कांग्रेस आई-भ्रष्टाचार लाई, इसलिए IT ने छेड़ी लड़ाई : क्या है कमलनाथ के करीबियों पर छापों का रहस्य ?

मध्य प्रदेश की जनता ने अभी कुछ महीनों पहले बेमन से कांग्रेस को सत्ता की बागडोर तो सौंप दी, परंतु अब उसे एहसास होने लगा होगा कि कहीं न कहीं उससे कोई चूक हो गई।

यह बात हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस और भ्रष्टाचार का चोली-दामन का साथ रहा है। जब-जब देश और जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें बनीं, वहाँ भ्रष्टाचार रूपी बीज तुरंत अंकुरित होने लगा। मध्य प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कांग्रेस आई और साथ में भ्रष्टाचार लाई। इसलिए आयकर विभाग (IT) को छेड़नी पड़ी लड़ाई।

आईटी ने पिछले दो दिनों से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के क़रीबियों पर ज़ोरदार शिकंजा कसा है और छापेमारी का सिलसिलेवार दौर शुरू किया है। आखिर आईटी को ऐन चुनावों के वक्त यह छापेमारी क्यों सूझी ? कमलनाथ इसे केन्द्र और भाजपा की साज़िश बता रहे हैं, परंतु आईटी यह कवायद पिछले कई दिनों से कर रहा था।’

कांग्रेस के आते ही भ्रष्टाचार को लगे पंख

आईटी ने कमलनाथ के जिन करीबियों पर दिल्ली, इंदौर, भोपाल और गोवा में छापेमारी की है, उनमें मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी (OSD) प्रवीण कक्कड़, पूर्व सलाहकार राजेन्द्र मिगलानी, भांजे रातुल पुरी, ककक्ड़ के करीबी प्रतीक जशी और सरकारी लॉबिस्ट अश्विन शर्मा शामिल हैं। प्रतीक जोशी के भोपाल स्थित घर से 9 करोड़ रुपए बरामद हुए, तो अश्विन के भोपाल स्थित घर से इतने नोट मिले कि गिनने के लिए मशीन लगानी पड़ी। यह रकम 100 करोड़ से ज्यादा की हो सकती है। प्रवीण कक्कड़ के इंदौर-भोपाल स्थित ठिकानों पर, तो दिल्ली के आरके मिगलानी के घर छापा मारा गया। आईटी सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अश्विन शर्मा ट्रांसफर और पोस्टिंग में काफी सक्रिय था और उसके जरिए उसने अकूत दौलत जमा कर ली इसके अलावा मध्य प्रदेश की नई आबकारी व ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बनाने के माध्यम से भी जम कर सरकारी खज़ाने को लूटा गया।

कमलनाथ बेखबर, पहली बार CRPF की मदद

आयकर विभाग ने छापे का जाल इस तरह बुना कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को इसकी भनक 2 घण्टे बाद लगी। 300 आईटी अधिकारियों-करमचारियों की टीम ने छापेमारी की। तीन राज्यों में 50 ठिकानों पर रविवार तड़के 3 बजे शुरू हुई छापेमारी सोमवार को भी अब तक जारी है। आईटी अधिकारियों ने सीएम के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के इंदौर और भोपाल स्थित ठिकानों पर छापा मारने के लिए शनिवार देर रात 12 बजे स्वयं को टूरिस्ट बता कर गाड़ियाँ बुक कराईं और देर रात 3 बजे छापे को अंजाम दिया। मध्य प्रदेश पुलिस को बेखबर रखते हुए आईटी ने अपने इतिहास में पहली बार अपनी किसी कार्यवाही में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की सहायता ली।

ऐसे कसा गया कमलनाथ के क़रीबियों पर सिकंजा

दरअसल जबलपुर के हवाला कांड और दिल्ली में एक उद्योगपति के यहाँ आईटी ने कुछ समय पहले छापेमारी की थी। इसी छापेमारी में दिल्ली आईटी विंग को कमलनाथ सरकार के नाक तले भ्रष्टाचार की बू आई। आईटी अधिकारी सक्रिय हुए और इस हवाला के तौर पर भोपाल में अश्विन शर्मा और इंदौर में ललित छजलानी तक जा पहुँचे। फिर जुड़ा प्रवीण कक्कड़ और आरके मिगलानी का नाम।

कमलनाथ के शोर पर शिवराज का वार

चुनाव के वक्त आईटी रेड को राजनीतिक रंग देने से कांग्रेस भला कैसे बचती। कमलनाथ ने सीधा मोदी सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा विरोधियों के विरुद्ध ऐसे ही हथकंडे अपनाती है। कमलनाथ को जवाब देने के लिए मोर्चा संभाला पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने। शिवराज ने कहा, ‘कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई, लेकिन यह कैसा बदलाव ? जब पुख्ता सबूतों के आधार पर आईटी कार्रवाई करता है, कैश बरामद हो रहा है, दस्तावेज मिल रहे हैं, सम्पत्तियों का जखीरा निकल रहा है मुझे आश्चर्य हे कि यहाँ की सरकार और सीएम सहयोग देने की बजाए आईटी की कार्रवाई रोकने का प्रयास कर रहे हैं। आईटी अपना काम कर रहा है। उसका संवैधानिक अधिकार है। सीआरपीएफ के जवान लगे हुए थे, लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस भेज दी जाती है। सीआरपीएफ को काम करने से रोका जाता है। मध्य प्रदेश पुलिस सीआरपीएफ से उलझती है। क्या यह भ्रष्टाचार को बचाने का प्रयास नहीं है ?’

Leave a Reply

You may have missed