आतंक के विरुद्ध नये भारत की नई रणनीति : अब सिर उठाने से पहले ही कुचल दिया जाएगा फन

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 21 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। अब पाकिस्तान और आतंक के विरुद्ध भारतीय रणनीति में बड़ा बदलाव आ चुका है। रविवार को पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन किये जाने पर भारतीय सेना ने जिस तरह की आक्रामकता दिखाई, उससे यह सिद्ध हो चुका है कि अब भारत रक्षात्मक नहीं, अपितु आक्रामक रवैया अपना रहा है। दरअसल यह बदलाव एक दिन में नहीं आया है। इससे पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के माध्यम से भारत ने पाकिस्तान और उसके यहाँ आश्रित आतंकवादियों को कड़ा संदेश दिया है कि अब भारत सिर उठाने से पहले ही फन को कुचल देने की रणनीति अपना चुका है। भारत ने रविवार को जो कड़ा रवैया अपनाया, वह ऐसे समय अपनाया है, जब पाकिस्तान फाइनांसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ब्लैक लिस्ट में जाने से बाल-बाल बचा है। पाकिस्तान पर टेरर फण्डिंग को रोकने का जबरदस्त अंतर्राष्ट्रीय दबाब है। यही कारण है कि पाकिस्तान अपना घाव भी किसी को नहीं दिखा पा रहा है, बल्कि घाव को छुपाने की मुद्रा में आ गया है। पाकिस्तान को नकारना पड़ रहा है कि भारत की ओर से की गई कार्यवाही में उसे कोई बड़ा नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी सेना और वहाँ का मीडिया भी मारे गये आतंकियों को सिविलियन में खपाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत ने यूँ ही नहीं की बड़ी कार्यवाही !

दरअसल भारत ने यूँ ही पाकिस्तान पर बड़ी सैन्य कार्यवाही नहीं की है। इसके पीछे भी बड़ी वजह है। भारत में सबसे बड़ा दीपावली का त्योहार नजदीक आ गया है और पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, जिसके लिये पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सैन्य चौकी को निशाना बनाया, जिससे दो भारतीय जवान शहीद हो गये और नागरिकों को भी निशाना बनाने से एक नागरिक की भी मृत्यु हो गई। खुद भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि पाकिस्तान में आश्रित आतंकवादी भारत में घुसपैठ के लिये लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) के निकट अग्रिम इलाके में स्थित कैंपों में आ चुके हैं। उन्हें भारत में घुसपैठ कराने के लिये पिछले लगभग एक महीने से पाकिस्तानी सेना गुरेज, केरन, माचिल सेक्टरों में तथा पीर पंजाल के दक्षिण में बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रही थी। जनरल रावत के अनुसार भारत में सबसे बड़ा त्योहार नजदीक है, ऐसे में पीर पंजाल के उत्तर में कुछ आतंकी कैंप सक्रिय होने के बारे में जानकारी मिलने पर भारतीय सेना खामोश बैठी नहीं रह सकती थी। आतंकी इन कैंपों में आ चुके थे और कभी भी भारत में घुसपैठ कर सकते थे। वे घुसपैठ करते, इससे पहले ही सेना ने आतंकी कैंपों को निशाना बनाने का फैसला किया था। जब पाकिस्तानी गोलीबारी में भारतीय सैन्य चौकी और नागरिकों को निशाना बनाया गया तो भारतीय सेना ने भी एक्शन लिया और तंगधार के सामने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में नीलम घाटी में एलओसी से लगभग 10 से 15 कि.मी. की दूरी पर स्थित 3 से 4 आतंकी कैंपों और कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बना कर आर्टिलरी फायरिंग की, जिसमें 4 से 6 पाकिस्तानी सैनिक और लगभग एक दर्जन आतंकी मारे गये हैं। हालाँकि दुनिया से सच छुपाने के लिये कुख्यात पाकिस्तान ने 1 से 2 सैनिकों के मारे जाने की बात फैलाई है और जो आतंकी मारे गये हैं, उन्हें सिविलियन बता रहा है।

