सब कुछ सुंदर नहीं था पिचाई के जीवन में : यह है McKinsey से GOOLE तक पहुँचने की कहानी…

विशेष रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 4 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। क्या 12 जुलाई, 1972 के दिन किसी ने भी यह कल्पना की होगी कि भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में चेन्नई की मिट्टी में जन्मा एक बालक कभी अमेरिका में कैलिफोर्निया स्थित विश्व की सबसे बड़ी SEARCH ENGINE कंपनी GOOGLE में बैठेगा ? उत्तर है, ‘नहीं।’ किसी ने तो क्या, स्वयं इस बालक के माता-पिता ने भी नहीं सोचा होगा कि उनका बेटा गूगल से भी एक कदम आगे उसकी पैरेंट कंपनी ALPHABET का भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बन जाएगा, परंतु यह सब कुछ हुआ और वह बालक थे सुंदर पिचाई।

सुंदर पिचाई आज किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं, क्योंकि वे विश्व की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी गूगल में सीईओ के रूप में कार्यरत् हैं और आज फिर एक बार चर्चा में हैं, क्योंकि गूगल ने उन्हें प्रमोशन (पदोन्नति) देते हुए अपनी पैरेंटल कंपनी अल्फाबेट में भी सीईओ के रूप में नियुक्त किया है, परंतु क्या आप जानते हैं कि 47 वर्षीय सुंदर पिचाई सफलता और प्रसिद्धि के इस शिखर पर पहुँचे कैसे ? जैसा कि इनके नाम में सुंदर शब्द है, वैसा सब कुछ सुंदर नहीं था सुंदर पिचाई के जीवन में। वैसे तत्कालीन परिस्थितियों में सुंदर पिचाई का परिवार निर्धनता की श्रेणी में नहीं आता था, परंतु सम्पन्नता की श्रेणी में भी नहीं था। सुंदर पिचाई के परिवार को मध्यम वर्गीय श्रेणी में रखा जा सकता है, जो अक्सर अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उधार लेने पर विवश हो जाता है। सुंदर पिचाई को भी सफलता के इस शिखर पर पहुँचने के लिए उधारी के जुगाड़ से लेकर उलझे हुए प्रश्नों का सामना करना पड़ा, जो उनके नाम के अनुरूप सुंदर नहीं थे।

जब पीएचडी नहीं, एमएस-एमबीए को चुना

सुंदर पिचाई का पूरा नाम सुंदरराजन पिचाई है। उनके पिता का नाम रघुनाथ और माता लक्ष्मी पिचाई है। सुंदर पिचाई के पिता ब्रिटिश कंपनी GENERAL ELECTRIC COMPANY (JEC) यानी जेईसी में वरिष्ठ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (SENIOR ELECTRICAL ENGINEER) थे और इलेक्ट्रिकल उपकरण बनाने वाली इकाई (UNIT) के प्रबंधन (MANAGEMNET) का कार्य देखते थे। सुंदर और उनका परिवार तत्कालीन मद्रास (अब चेन्नई) के अशोकनगगर में रहता था। सुंदर ने अशोकनगर में ही जवाहर विद्यालय से 10वीं तक पढ़ाई की और फिर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT)-चेन्नई में स्थित वना वाणी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की। अब सुंदर का लक्ष्य था आईआईटी में प्रवेश लेना। यह आसान कार्य नहीं था, परंतु सुंदर ने कड़े परिश्रम से इस कठिन कार्य को सरल बना लिया और आईआईटी-खड़गपुर में प्रवेश लेने में सफल रहे। यहीं से उन्होंने मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। आईआईटी-खड़गपुर में उनके प्राध्यापकों ने उन्हें स्टैनफॉर्ड विश्वविद्यालय (STANFORD UNIVERSITY) से पीएचडी करने की सलाह दी, परंतु सुंदर ने दाखिला तो स्टैनफॉर्ड विश्वविद्यालय में ही लिया, परंतु मटीरियल साइसेंज़ एंड इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ साइंस तथा उसके बाद पेनसिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हॉटर्न स्कूल से एमबीए की डिग्री हासिल की।

अभावों के बीच भी लक्ष्य से भटके नहीं

सुंदर पिचाई का जब शिक्षा काल चल रहा था, तब उनके मध्यम वर्गीय परिवार में कई तरह के अभाव थे, जो आज के मध्यम वर्गीय परिवारों में नहीं पाए जाते। सुंदर पिचाई चेन्नई के अशोक नगर में दो कमरों वाले घर में रहते थे। परिवार में न टेलीविज़न (टीवी) था, न टेलीफोन और न ही कार। सुंदर ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए स्टैनफॉर्ड विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने का सपना तो देखा, परंतु उस सपने को पूरा करने योग्य आर्थिक सम्पन्नता नहीं थी। कड़ी मेहनत से सुंदर ने स्कॉलरशिप हासिल कर ट्यूशन फीस की दुविधा तो मिटा दी। अब समस्या थी चेन्नई से कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफॉर्ड युनिवर्सिटी पहुँचने की। पिता रघुनाथ पिचाई को सुंदर को कैलिफोर्निया भेजने के लिए उधारी करनी पड़ी। उधार लिए पैसों से सुंदर का विमान टिकट ख़रीदा गया और इस तरह सुंदर ने अपने सपनों की प उड़ान भरी।

