दुनिया में पहली बार किसी बर्फ के टुकड़े को दी गई श्रद्धांजलि : इंसान को सोचने पर मजबूर कर देगी यह ख़बर

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 19 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। कदाचित दुनिया में यह अपने आप में विचित्र, किंतु सत्य और पहली घटना होगी कि जब एक देश के प्रधानमंत्री ने किसी बर्फ के टुकड़े को श्रद्धांजलि दी। इतना ही नहीं, इस देश के लोग धरती से लुप्त हो गए अपने प्रिय बर्फ के टुकड़े का शोक मना रहे हैं। धरती के इस टुकड़े की स्मृति में कांस्य पट्टिका भी स्थापित की गई है।

जी हाँ। ऐसा वास्तव में हुआ है। यह घटना है उत्तर पश्चिमी यूरोप में उत्तरी अटलांटिक में ग्रीनलैण्ड, फ़रो द्वीप समूह और नॉर्वे के मध्य बसे द्विपीय देश आइसलैण्ड की। लगभग 3 लाख की आबादी वाले आइसलैण्ड में इस समय शोक का माहौल है। आइसलैण्ड के लोग ही नहीं, पूरी सरकार भी शोकमग्न है। इस शोक का कारण है ओकजोकुल (OKJOKULL) ग्लेशियर का जल समाधि ले लेना।

रविवार को प्रधानमंत्री केटरिन जोकोबस्दोतियर के नेतृत्व में मंत्रियों के समूह ने ओकजोकुल को श्रद्धांजलि दी। यह पहला ग्लेशियर है, जिसका आधिकारिक तौर पर ग्लेशियर का दर्जा समाप्त कर दिया गया है। अगले 200 वर्षों में विश्व के सभी ग्लेशियर्स का यही हश्र होने वाला है। प्रधानमंत्री केटरिन जोकोबस्दोतियर की ओर से जारी संदेश में कहा गया, ‘यह हमारे लिए स्वीकार करने का वक्त है कि क्या हो रहा है। जो हो रहा है उसे रोकने के लिए कौन से कदम उठाने हैं, इसकी भी हमें जानकारी है।’ रविवार को ओकजोकुल के शोक में कांस्य पट्टिका का अनावरण किया गया, जिसमें िसकी वर्तमान स्थिति बयान करने के साथ ही बाकी ग्लेशियर के भविष्य को लेकर आगाह किया गया है।

क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग का पहला शिकार ओकजोकुल

ओकजोकुल की 14 सितम्बर, 1986 (बाएँ) और 1 अगस्त, 2019 (दाएँ) की उपग्रह तसवीरें।

आइसलैण्ड स्थित राइस विश्वविद्यालय में एंथ्रोपॉलजी की एसोसिएट प्रोफेसर सायमीनी हावे ने पिछले महीने जुलाई में ही आगाह कर दिया था कि ओकजोकुल शीघ्र ही पिघल जाएगा। उन्होंने कहा था, ‘क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) और ग्लोबल वॉर्मिंग (वैश्विक गर्मी) के कारण अपनी पहचान खोने वाला ओकजोकुल पहला ग्लेशियर होगा।’ हावे की भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई और रविवार को आइसलैण्ड सरकार ने अधिकृत घोषणा कर दी कि ओकजोकुल का अस्तित्व अब समाप्त हो चुका है। आइसलैण्ड के पश्चिमी सब-आर्कटिक हिस्से में ओक ज्वालामुखी पर स्थित ओकजोकुल पिछले कुछ वर्षों से लगातार पिघल रहा था। ओकजोकुल की उपग्रह तसवीरें 14 सितम्बर, 1986 को जारी की गई थी। इसके बाद 1 अगस्त, 2019 को तसवीर जारी की गई। दोनों ही तसवीरों को देख कर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि 33 वर्षों में ओकजोकुल किस कदर पिघलता गया। 118 वर्ष पहले यानी 1901 में ओकजोकुल ग्लेशियर 38 वर्ग फीट किलोमीटर तक फैला हुआ था, जो पिघलते-पिघलते 1 वर्ग किलोमीटर तक सिकुड़ गया और अंतत: अस्तित्वहीन हो गया।

ओकजोकुल है दुनिया के ग्लेशियर्स के लिए खतरे की घंटी

वैज्ञानिक पिछले कई वर्षों से कहते आ रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक गर्मी के चलते दुनिया के सभी ग्लेशियर (हिम चट्टानें) पिघलते जा रहे हैं। ओकजोकुल का अस्तित्वहीन हो जाना भविष्य में आने वाले ख़तरों की शुरुआत है। वैज्ञानिकों की एक टीम ने तो भविष्य में आइसलैण्ड के 400 ग्लेशियर्स के इसी तरह समाप्त हो जाने की चेतावनी दी है। आइसलैण्ड में हर वर्ष 11 बिलियन टन बर्फ पिघल रही है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (IUFCN) का अनुमान है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी गति से जारी रहा, तो वर्ष 2100 तक विश्व के आधे से अधिक ग्लेशियर पिघल जाएँगे।

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