पाकिस्तान में छाया सन्नाटा

हमेशा संघर्ष विराम का उल्लंघन करने के आदी पाकिस्तान ने सोचा भी नहीं था कि भारतीय सेना इस तरह की कोई बड़ी कार्यवाही कर सकती है। यही कारण है कि भारतीय कार्यवाही के बाद अब सीमा के उस पार सन्नाटा छाया हुआ है। क्योंकि एलओसी के उस पार से मोबाइल संचार के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे जाहिर है कि उस पार भारी नुकसान के चलते तनाव का माहौल है और संचार सेवा रोक दी गई है। हम क्यों कह रहे हैं कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान और आतंकियों के विरुद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया है, इस वजह से, क्योंकि खुद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भी चेतावनी दी है कि पाकिस्तान यदि सीमा पार आतंकी गतिविधियों को जारी रखता है तो भारतीय सेना आत्म रक्षा के लिये पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों पर आगे भी कार्यवाही करने से नहीं हिचकिचाएगी। इससे साफ है कि भारतीय सेना अब बैठ कर आतंकी हमलों का इंतज़ार नहीं करेगी, बल्कि आतंकियों के हरकत में आने से पहले ही उन्हें उन्हीं के कैंपों में कब्र बना कर दफ्न कर देगी, जैसा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और इस कार्यवाही में किया गया है। इस चेतावनी में पाकिस्तान के लिये कड़े संदेश हैं कि उसे अपने यहाँ चल रहे आतंकी कैंपों के विरुद्ध कार्यवाही करनी ही पड़ेगी और उसने ऐसा नहीं किया तो आगे भी भारत की ओर से इस प्रकार की कार्यवाही जारी रखी जाएगी, जिसके लिये पाकिस्तान को तैयार रहना होगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत युद्ध के लिये उकसाने वाला काम कर रहा है। इसका मतलब है कि भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिये और पाकिस्तान की धूर्तता का कड़ा जवाब देने के लिये अपनी रणनीति बदल दी है।

पूर्ववर्ती सरकारों में कार्यवाही की छूट मिलना होता था कठिन

उल्लेखनीय है कि 2014 में केन्द्र में मोदी शासन आने के बाद भारतीय सेना को एक्शन लेने की खुली छूट मिली है। इससे पहले भारतीय सेनाओं को इस प्रकार के एक्शन लेने की छूट नहीं थी और उन्हें एक्शन लेने के लिये दिल्ली दरबार से परमीशन लेने की जरूरत पड़ती थी। दिल्ली में बैठी सरकार से उसे एक्शन लेने से रोक दिया जाता था, जिससे सेना कोई एक्शन नहीं ले पाती थी। आतंकी हमलों में भारतीय सैनिक शहीद होने का सिलसिला जारी रहता था और केन्द्र सरकार जाँच कराने, घटना की निंदा करने और शहीद जवानों के परिवारों को मुआवजा देने की औपचारिक घोषणाएँ करके संतुष्ट हो जाती थी। पूर्ववर्ती केन्द्र सरकारों के लचर रवैये के कारण ही आतंकियों के हौसले इतने बुलंद हो गये थे कि वे एलओसी के पास स्थित उरी में सेना के मुख्यालय में घुस कर हमला करते थे तो कहीं पठानकोट में एयरबेस पर अटैक करते थे, परंतु जबसे भारतीय सेना ने आक्रामक रवैया अपनाया है, तब से पाकिस्तान में बैठे आतंकियों में भी भारत का भय व्याप्त हो गया है और जो आतंकी पाकिस्तान में खुले आम घूमते थे तथा रैलियाँ करके भारत के विरुद्ध जहर उगलते थे, वे अब भारत की कार्यवाही के डर से अपने बिलों में छुपे रहते हैं।

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