VIDEO : क्या करतारपुर कॉरिडोर के पीछे पाकिस्तान का है ‘ख़ालिस्तान एजेंडा’ ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 6 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव की निर्वाण स्थली यानी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित गुरुद्वारा दरबार सिंह करतारपुर साहिब। 16वीं सदी में गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 17-18 वर्ष इसी स्थल पर बिताये थे और इसी स्थान पर उनका निधन हुआ था। इसलिये सिख धर्मावलंबियों की आस्था उनकी इस निर्वाण स्थली से जुड़ी है। 1947 में बँटवारे के बाद यह स्थल पाकिस्तान में चला गया, तब से ही भारत की ओर से करतारपुर कॉरिडोर को सिख श्रद्धालुओं के लिये खोलने की माँग की जा रही है, परंतु पाकिस्तान की ओर से भारत की इस माँग पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अगस्त 2018 में इमरान खान के पाकिस्तान का पीएम बनने के बाद नवंबर 2018 में पाकिस्तान ने भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिये गुरुद्वारा दरबार सिंह करतारपुर साहिब के द्वार खोलने की घोषणा की और इसके लिये विशेष कॉरिडोर के निर्माण का भी ऐलान किया। इस कॉरिडोर को खोलने की घोषणा के समय से ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इसके पीछे छिपी पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठाने लगे थे। उनकी शंका को पहला बल तब मिला जब पाकिस्तान ने इस कॉरिडोर को लेकर बनाई गई कमेटी में एक खालिस्तानी आतंकवादी गोपाल सिंह चावला को जगह दी। अब जबकि इस कॉरिडोर का 9 नवंबर को उद्घाटन होने जा रहा है, तो उससे पहले पाकिस्तान की ओर से जारी किये गये एक वीडियो सॉन्ग में भी तीन खालिस्तानी आतंकवादियों के पोस्टर दिखाये गये हैं। इससे एक बार फिर पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठने लगा है कि कहीं पाकिस्तान इस कॉरिडोर के जरिये पंजाब में फिर से खालिस्तानी आतंकी कारस्तानियों को अंजाम देने की योजना पर तो काम नहीं कर रहा है ? क्योंकि ये पोस्टर सामने आने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी शंका को फिर दोहराया है और उन्होंने ही एक बार फिर पाकिस्तान की नीयत पर प्रश्नचिह्न लगाया है।

9 नवंबर को होना है करतारपुर कॉरिडोर का उदघाटन

9 नवंबर को दोनों ही देश करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन करने वाले हैं। भारत में यह कॉरिडोर गुरदासपुर में स्थित डेरा बाबा नानक से भारत-पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक बनाया गया है। इस सीमा से पाकिस्तान में यह गुरुद्वारा दरबार सिंह करतारपुर साहिब लगभग 4.2 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। इसके लिये पाकिस्तान ने भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा से करतारपुर साहिब तक विशेष कॉरिडोर का निर्माण कराया है। पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले की शकरगढ़ तहसील के कोटी पिंड गाँव में रावी नदी के पश्चिमी तट पर करतारपुर साहिब गुरुद्वारा स्थित है।

शकरगढ़ रोड पर आने के बाद हरे भरे खेतों के बीच स्थित सफेद रंग की गुरुद्वारे की शानदार इमारत नज़र आने लगती है। अभी तक भारत से करतारपुर साहिब के दर्शन के लिये सीमा के पास टेलिस्कॉप लगाया गया था, जिसके माध्यम से सिख श्रद्धालु करतारपुर साहिब के दर्शन करते थे। अब कॉरिडोर खुलने के साथ ही 9 नवंबर को पीएम मोदी करतारपुर जाने वाले पहले जत्थे को भी रवाना करेंगे। पाकिस्तान में भी इसी दिन वहाँ के पीएम इमरान खान इस कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। अपने उद्घाटन समारोह में उन्होंने पंजाब के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को भी आमंत्रित किया है। 12 नवंबर को पूर्णिमा के दिन गुरु नानक देव का 550वाँ प्रकाश पर्व यानी जन्मजयंती है। इसी पावन अवसर पर पहली बार भारतीय सिख श्रद्धालु रूबरू जाकर करतारपुर साहिब के दर्शन करेंगे।

क्या पाकिस्तान का खालिस्तानी एजेंडा है ?

