अंतरिक्ष का सीना ‘चीरने’ वालों की जेब के साथ ‘चीर-फाड़’ क्यों की मोदी सरकार ने ? ये बात हज़म नहीं हुई !

* तो इसरो से ‘खिसको’ अभियान होगा तेज ?

अहमदाबाद, 12 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। एक तरफ गुरु पूर्णिमा यानी 16 जुलाई मंगलवार को खंडग्रास चंद्र ग्रहण है। दूसरी तरफ केन्द्र सरकार ने चंद्र ग्रह पर भेजे जाने वाले चंद्रयान-2 की तैयारियों में जुटे इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के वैज्ञानिज्ञों के वेतन पर कैंची चला दी है। इससे चंद्रयान-2 ही नहीं, बल्कि इसरो के अन्य प्रोजेक्टों पर भी बड़ा असर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

30 प्रतिशत भारतीय वैज्ञानिक विदेश में

पहले से ही भारतीय वैज्ञानिकों का रवैया अच्छे वेतन और सुविधाओं की चाह में विदेश तरफी रहता है। हाल की स्थिति में विदेशों में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में जितने भी प्रतिभाशाली वैज्ञानिक काम कर रहे हैं, उनमें 30 प्रतिशत से अधिक संख्या भारतीयों की है। अब केन्द्र सरकार ने इसरो के वैज्ञानिकों के वेतन पर कैंची चलाई है, जिससे इसरो की चिंता बढ़ सकती है और इसरो में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों में पलायनवाद को प्रोत्साहन मिल सकता है।

केन्द्र सरकार ने वैज्ञानिकों की प्रोत्साहन राशि काटी

ऐसे समय में जब इसरो के वैज्ञानिक चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तैयारी में जुटे हैं और देश का नाम ऊँचा करने की दिशा में दिन-रात एक करके काम कर रहे हैं। सरकार ने 12 जुलाई को एक आदेश जारी करके कहा है कि वह इसरो के वैज्ञानिकों को 1996 से मिल रही दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि के रूप में मिल रही प्रोत्साहन राशि में से एक राशि बंद की जाएगी। सरकार के आदेशानुसार 1 जुलाई-2019 से दो में से एक प्रोत्साहन राशि बंद हो जाएगी। इसका मतलब है कि वैज्ञानिकों को अगले महीने अगस्त में जुलाई की जो सैलरी मिलेगी, उसमें उन्हें 8 से 10 हजार रुपये का नुकसान होगा। इसरो में D, E, F और G कैटेगरी के वैज्ञानिकों को अब प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी।

इसरो में 90 प्रतिशत वैज्ञानिकों-इंजीनियरों की कटेगी सैलरी

इसरो में लगभग 16 हजार वैज्ञानिक और इंजीनियर हैं। सरकार के आदेश के बाद इनमें से 85 से 90 प्रतिशत वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के वेतन से 8 से 10 हजार रुपये कटेंगे, जो उपरोक्त श्रेणियों में आते हैं। सरकार के इस आदेश से इसरो वैज्ञानिकों में नाराजगी व्याप्त हो गई है, जो इसरो के विविध प्रोजेक्टों के लिये बिल्कुल भी अच्छी खबर नहीं है।

उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने, उनका इसरो में काम करने की ओर झुकाव बढ़ाने तथा संस्थान छोड़कर न जाएँ, इसलिये सरकार ने 1996 में उन्हें प्रोत्साहन राशि देने की शुरुआत की थी। सरकार के अनुसार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वित्त मंत्रालय और व्यय विभाग ने अंतरिक्ष विभाग को सलाह दी है कि वह इस प्रोत्साहन राशि को बंद कर दे। अब मात्र परफोर्मेंस रिलेटेड इंसेटिव स्कीम (PRIS) लागू रहेगी, अर्थात् दो अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि में से पीआरआईएस ही लागू रहेगी।

ज्ञात हो कि इसरो में किसी भी वैज्ञानिक की भर्ती C श्रेणी में होती है। इसके बाद उनका प्रमोशन डी, ई, एफ, जी तथा अन्य आगे की श्रेणियों में होता है। प्रत्येक श्रेणी में प्रमोशन से पहले एक टेस्ट होता है, उसे पास करने के बाद ही वैज्ञानिक को यह प्रोत्साहन राशि मिलती थी। हालाँकि अब यह प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी, मात्र परफोर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम का ही लाभ मिलेगा।

सरकार के कदम से इसरो के प्रोजेक्टों को लग सकता है झटका

भारतीय इसरो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लगातार एक के बाद एक लक्ष्य हासिल कर रहा है, ऐसे में सरकार का यह कदम इसरो के बढ़ते कदमों की गति को प्रभावित कर सकता है। 2017 में आई एक मीडिया रिपोर्ट पर भरोसा करें तो एक आरटीआई से यह बात सामने आई थी कि 2012 से 2017 तक इसरो के 289 वैज्ञानिक इसरो को छोड़ चुके हैं। ऐसे में सरकार का यह नया कदम इसरो के लिये बड़ा झटका सिद्ध हो सकता है। इसरो के जिन प्रमुख केन्द्रों में से सबसे ज्यादा वैज्ञानिकों-इंजीनियरों ने नौकरी छोड़ी है, उनमें सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र श्रीहरिकोटा, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र तिरुवनंतपुरम्, सैटेलाइट सेंटर बंगलुरु और स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद शामिल हैं।

इसरो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने वाली भारतीय संस्था है, जिसने पहली बार में ही सफलतापूर्वक मंगलयान मंगल ग्रह पर भेजने में अपूर्व सफलता प्राप्त की है। एक चंद्रयान भेज चुका है और दूसरा चंद्रयान-2 भेजने की तैयारी में जुटा है। इसरो अंतरिक्ष में दो वैज्ञानिकों को भेजने की भी तैयारी करने में जुटा है। इसके अलावा हाल ही में इसरो ने अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल का भी सफल परीक्षण करके भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथी अंतरिक्ष शक्ति बनाया है। ऐसे में इसरो के सफल वैज्ञानिकों ने यदि विदेशी संस्थाओं का रुख किया तो सरकार का यह कदम भारत के लिये बड़ा नुकसानकारक सिद्ध हो सकता है।

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