भारत ने अमेरिका को दिखाई आँखें : अमेरिकी चेतावनी को किया दरकिनार

अहमदाबाद, 16 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। भारत ने रूस से अत्याधुनिक एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली एस-400 की खरीद समझौते को लेकर अमेरिकी चेतावनी को दरकिनार कर दिया है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह अपने देश की सुरक्षा की आवश्यकताओं को देखते हुए लिये गये फैसलों में कोई समझौता नहीं करेगा।

भारत रूस से खरीद रहा है एयर डिफेंस मिसाइल रक्षा प्रणाली

उल्लेखनीय है कि भारत ने पिछले वर्ष अक्टूबर-2018 में रशियन एयर डिफेंस मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400 खरीदने के लिये 5 अरब डॉलर का समझौता किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने इस प्रणाली के लिये सौदे पर हस्ताक्षर किये हैं। रूस की यह एयर डिफेंस रक्षा प्रणाली अमेरिका की एयर डिफेंस मिसाइल रक्षा प्रणाली थाड सिस्टम से भी बेहतर मानी जाती है। यह रूसी प्रणाली परमाणु क्षमता वाली 36 मिसाइलों को एक साथ नष्ट कर सकती है। यह 400 किलोमीटर दूर तक और हवा में 30 किलोमीटर की ऊँचाई तक किसी भी मिसाइल या एयरक्राफ्ट को मार गिराने में सक्षम है। भारत के लिये यह समझौता मील का पत्थर माना जाता है, क्योंकि चीन ने भी 2014 में रूस से इस प्रणाली को खरीदने के लिये समझौता किया है, ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से भारत के लिये इस प्रणाली का समझौता काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। वैसे भी भारत सामरिक साजो-सामान के लिये रूस पर ज्यादा निर्भर है।

अमेरिका दे रहा सौदा रद्द करने की चेतावनी

दूसरी तरफ अमेरिका को रूस का प्रभाव बढ़ने का खतरा भयभीत कर रहा है। इसलिये वह भारत पर इस समझौते को रद्द करने का दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। उसने चेतावनी भरे स्वरों में कहा है कि इस समझौते से भारत के अमेरिका के साथ रक्षा सम्बंधों पर गंभीर असर पड़ सकता है। अमेरिका के अनुसार रूस की उन्नत प्रौद्योगिकी खरीदने से रूस को गलत संदेश जाएगा और वह भी तब जब कि रशिया आक्रामक रवैया अपनाए हुए है। अमेरिकी कांग्रेस ने रूस से हथियारों की खरीद को रोकने के लिये काउंटिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरीज़ थ्रू सेक्शंस एक्ट (CAATSA) बनाया हुआ है और वह इसी कानून का उपयोग करके भारत पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहा है।

ज्ञातव्य है कि आगामी 28 व 29 जून को जापान के ओसाका में जी-20 देशों का सम्मेलन हो रहा है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शामिल होंगे। इस बीच दोनों की मुलाकात होगी, जिसमें इस विषय पर चर्चा हो सकती है। इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री पोंपियो भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, जिसमें वह फिर से यह समझौता रद्द करने के लिये भारत पर दबाव बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

भारत अमेरिका को समझाने का प्रयास करेगा

हालाँकि भारत का कहना है कि वह रूस के साथ अपने स्वतंत्र रक्षा सम्बंधों को अमेरिका के साथ अपने बढ़ते सामरिक सम्बंधों में कोई अवरोध नहीं मानता है। भारत अमेरिकी विदेश मंत्री पोंपियो और उसके बाद जी-20 देशों के सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति को भी यही समझाने का प्रयास करेगा। क्योंकि दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सम्बंध मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। भारत का कहना है कि बहुध्रुवीय कूटनीतिक सम्बंधों की दुनिया में एक देश का दूसरे देश के साथ सम्बंध में किसी अन्य देश के लिये बाधक नहीं हो सकता है।

ज्ञात हो कि भारत और अमेरिका के बीच भी रक्षा व्यापार लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच कई नई खरीद परियोजनाओं पर बातचीत चल रही है। दोनों के बीच रक्षा व्यापार 18 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है। इस साल के अंत में दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास भी होना प्रस्तावित है, जिसमें भारत की तीनों सेनाएँ शामिल होंगी।

भारत का पक्ष है कि अभी वह रूस के रक्षा साजो-सामान पर ज्यादा निर्भर है। अमेरिका की इच्छानुसार भारत रूस के साथ अपने सामरिक सहयोग को अचानक ही सीमित नहीं कर सकता है। रूस के साथ रक्षा व्यापार पहले से कम हुआ है और अमेरिका के साथ कई गुना बढ़ा है। भारत का कहना है कि रूस के साथ पहले से तय हो चुके सौदों को रद्द करना किसी के भी हित में नहीं है। भारत और रशिया के सम्बंध काफी पुराने हैं।

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