गुजरात सरकार का बड़ा निर्णय : अब शहरों में दुपहिया वाहन चालकों को नहीं पहनना पड़ेगा हेलमेट !

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 4 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। गुजरात सरकार (GUJARAT GOVERNMENT) ने राज्य के दुपहिया वाहन चालकों (TWO WHEELER) के हित में एक बड़ा निर्णय किया है। सूबे की विजय रूपाणी सरकार के मंत्री मंडल (VIJAY RUPANI CABINET) की बैठक में बुधवार को प्रदेश के दुपहिया वाहन चालकों की बड़ी माँग को स्वीकृति दी गई, जिसके अनुसार अब छोटे-बड़े शहरों (URBAN-SUBURBAN) में हेलमेट (HELMET) पहनने से मुक्ति दी गई है। राज्य सरकार के इस फैसले से राज्य के लगभग दो करोड़ वाहन चालकों को सीधा लाभ होगा और उन्हें हेलमेट खरीदने, पहनने, उसे संभालने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। हालाँकि स्टेट और नेशनल हाईवे (STATE & NATIONAL HIGHWAY) पर हेलमेट पहनने का नियम लागू रहेगा और हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों से दंड भी वसूल किया जाएगा।

1 सितंबर से देश भर में लागू हुआ है मोटर वेहिकल एक्ट 2019

केन्द्र सरकार (CENTRAL GOVERNMENT) ने देश की 30 साल पुरानी ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था (TRANSPORTATION SYSTEM) को सुधारने के उद्देश्य से इसी साल जुलाई-अगस्त में लोक सभा (LOK SABHA) और राज्य सभा (RAJYA SABHA) से मोटर वेहिकल संशोधन विधेयक 2019 (MOTOR VEHICLE AMENDMENT BILL) पास कराया था, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पहली सितंबर से कानून (ACT) के रूप में लागू किया गया है। इस कानून के तहत ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों से भारी-भरकम दंड वसूल किया जा रहा है। हालाँकि कुछ राज्यों ने इस कानून को दंड की रकम घटा कर अपने यहाँ लागू किया है, जिनमें से गुजरात भी एक है। केन्द्रीय नियम के अनुसार हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों से वसूल किया जाने वाला 100 रुपये का दंड बढ़ा कर 1,000 रुपये कर दिया गया है।

गुजरात ने ट्रैफिक नियमों में दी थी ढील

हालाँकि गुजरात सरकार ने इस नियम में वाहन चालकों को थोड़ी राहत देते हुए संशोधन किया था कि पहली बार बिना हेलमेट के पकड़े जाने पर 500 रुपये और इस के बाद बार-बार बिना हेलमेट के पकड़े जाने पर 1,000 रुपये दंड वसूल किया जाएगा। साथ ही पीछे बैठने वाले को हेलमेट पहनने से मुक्ति दी थी।

दुपहिया वाहन चालक लंबे समय से कर रहे थे राहत देने की माँग

तत्पश्चात् कुछ संगठनों ने राज्य सरकार से मिलकर हेलमेट के नियमों में यह कह कर राहत देने की माँग की थी कि शहरी क्षेत्रों में सड़कों पर तथा मुख्य बाजारों में ट्रैफिक ही इतनी होती है कि वाहन चालक प्रति घण्टा 50 की गति से भी वाहन नहीं चला पाते हैं। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में हेलमेट नहीं होने से सभी के पास हेलमेट होना भी संभव नहीं। इसके अलावा वाहन चालकों को दिन के दौरान कामकाज के सिलसिले में कुछ किलोमीटर के दायरे में बार-बार आना-जाना पड़ता है, ऐसे में उनके समक्ष हेलमेट को संभालने की समस्या भी पेश आती है।

रूपाणी सरकार के फैसले से 2 करोड़ दुपहिया वाहन चालक खुश

इन सभी माँगों को देखते हुए राज्य सरकार ने बुधवार को मंत्री मंडल की साप्ताहिक बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की और दुपहिया वाहन चालकों को शहरी इलाकों में हेलमेट पहनने की अनिवार्यता से मुक्त कर दिया। इसी के साथ राज्य के शहर अब हेलमेट से मुक्त हो जाएँगे। राज्य मंत्री मंडल की बैठक के बाद प्रदेश के परिवहन मंत्री आरसी फळदु ने मीडिया के समक्ष रूपाणी सरकार के इस फैसले की घोषणा की तो राज्य के दुपहिया वाहन चालकों में खुशी की लहर दौड़ गई। राज्य सरकार के इस फैसले से सूबे के तकरीबन 2 करोड़ दुपहिया वाहन चालकों को लाभ होगा। हालाँकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि हेलमेट से मुक्ति का नियम केवल महानगर पालिका, नगर पालिका और अर्ध-शहरी इलाकों में यानी बड़े महानगरों, छोटे शहरों और कस्बों में ही लागू होगा। जबकि स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर सुरक्षा कारणों से अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने का नियम सख्ती से लागू रहेगा और जो भी वाहन चालक इस नियम का उल्लंघन करते पकड़े जाएँगे उनसे स्थल पर ही कड़ा दंड भी वसूल किया जाएगा।

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