‘वादग्रस्तों’ पर ‘निर्वाद’ प्रहार : सिवन ने छेड़ा ऐसा सुर कि पूरा देश बोल रहा, ‘मैं पहले एक भारतीय हूँ…’

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। कभी गाँव में अभावों का जीवन जीने वाला, नंगे पैर चलने वाला और धोती पहनने वाला व्यक्ति आज 136 करोड़ भारतीयों के लिए आदर्श बन चुका है। देश का हर नागरिक इस व्यक्ति, उसकी लगन, कर्तव्य परायणता, निष्ठा और देश के लिए जीने की भावना का इस कदर कायल बन चुका है कि उसका हर शब्द प्रभावशाली बन गया है। लोग 7 सितंबर, 2019 की रात 1.55 बजे चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने की घोषणा करने वाले उस उदास चेहरे को तो कब से भूल चुके हैं। लोगों को तो चंद्रयान 2 की 48 दिनों तक धरती से 3.84 लाख किलोमीटर तक की सफल यात्रा कराने वाला उनका कारनामा याद है। 7 सितंबर से लगातार चर्चा का विषय बने इस व्यक्ति ने आज तो देशवासियों पर एक नया ही रंग चढ़ा दिया, जिसके कारण आज देश का हर नागरिक नारा लगा रहा है, ‘मैं पहले एक भारतीय हूँ…’

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं रॉकेट मैन के. सिवन की। हमारे देश के लोगों की एक विशेषता है कि वे हर व्यक्ति को पहचानने का आरंभ उसके मूल से करते हैं, फिर सिरे तक जाते हैं। यही कारण है कि विदेश में भी कोई भारतीय देश का नाम रोशन करता है, तो देश के लोग तुरंत इस कोशिश में जुट जाते हैं कि यह व्यक्ति किस राज्य, शहर-जिला-तहसील या गाँव का है ? यह अच्छी बात भी है, क्योंकि इससे लोगों को देश पर गर्व करने के साथ-साथ अपने राज्य, जिला-शहर-तहसली-गाँव पर गर्व होता है, परंतु यह बात उस समय बुरी बन जाती है, जब वह बात से बदल कर ‘वाद’ में परिवर्तित हो जाती है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के. सिवन आज ऐसे ही ‘वादग्रस्तों’ पर ‘निर्वाद’ प्रहार करने वाले सिद्ध हुए, जब उन्होंने कहा, ‘मैं पहले एक भारतीय हूँ…’

तमिलनाडु के गौरव, पर भारत सर्वोपरि

वास्तव में आज के. सिवन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो जनवरी-2018 का है, जिसमें सिवन के गृह राज्य तमिलनाडु के एक क्षेत्रीय न्यूज़ चैनल ने उनका इंटरव्यू लिया था। इस इंटरव्यू में रिपोर्ट ने सिवन से प्रश्न किया, ‘एक तमिल के रूप में आप इतने बड़े पद पर पहुंचे हैं, तमिलनाडु के लोगों के लिए आप क्या कहना चाहते हैं?’ इस पर सिवन ने जवाब दिया, ‘सबसे पहले मैं एक भारतीय हूँ। मैंने एक भारतीय के रूप में इसरो जॉइन किया। इसरो ऐसी जगह है, जहाँ सभी क्षेत्रों और अलग-अलग भाषाओं वाले लोग एक साथ काम करते हैं और अपना योगदान देते हैं। मैं अपने भाइयों के प्रति आभारी हूँ, जो मेरी प्रशंसा करते हैं।’ सिवन के इस उत्तर ने स्पष्ट कर दिया कि सिवन के मनो-मस्तिष्क में यह बात अच्छे से स्थित है कि वे तमिलनाडु के गौरव अवश्य हैं, परंतु उनके लिए भारत सर्वोपरि है।

सिवन के सुर में देश ने भी मिलाया सुर

सिवन का यह इंटरव्यू वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इतना ही नहीं, सिवन के सुर में सुर मिलाते हुए पूरे देश ने ग्रामवाद, तहसीलवाद, नगरवाद, जिलावाद, प्रांतवाद, धर्मवाद, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, अंचलवाद जैसी सभी वादों की परिसीमाओं को तोड़ते हुए एक सुर में कहा, ‘मैं पहले एक भारतीय हूँ।’ सिवन के ही राज्य तमिलनाडु के एक ट्विटर यूज़र अशोक कुमार खन्ना ने ट्वीट किया, ‘इसरो चीफ डॉ. के सिवन ने कहा कि सबसे पहले मैं भारतीय हूँ, उसके बाद तमिलियन। आप पर गर्व है।’ एक अन्य ट्वीट में आरती मेहता नामक एक ट्विटर यूज़र ने सिवन को जमीनी शख्स बताया। उन्होंने अपने ट्वीट में सिवन को प्रामाणिक और काम के प्रति लगनशील बताया।

‘वादग्रस्तों’ और ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग के लिए सबक

के. सिवन का यह निर्वाद वाक्य हमारे देश में ओछी राजनीति करने वाले विभिन्न वादों से ग्रस्त राजनेताओं और देश में रह कर व्यक्तिविरोध की सनक में देशविरोध की सीमा तक चले जाने वाले ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग के लिए बहुत बड़ा सबक है। सिवन का यह निर्वाद वाक्य यदि सबसे अधिक किसी को चोट पहुँचाता है, तो वे हैं ममता बनर्जी, जिन्होंने इसरो अध्यक्ष के. सिवन तथा समग्र इसरो के वैज्ञानिकों और 136 करोड़ भारतीयों के लिए महत्वाकांक्षी चंद्रयान 2 को लेकर उस समय तुच्छ राजनीति करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरा था, जब चंद्रयान 2 के चंद्र के दक्षिणी ध्रुव पर लैण्ड करने की उल्टी गिनती गिनी जा रही थी और पूरे देश की साँसें थमी हुई थीं। सिवन का यह निर्वाद वाक्य शहला राशिद जैसे लोगों को भी सीख देता है कि देशप्रेम किस चिड़िया का नाम है ?

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