जानिए कैसे गुरु नानक देव का ‘लंगर’ दुनिया को मुक्त कर सकता है भुखमरी से ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2030 तक दुनिया से भुखमरी को शून्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। दूसरी ओर विकासशील भारत के आँकड़े भुखमरी के मामले में चौंकाने वाले हैं। क्योंकि पिछले महीने जारी हुई भुखमरी के वैश्विक इंडेक्स की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कुल 197 देशों में से जिन 117 देशों में भुखमरी है, उनमें भारत भी शामिल है। इतना ही नहीं इस लिस्ट में भारत 102वें स्थान पर है, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश इस मामले में भारत से आगे हैं। सूची में पाकिस्तान 94वें और बांग्लादेश 88वें स्थान पर है। यानी कि भारत अपने दोनों पड़ोसी देशों से काफी पीछे है। अन्य दो पड़ोसी देशों की बात करें तो नेपाल इस लिस्ट में 73वें और श्रीलंका 66वें स्थान पर हैं। इस प्रकार भुखमरी के मामले में पड़ोसी देश भारत से बेहतर स्थिति में हैं। सवाल यह उठता है कि भुखमरी की इस समस्या से कैसे निपटा जाए ? संयुक्त राष्ट्र ने इस समस्या से निपटने के लिये विश्व की सभी सरकारों, खुद के अलग-अलग विभागों, गैर सरकारी संस्थाओं और व्यापारिक कंपनियों के साथ-साथ अनेक सामाजिक नेताओं और संगठनों को शामिल करके भोजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रबंध किया है।

एशियाई देशों में दो-तिहाई भुखमरी

संयुक्त राष्ट्र के इस विभाग ने लगभग 1,000 से अधिक गैर सरकारी संगठनों को इस अभियान में लगाया है। इस संगठन में लगभग 14,000 कार्यकर्ता जुड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र के इस विभाग के पास 20 पानी के जहाज, 70 हवाई जहाज और 5,000 ट्रक हैं। यह विभाग लगातार भुखमरी को समाप्त करने की दिशा में प्रयासरत् है। इस विभाग का आँकलन है कि भुखमरी की समस्या मुख्य रूप से विकासशील देशों में अधिक पाई जाती है, जहाँ 12 से 13 प्रतिशत लोगों को निर्धारित पौष्टिक स्तर से कम भोजन प्राप्त होता है। इसके अलावा यह समस्या उन क्षेत्रों में भी अधिक है, जहाँ प्राकृतिक आपदाएँ अधिक आती हैं। एशियाई देशों में लगभग दो-तिहाई भुखमरी पाई जाती है। भुखमरी का शिकार होने वालों में बच्चों की संख्या अधिक होती है। बच्चे भूख या पौष्टिक आहार की कमी को अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, जिससे वे कमजोर हो जाते हैं और रोगों का शिकार होकर उनकी मृत्यु हो जाती है।

दुनिया में हर 9 में से एक व्यक्ति भुखमरी का शिकार

संयुक्त राष्ट्र के आँकलन के अनुसार संसार में हर 9 लोगों में से एक व्यक्ति भुखमरी या पर्याप्त पौष्टिक स्तर के आहार की कमी का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की कुपोषित बच्चों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 5 साल से कम उम्र के लगभग 70 करोड़ बच्चों में एक तिहाई या तो कुपोषित हैं या मोटापे से जूझ रहे हैं। इससे इन बच्चों पर आजीवन बीमारियों से ग्रस्त रहने का खतरा है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (यूएनएफएओ) की नई रिपोर्ट के अनुसार 2018 में पूरी दुनिया में 82 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार पाये गये हैं, यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें से एशिया में 51.39 करोड़ और अफ्रीका में 25.61 करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हैं। भारत की बात करें तो लगभग 19.4 करोड़ लोग भुखमरी के शिकार हैं। यह नई रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के 2030 तक भुखमरी को शून्य करने के लक्ष्य को चुनौती दे रहे हैं।

भारत में लंगर मिटा सकता है भुखमरी ?

भारत में लंगर की एक परंपरा है, जिसमें लोग जाति, धर्म, सामाजिक स्थिति को भुलाकर एक साथ बैठते हैं और भोजन करते हैं। यह प्रथा अधिकांश स्वयंसेवी सेवाभावी संगठनों और व्यक्तियों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर चलाई जाती है। जबकि विविध मंदिरों और गुरुद्वारों में बड़े पैमाने पर प्रति दिन और सुबह-शाम आयोजित होती है। कई स्थानों पर इसे लंगर तो कई स्थानों पर सदाव्रत नाम से जाना जाता है। संयुक्त राष्ट्र का जो विभाग भूखे लोगों को भोजन सुरक्षा सुनिश्चित करता है, वह भी भारत की लंगर परंपरा से ही मिलता-जुलता है। ऐसे में देश के सेवाभावी लोगों को यह संदेश अवश्य मिलता है कि यदि भारत से भुखमरी को विदा करना है तो लंगर प्रथा को और व्यापक स्तर पर ले जाना होगा, जिसमें सदाव्रत और लंगर चलाने वालों के साथ बड़े पैमाने पर सेवाभावी लोगों और संस्थाओं को जुड़ना होगा। तभी समृद्ध भारत का सपना सही मायनों में साकार हो सकता है।

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