‘मसाला कारोबार’ के लिए मर्यादा लांघते ‘फिल्मी पहलवानों पर फूटा IPS अनुज चौधरी का गुस्सा

* कमांडो 3 में पहलवान के लड़की छेड़ने के दृश्य पर रोष

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 5 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय फिल्म जगत यानी BOLLYWOOD समाज को प्रेरणा देने वाली फिल्में बनाने के लिए विख्यात है, परंतु बॉलीवुड यह कार्य नि:शुल्क सेवा के रूप में नहीं करता। यही कारण है कि इतिहास या किसी ऐतिहासिक पात्र पर फिल्म बनाई जाए या फिर देशभक्ति की फिल्म बनाई जाए, सबमें दर्शकों के मनोरंजन के लिए मसाला अवश्य डाला जाता है। एक ज़माने में बॉलीवुड फिल्मों को समाज का दर्पण कहा जाता था, परंतु वर्तमान में कई बॉलीवुड फिल्म निर्माता-निर्देशक दर्शकों को अच्छा दिखाने का अच्छा प्रयास करते हुए भी मसाला डालना नहीं भूलते, जो फिल्म का कारोबार बढ़ाता है, परंतु इस मसाला कारोबार के चक्कर में ये निर्माता-निर्देशक कई बार मर्यादा लांघ जाते हैं।

कुछ ऐसा ही हुआ है हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म कमांडो 3 को लेकर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेसलिंग चैम्पियन रह चुके, राष्ट्रपति द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती सम्मान से सम्मानित IPS अधिकारी अनुज चौधरी ने विद्युत जामवाल अभिनीत फिल्म कमांडो 3 के एक दृश्य पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईपीएस) के अधिकारी अनुज चौधरी भले ही आज कुश्ती से सेवानिवृत्त हो चुके हों, परंतु कुश्ती के प्रति सम्मान, प्रेम और उसकी मर्यादा को लेकर आज भी उतने ही जागरूक हैं। यही कारण है कि उन्होंने कमांडो 3 फिल्म के इस दृश्य के विरुद्ध FACEBOOK पर एक वीडियो अपलोड कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

निर्माता-निर्देशकों की मानसिकता पर उठाए प्रश्न

उत्तर प्रदेश पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक (DySP) के रूप में सेवारत् अनुज चौधरी के अनुसार कमांड 3 फिल्म में अखाड़े के पास से गुज़र रही एक लड़की को पहलवान छेड़ते हुए दिखाए गए हैं। यह दृश्य पहलवानों सहित खिलाड़ियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। यह दृश्य देश के सम्मान के लिए पदक जीतने वाले सभी पहलवानों के आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचाता है। फिल्म बनाने के लिए इनकी (निर्माता-निर्देशकों) की मानसिकता कैसी है कि फिल्मी मसाले के लिए देश के असली और नकली हीरो में अंतर नहीं समझ पाते। क्या कहीं भी मिट्टी डाल कर, दो-चार डम्बल्स रख देने से वहाँ अखाड़ा बन सकता है ? अखाड़ा तो पहलवानों का मंदिर होता है और पहलवान देश का सम्मान व लड़कियों की इज्ज़त करते हैं, बहन-बेटियों की रक्षा को तत्पर रहते हैं। अनुज चौधरी ने कमांडो 3 के निर्देशक से प्रश्न किया, ‘आपने देश में ऐसा कौन-सा अखाड़ा देखा है, जहाँ पहलवान लड़कियों को छेड़ते हैं। देश में फिल्मों को पास करने वाला सेंसर बोर्ड किस तरह ऐसी फिल्मों को अनुमति दे देता है ?’

क्या है वह दृश्य, जिससे आगगबूला हुए अनुज ?

वास्तव में कमांडो 3 फिल्म के एक दृश्य में कुश्ती में लड़ने वाले एक पहलवान को स्कूल की बच्ची का स्कर्ट उठाते हुए दिखाया गया है। इस दृश्य पर पहले ही हंगामा मच चुका है, परंतु आईपीएस व पूर्व कुश्तीबाज़ अनुज चौधरी ने तो कमांडो 3 के निर्देशक आदित्य दत्त, निर्माता, लेखक व अभिनेता विद्युत जामवाल से माफी मांगने की मांग की है। अनुज चौधरी ने फिल्म से यह दृश्य तत्काल हटाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वे अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।

अनुज और कुश्ती का कितना गहरा है संबंध ?

5 अगस्त, 1980 को जन्मे अनुज कुमार चौधरी कुश्ती के शौक़ीन हैं और इसीलिए वे आईपीएस बनने के साथ ही कुश्तीबाज़ भी बने। फ्रीस्टाइल रेशलर अनुज चौधरी ने एशियन गेम्स 2002 व 2006 में 74 किलोग्राम वजन वर्ग में टॉप टेन फिनिशेज़ किए थे। कॉमनवेल्थ गेम्स 2002 व 2010 में अनुज ने 2 सिल्वर मेडल और एशियन रेशलिंग चैम्पियनशिप में 2 ब्रॉन्ज़ मेडल जीते थे। समर ओलम्पिक 2004 में अनुज ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। अनुज कुमार पहली बार तब चर्चा में आए, जब इंग्लैण्ड के मांचेस्टर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2002 में उन्होंने 84 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। समर ओलम्पिक 2004 एथेंस में अनुज कुमार 84 किलोग्राम भार वर्ग के लिए क्वॉलीफाई करने वाले प्रथम भारतीय रेशलर बने। इसके अलावा भी अनुज कुमार ने कई प्रतियोगिताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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