करतारपुर साहिब मंदिर से भारत का भावनात्मक सम्बंध है, परंतु इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस कोरिडोर की आड़ में पाकिस्तान अपनी नापाक खालिस्तानी कारगुजारियों को अंजाम दे सकता है। ये सवाल खड़े होने की कई वजहें हैं।

  • अगस्त 2018 में इमरान खान ने पाकिस्तान के पीएम बनने के बाद नवंबर-2018 में करतारपुर कॉरिडोर खोलने की घोषणा की।
  • इसी नवंबर में भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने दो बार पंजाब की जनता को चेतावनी दी कि पाकिस्तान पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद के जिन्न को फिर से जिंदा करने की कोशिशें कर रहा है।
  • कॉरिडोर खोलने की घोषणा के पहले दिन से ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पाकिस्तान की मंशा पर सवाल उठाते आ रहे हैं।
  • कॉरिडोर के लिये पाकिस्तान की ओर से बनाई गई कमेटी में खालिस्तानी आतंकी गोपाल सिंह चावला को स्थान दिया गया, जिसे भारत के विरोध के बाद हटाया गया।
  • दिसंबर 2018 में अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नुन ने पाकिस्तान से करतारपुर में रेफरेंडम 2020 कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिये राजनीतिक सहयोग माँगा और उसने पाकिस्तान के लाहौर में अपना दफ्तर खोलने की भी घोषणा की थी।
  • इसी दौरान पुलिस जाँच में सामने आया था कि गुरुपतवंत सिंह पन्नुन के कई अन्य खालिस्तानी आतंकी संगठनों से सम्बंध हैं। उसका संबंध कश्मीरी आतंकी संगठन से ताल्लुक रखने वाले ग़ुलाम नबी फाई से भी है।
  • अमेरिका में आईएसआई के लिये काम करने के आरोप में फाई जेल की हवा खा चुका है।
  • पन्नुन के फाई से सम्बंध और फाई के आईएसआई से सम्बंध से सिख फॉर जस्टिस आतंकी संगठन को पाकिस्तान का सहयोग मिलने की बातों को बल मिला।
  • सिख फॉर जस्टिस आतंकी संगठन ने पंजाब में कई आपराधिक और आतंकवादी वारदातों को अंजाम दिया है। इसके लिये उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से हथियार व आर्थिक सहयोग मिल रहा है।
  • अब एक बार फिर पाकिस्तान ने भारत को उकसाने वाला काम किया है। कॉरिडोर के उदघाटन से पूर्व दोनों देशों ने करतारपुर साहिब से जुड़े वीडियो सॉन्ग लॉन्च किये हैं। इसमें पाकिस्तान की ओर से लॉन्च किये गये वीडियो सॉन्ग में तीन ऐसे खालिस्तानी आतंकवादियों के पोस्टर दिखाये गये हैं, जिन्हें जून-1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चलाये गये ऑपरेशन ब्लू स्टार में मार गिराया गया था। इनके नाम जरनैल सिंह भिंडरावाले, मेजर शाहबेग सिंह और अमरीक सिंह खालसा हैं।
  • जरनैल सिंह भिंडरावाले नामक आतंकी खालिस्तानी समर्थक था, जिसने तत्कालीन सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोला था। अमरीक सिंह खालसा भी खालिस्तानी समर्थक था और वह ऑल इण्डिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन के नाम से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता था। शाहबेग सिंह ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भिंडरावाले का साथ दिया था।
  • इस पोस्टर को देखकर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा है कि ‘मैं इस बारे में पहले दिन से चेतावनी दे रहा हूँ कि पाकिस्तान का यहाँ कोई छिपा एजेंडा है। जिसे समय पर पहचान लेना भारत के लिये जरूरी है और उसे नाकाम करना होगा, इससे पहले कि काफी देर हो जाए।’

क्या है खालिस्तानी आतंकवाद

15 अगस्त-1947 को भारत की आज़ादी के दो दिन बाद ही 17 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच बँटवारे की लकीर खिंच गई। इस बँटवारे में पंजाब के दो हिस्से हो गये। पश्चिमी पंजाब पाकिस्तान में चला गया और पूर्वी पंजाब भारत के हिस्से में आया। भारत के पंजाब से पाकिस्तान में हमेशा अम्नो-चैन का संदेश गया, परंतु वहाँ से बदले में वो सारी वस्तुएँ निर्यात की गईं, जिनसे पंजाब के साथ-साथ पूरे भारत में अस्थिरता फैली।

शुरुआत सोने की स्मगलिंग से हुई, जिसने बाद में आतंकी घुसपैठ, हथियार, नकली नोट और ड्रग्स की स्मगलिंग के रास्ते खोले। 80 के दशक में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तान आतंकवाद ने पंजाब में सिखों और हिंदुओं के बीच नफरत की दीवार खड़ी की, जिसके कारण 11,694 निर्दोष लोगों की जान गई, इनमें 60 प्रतिशत सिख थे। यह खालिस्तानी आतंकवादी सिख समुदाय को भारत देश और हिंदुओं के खिलाफ भड़काने का काम करते हैं और दोनों समुदायों में वैमनस्य फैला कर सिख समुदाय को खालिस्तान के नाम पर पंजाब को भारत से अलग करने की मंशा रखते हैं। जैसी मंशा पाकिस्तान की कश्मीर को लेकर है और वह भारतीय कश्मीर को वहाँ की जनता को भड़काकर आज़ाद कराने की बात करता है। ये और बात है कि पंजाब में उसकी मंशा को सिख समुदाय ने नाकाम कर दिया।

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