यात्रीगण कृपया ध्यान दें : रेलवे अब आपको देगा नए दोहर, पुराने-गंदे कंबलों से मिलेगी निज़ात

एसी कोचों में बदले जाएँगे पुराने और गंदे कंबल

नये मुस्लिन रैप और दोहर पर होगी नई प्रिंटिंग

अहमदाबाद, 6 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। भारतीय रेलवे यात्रियों को होने वाली परेशानियों को धीरे-धीरे एक-एक करके कम करने का प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में अब रेलवे एसी कोचों में पुराने कंबलों के स्थान पर नये मुस्लिन रैप या दोहर से बदलने जा रहा है। इससे एसी कोचों में अब आपको पुराने कंबलों से निजात मिल जाएगी।

इंडियन रेलवेज़ कैटरिंग एण्ड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के एक अधिकारी के अनुसार रेल यात्रा के दौरान यात्री कई प्रकार की असुविधाओं का सामना करते हैं, इन्हीं में से एक असुविधा यह भी है कि एसी कोच में यात्रियों को जो कंबल ओढ़ने के लिये दिये जाते हैं वह पुराने और गंदे होते हैं। इस असुविधा के कारण नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ओर से रेलवे को आलोचना भी सहन करनी पड़ी है। इसलिये रेलवे ने निर्णय किया है कि एयर कंडीशन कोचों में यात्रियों को दिये जाने वाले कंबलों के स्थान पर अब उन्हें मुस्लिन रैप या फिर दोहर दिये जाएँगे। इनकी विशेषता यह है कि यह सीमित अंतराल में आसानी से धोये जा सकते हैं।

रेलवे अधिकारी ने बताया कि रेलवे की ओर से एक सर्कुलर जारी किया गया है, इसमें सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिये गये हैं कि वह सभी ट्रेनों के एसी कोच में यात्रियों को दिये जाने वाले कंबल बदल दें और उनके स्थान पर मुस्लिन रैप या दोहर देने की शुरुआत करें। हालाँकि कुछ बड़ी उम्र के यात्रियों को कठिनाई न हो, इसलिये बुजुर्ग यात्रियों को मोटे कंबल देने का नियम जारी रहेगा।

अधिकारी ने बताया कि अभी एसी कोचों में यात्रियों को ओढ़ने के लिये जो कंबल दिये जाते हैं, वह पुराने और गंदे हो चुके हैं। क्योंकि इन्हें धोना आसान नहीं है, इसलिये उन्हें बदलकर अब यात्रियों को मुस्लिन और दोहर उपलब्ध कराये जाएँगे। इनका ध्यान रखना आसान है और इन्हें सरलता से धोया जा सकता है। हालाँकि इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि सीनियर सिटीज़न को अगर मोटे कंबलों की जरूरत होगी तो उन्हें यही कंबल उपलब्ध कराए जाएँगे।

अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने सभी जोनल रेलवे के लिये जारी किये परिपत्र में यह भी निर्देश दिये हैं कि वह अपने क्षेत्र की संस्कृति और कला को बढ़ावा देने के लिये नये मुस्लिन रैप और दोहर पर उनके जोनल की पहचान के लिये विशेष कला या संस्कृति का प्रतीक प्रिंट कराएँ। इसके साथ ही रेलवे स्थानीय परंपराओं को बढ़ावा देने वाली इस पहल का गहराई से अध्ययन भी करेगा। उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही यात्रियों को यात्रा के दौरान मिलने वाले कंबल न सिर्फ बदल जाएँगे बल्कि उन पर नई प्रिंटिंग भी नज़र आएगी।

उल्लेखनीय है कि रेलवे ने पिछले वर्ष प्रायोगिक स्तर पर डिस्पोजेबल तकिये के कवर उपलब्ध कराए थे। इसके साथ ही रेलवे एसी कोचों में तापमान को भी नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है, जिससे यात्रियों को ऊनी कंबलों की आवश्यकता ही न पड़े।

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