मैकिंसे ने पहुँचाया मुक़ाम तक

सुंदर पिचाई ने पढ़ाई पूरी करने के बाद चेन्नई में ही अप्लाइड मटीरियल्स नामक कंपनी में इंजीनियरिंग एंड प्रोडक्ट मैनेजमेंट में नौकरी आरंभ की, परंतु उन्हें गूगल के मुक़ाम पर पहुँचाने में McKinsey & Company का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस कंपनी का मुख्यालय न्यूयॉर्क-अमेरिका में है। सुंदर ने चेन्नई स्थित मैकिंसे एंड कंपनी में मैनेजमेंट कन्सल्टिंग डिपार्टमेंट में कार्य आरंभ किया। अक्सर लोगों के मन में प्रश्न उठते हैं कि उन्हें यदि गूगल में नौकरी करनी हो, तो कैसे करें ? सुंदर का करियर ऐसे लोगों के प्रश्नों का उत्तर है। सुंदर पिचाई ने चेन्नई में अप्लाइड मटीरियल्स और मैकिन्से एंड कंपनी में जिस श्रेष्ठतापूर्ण कार्यदक्षता का परिचय दिया, उसे गूगल ने पहचान लिया। गूगल ने सुंदर पिचाई जैसे कुशल प्रबंधक को अपनी टीम में जॉइन करने से पहले उनकी दोनों कंपनियों से परामर्श किया और अंतत: उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाने का निर्णय किया।

जीमेल के बारे में नहीं बता सके, फिर भी गूगल ने नियुक्ति दी

सुंदर पिचाई का गूगल में इंटरव्यू 1 अप्रैल, 2004 को हुआ, परंतु यह इंटरव्यू बहुत ही कठिन था, क्योंकि सुंदर से इस इंटरव्यू में गूगल के नियोक्ताओं ने उस GMAIL के बारे में प्रश्न पुछा, जो उनके इंटरव्यू वाले दिन ही लॉन्च हुआ था। सुंदर से जब जीमेल के बारे में पूछा गया, तो उन्हें पहले तो यह अप्रैल-फूल वाला कोई मज़ाक लगा। एक बार नहीं, तीन-तीन बार हुए इंटरव्यू में सुंदर जीमेल के बारे में उत्तर नहीं दे पाए, जब चौथे इंटरव्यू में भी वही प्रश्न दोहराया गया, तो सुंदर ने स्पष्ट कह दिया, ‘नहीं, मैं जीमेल के बारे में नहीं जानता।’ उनके इस उत्तर से इंटरव्यूअर प्रभावित हुए और उन्होंने स्वयं सुंदर को 1 अप्रैल, 2004 को ही लॉन्च हुए जीमेल के बारे में बताया। इसके बाद गूगल ने सुंदर का चयन कर लिया।

मैकेंजी से आरंभ, क्रोम के जनक

आज हम जिस GOOGLE CHROME ब्राउज़र का उपयोग कर रहे हैं, वह सुंदर पिचाई की ही देन है। गूगल ने सुंदर को नियुक्त करने के साथ मैकेंजी और प्रोडक्ट मैनेजर गूगल के रूप में उत्तरदायित्व सौंपा। उन्हें गूगल टूलबार, डेस्कटॉप सर्च, गूगल गीयर जैसे प्रोडक्ट की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद जब गूगल अपने नए ब्राउज़र क्रोम के आविष्कार में जुटा, तो सुंदर गूगल की अग्रिम पंक्ति में आ खड़े हुए। यह सुंदर का ही करिश्मा था कि कुछ ही वर्षों में गूगल 19 नवंबर, 2009 को गूगल क्रोम लॉन्च करने में सफल रहा। उसके बाद क्रोमबुक को 2011 में जाँच व परीक्षण के लिए उतारा गया। मई-2010 में सुंदर पिचाई ने गूगल के नए वीडियो कोडेक VP8 के ओपन सोर्सिंग की घोषणा की। गूगल के इस वीडियो कोडेक ने एक नया वीडियो फॉर्मेट WebM प्रस्तुत किया। सुंदर पिचाई ने ही एंड्रॉइड उत्पादनों के आविष्कार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

और सुंदर पिचाई बने गूगल के सीईओ

10 अगस्त, 2015 को सुंदर पिचाई को यह सूचित किया गया कि उन्हें गूगल का अगला सीईओ बनाया जा रहा है। इससे पूर्व गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज ने 24 अक्टूबर, 2014 को सुंदर पिचाई को उत्पाद प्रमुख बनाने की घोषणा की थी। पिछले चार वर्षों में सुंदर पिचाई ने गूगल के सीईओ रहते हुए अनेक सफल शोध और उत्पाद गूगल यू़ज़र्स को उपलब्ध कराए हैं। सुंदर पिचाई अब गूगल की पैरेंटल कंपनी अल्फाबेट के सीईओ बनाए गए हैं। स्वयं लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने घोषणा की है। अब तक अल्फाबेट की सीईओ का पद सर्गेई संभाल रहे थे, परंतु अब सुंदर पिचाई गूगल और अल्फाबेट दोनों के सीईओ बन गए हैं। इसके साथ ही सुंदर पिचाई अल्फाबेट निदेशक मंडल (BOARD OF DIRECTORS) में भी रहेंगे।

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