ममता की ‘निर्ममता’ करेगी मरीज़ों की दुर्दशा : बंगाल के बाद अब सोमवार को पूरे देश में हड़ताल करेंगे डॉक्टर

अहमदाबाद, 14 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी की असंवेदनशीलता के कारण अस्पतालों में डॉक्टरों और रोगियों के बीच उत्पन्न गतिरोध का फिलहाल कोई निवारण होता दिखाई नहीं दे रहा है। इस बीच राज्य में 4 दिन से डॉक्टरों की हड़ताल जारी है तथा देश के अन्य एक दर्जन राज्यों में पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों के समर्थन में प्रदर्शन किया जा रहा है। कोलकाता हाईकोर्ट ने सीएम ममता बैनर्जी को इस गतिरोध को दूर करने के लिये 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। दूसरी ओर डॉक्टरों की माँगों का कोई निवारण न किये जाने से भारतीय मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी सोमवार को देश भर में डॉक्टरों की हड़ताल का आह्वान किया है।

पश्चिम बंगाल सरकार और डॉक्टरों के बीच पिछले मंगलवार से जारी गतिरोध बढ़ता ही जा रहा है, जिसे देखते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी बंगाल की सीएम ममता बैनर्जी को पत्र लिखकर उनसे स्वयं हस्तक्षेप करके डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त करने के लिये कहा है।

डॉक्टरों को ममता की धमकी से बिगड़ी बात

दूसरी ओर ममता बैनर्जी ने हड़ताली डॉक्टरों के एक पैनल से मुलाकात की, परंतु डॉक्टरों की माँगों का निवारण लाने के बजाय उन्होंने हड़ताल को भी राजनीतिक चश्मे से देखा और आरोप लगाया कि बीजेपी और सीपीएम के बहकावे में आकर डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने उल्टा हड़ताली डॉक्टरों को ही धमका डाला कि यदि वह हड़ताल खत्म नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया। अब डॉक्टर सीएम ममता बैनर्जी से बिना शर्त माफी माँगने की माँग कर रहे हैं। साथ ही डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार के समक्ष कुछ शर्तें रखकर उन्हें पूरी करने की माँग कर रहे हैं।

बीजेपी पर लगाया डॉक्टरों को भड़काने का आरोप

हालाँकि सीएम ममता बैनर्जी ने हड़ताल में भी बांग्ला कार्ड खेल दिया है। उन्होंने उत्तरी 24 परगना जिले में अपनी पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए भी बीजेपी और सीपीएम पर डॉक्टरों को भड़काने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी बंगाल में डॉक्टरों को भड़काकर सांप्रदायिक तनाव पैदा करना चाहती है, परंतु वह बंगाल को गुजरात नहीं बनने देंगी। उन्होंने कहा कि जब वह बंगाल से बाहर किसी भी राज्य में जाती हैं तो राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रयोग करती हैं, और अपने राज्य में बांग्ला भाषा बोलती हैं, वैसे ही बंगाल में रहने वालों को भी बांग्ला भाषा ही बोलनी पड़ेगी।

हाईकोर्ट ने लगाई ममता को लताड़

इधर डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सीएम ममता बैनर्जी को फटकार लगाई और चार दिन से जारी गतिरोध को दूर करने के लिये कोई कारगर कदम नहीं उठाने के लिये लताड़ लगाई। हाईकोर्ट ने अगले 7 दिन में हड़ताल खत्म करने के साथ ही डॉक्टरों पर हुए हमले के दोषियों के विरुद्ध की गई पुलिस कार्यवाही की पूरी रिपोर्ट भी राज्य सरकार से माँगी है।

एनआरएस अस्पताल से शुरू हुई हड़ताल

उल्लेखनीय है कि 10 जून सोमवार की शाम कोलकाता के नील रत्न सरकार (IRS) मेडिकल अस्पताल में एक वृद्ध की मृत्यु के बाद भड़के परिवारजनों ने दो डॉक्टरों पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद से एनआरएस अस्पताल से शुरु हुई डॉक्टरों की हड़ताल 4 दिन में पूरे राज्य के अस्पतालों में फैल चुकी है। 150 से अधिक डॉक्टर अपने पद से इस्तीफा भी दे चुके हैं। जबकि देश के अन्य राज्यों में डॉक्टर काली पट्टी धारण करके, बैनरों के साथ प्रदर्शन करके पश्चिम बंगाल के हड़ताली डॉक्टरों का समर्थन कर रहे हैं। अनेक राज्यों में डॉक्टरों ने कलेक्टरों को ज्ञापन देकर केन्द्र व राज्य सरकारों से डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग भी की है। दूसरी तरफ अब भारतीय मेडिकल एसोसिएशन भी मैदान में कूद पड़ा है और उसने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिन में पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों की हड़ताल का कोई संतोषकारक निवारण नहीं किया गया तो सोमवार को पूरे देश के डॉक्टर हड़ताल पर चले जाएंगे और इससे जो स्थिति उत्पन्न होगी, उसके लिये सरकार जिम्मेदार होगी। इस चेतावनी के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी ममता बैनर्जी को पत्र लिखकर उनसे हड़ताल को तत्काल प्रभाव से समाप्त कराने के लिये हस्तक्षेप करने को कहा है। अब यह देखना होगा कि यह गतिरोध दूर करने के लिये ममता बैनर्जी क्या कदम उठाती हैं। दूसरी तरफ हड़ताल के कारण पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में मरीज और उनके परिवारजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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