्तान में भी जश्न मनाया जा रहा है। पाकिस्तान, चीन के साथ मिलकर बलूच नस्ल को खत्म करने के एजेंडे पर काम कर रहा है। पाकिस्तान लगातार बलोचों का संहार कर रहा है। नायला ने कहा कि यदि भारत बलूचिस्तान को आज़ाद कराने में उनकी मदद करता है तो भारत को भी इसके कई दूरगामी फायदे होंगे। एक तो भारत अपनी संस्कृति के अनुसार मददगार की परंपरा निभाएगा। दूसरा आने वाले समय में बलूचिस्तान भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में मदद करेगा। मध्य एशिया का सीधा रास्ता भारत को आज़ाद बलूचिस्तान से मिल जाएगा। हिंगलाज माता के दर्शन के लिये किसी भारतीय को विजा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या है बलूचिस्तान का इतिहास ?

बलूचिस्तान पाकिस्तान और ईरान के बीच का हिस्सा है। यह पाकिस्तान का 44 प्रतिशत हिस्सा है। हालाँकि यहाँ पर पाकिस्तान की कुल आबादी का मात्र 5 प्रतिशत हिस्सा रहता है। यहाँ के लोगों का मुख्य धर्म सुन्नी इस्लाम है। ब्रिटिश राज में यह भारत का ही हिस्सा था। 1947 में बलूचिस्तान को पाकिस्तान के हवाले किया गया था, परंतु इसके 4 राज्यों मकरान, लस बेला, खरान और कलात में से ‘कलात के खान’ यानी यार खान ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान से अपनी आज़ादी की घोषणा कर दी थी। हालाँकि पहले तो जिन्नाह ने उन पर दबाव डाला और बात नहीं बनी तो 1948 में पाक आर्मी ने कलात पर हमला करके उस पर कब्जा कर लिया। यार खान संधि करने के लिये मजबूर हो गये। हालाँकि उनके भाइयों ने आज़ादी की लड़ाई जारी रखी। उनके बाद नवाब नौरोज खान ने पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। उनके परिवार के लोगों को फाँसी दे दी गई। 1960 के बाद लड़ाई तेज हो गई, परंतु 1970 तक पाक आर्मी ने बलोच विद्रोहियों पर काबू पा लिया। इसके बाद तत्कालीन पाकिस्तानी प्रेसीडेंट याह्या खान ने बलूचिस्तान को पाक का चौथा राज्य घोषित कर दिया। परंतु विद्रोहियों की लड़ाई 1980 तक छोटे स्तर पर ही सही परंतु चलती रही। 2004 में ग्वादार पोर्ट पर बलूच विद्रोहियों ने हमला करके कुछ लोगों को मार दिया, फिर पाक आर्मी का भी सामना किया। बलोच नेताओं ने पाकिस्तान को मेमोरंडम भी दिया कि हमारी माँगें पूरी करो। हालाँकि 2006 में 80 साल के वृद्ध बलोच नेता अकबर बुगती को पाक आर्मी ने मार दिया, यह सोचकर उनका नेतृत्व नहीं मिलने से विद्रोह दब जाएगा। इसके बाद 2009 में कलात के खान सुलेमान दाऊद ने स्वयं को बलूचिस्तान का शासक घोषित कर दिया, परंतु इससे कुछ नहीं हुआ और बलूचिस्तान की आज़ादी की लड़ाई अभी तक जारी है। दूसरी तरफ पाकिस्तान आर्मी की भी कार्यवाही जारी है। ऐसे में अक्सर वहाँ से ऐसी ही खबरें आती हैं कि इतने लोग लापता हैं, खुदाई में नरकंकाल मिले। पाक सेना की गोलीबारी, हत्या, मारकाट आदि। वहाँ 1947 से लेकर अभी तक कितने लोग मरे हैं, इसका अंदाजा भी किसी को नहीं है।

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