ये हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘PNA’, जो हैं ‘पावरफुल नेशन एजेंडा’ के सूत्रधार !

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 13 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 30 मई, 2019 को पद एवं गोपनीयता की दूसरी बार शपथ लेने के साथ ही देश की बागडोर संभाल ली है। स्वयं मोदी और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य जहाँ चुनावों में जनता की ओर से व्यक्त की गई आकांक्षाओं को पूरा करने के अभियान में जुट गए हैं, वहीं शासन के समानांतर ही काम करने वाले प्रशासन ने भी शासन और शासकों के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में मोर्चा संभाल लिया है।

आप कदाचित जानते ही होंगे कि भारतीय लोकतंत्र में दो स्तरीय राज व्यवस्था है। एक शासन और दूसरा प्रशासन। जनता की ओर से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से बने शासन का कार्य निर्णय करना होता, जबकि शासन की ओर से नियुक्त किए गए अधिकारियों से बने प्रशासन का कार्य शासन के निर्णयों को लागू करना होता है। शासन-प्रशासन दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। इसीलिए शासन और प्रशासन दोनों का सुदृढ़ होना आवश्यक है और इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ट्रैक रिकॉर्ड गुजरात के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों और भारत के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों से थोड़ा हटके है।

नरेन्द्र मोदी एक अनुशासित शासक के साथ ही एक कड़े प्रशासक के रूप में भी देखे जाते रहे हैं। यह परिपाटी उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री पद संभालते ही आरंभ कर दी थी, जो देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद भी जारी रखी है। इसीलिए मोदी ने पहले कार्यकाल में भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों के दम पर शासन यानी सरकार के अनेक निर्णयों को जन-जन तक पहुँचाया, वहीं अब दूसरे कार्यकाल में भी मोदी प्रशासनिक अधिकारियों को निरंतर जनसेवा में लगाए रखने की दिशा में अग्रसर हैं।

नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, तभी से शासन और प्रशासन यानी सरकार और नौकरशाही के बीच समन्वय बैठा कर काम करते रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने गुजरात में उनसे अच्छा तालमेल रखने वाले कई अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली बुला लिया। यही कारण है कि मोदी की दमदार प्रशासनिक टीम में गुजरात में काम कर चुके कई अधिकारी शामिल हैं, परंतु आज हम आपको मोदी की एक विशेष टीम से मिलवाने जा रहे हैं। यह टीम साउथ ब्लॉक में रह कर देश के शासन-प्रशासन के बीच मजबूत कड़ी का काम करती है। इसे पीएम मोदी की टीम ए भी कहा जाता है।

क्या और कौन हैं PM मोदी के PNA ?

अब बात करते हैं पीएनए की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष प्रशासनिक दल के तीन सदस्य हैं पीएनए। वैसे हमने इन तीन सदस्यों के प्रथम नामाक्षर के आधार पर पीएनए शब्द संरचना की है, परंतु ये तीनों सदस्य जो कार्य कर रहे हैं, उससे पीएनए को ‘पावरफुल नेशन एजेंडा’ के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। आइए, अब आपको यह भी बता देते हैं कि पीएम मोदी की इस टीम ए के ये तीन पीएनए कौन हैं ? तो इनमें पी का अर्थ है पी. के. मिश्रा यानी प्रमोद कुमार मिश्रा। एन का अर्थ है नृपेन्द्र मिश्रा और ए का अर्थ है अजित डोभाल। इनमें दोनों मिश्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं, जबकि डोभाल भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। आइए, अब आपको बताते हैं कि किस तरह इस पीएनए के हाथ में है पावरफुल नेशन एजेंडा ?

नृपेन्द्र मिश्र

सबसे पहले बात करते हैं नृपेन्द्र मिश्र की। उत्तर प्रदेश कैडर के 1967 बैच के आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सबसे बड़े अधिकारी हैं। केबिनेट रैंक प्राप्त मिश्र प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में मोदी की पसंदीदा योजनाओं की निगरानी करते हैं। नृपेन्द्र मिश्र 2014 से ही मोदी की गुड बुक में रहे हैं। मिश्र पीओमओ से मंत्रालयों व राज्य सरकारों के बीच समन्वय सेतु का कार्य करते हैं। हार्वर्ड केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहे मिश्र को ब्यूरोक्रेसी के साथ ही पॉलिटिक्स की भी गहरी समझ है।

पी. के. मिश्रा

पीके यानी प्रमोद कुमार मिश्रा को भी केबिनेट रैंक का दर्जा मिला हुआ है। गुजरात कैडर के 1972 के आईएएस अधिकारी मिश्रा को दिल्ली के शासकीय गलियारों में पीके के रूप में जाना जाता है। पी. के. मिश्रा को पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में भी प्रधानमंत्री का अतिरिक्त प्रधान सचिव बनाए रखा गया है। नीतिगत मुद्दों पर पीके के अभिप्राय को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। महत्वपूर्ण उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग हो या फिर केबिनेट सचिवालय के साथ समन्वय व प्रशासनिक सुधार हो, पीके का दखल रहता है। पीके मिश्रा की विशेषता यह है कि वे लाइमलाइट से दूर रहते हैं, परंतु वे पीएमओ और ब्यूरोक्रेसी के बीच मजबूत कड़ी हैं। पूर्व कृषि सचिव मिश्रा आपदा प्रबंधन एजेंसियों की बैठकें लेते हैं और फसल बीमा जैसी योजनाओं की निगरानी करते हैं। पीके इकोनॉमिक्स में पीएचडी हैं और विश्व बैंक के सलाहकार समूह के सदस्य भी हैं।

अजित डोभाल

इनसे भला कौन अपरिचित होगा ? केरल कैडर के 1968 की बैच के आईपीएस अधिकारी अजित डोवाल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) हैं। पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में डोवाल को एनएसए नियुक्त किया था और दूसरे कार्यकाल में उन्हें इस पद पर बनाए रखते हुए केबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया है। 74 वर्षीय डोभाल एक बहादुर, कुटिल सूझ-बूझ के धनी गुप्तचर अधिकारी के रूप में विख्यात हैं। मिज़ोरम और पंजाब में उन्होंने कई मिशनों का सफल नेतृत्व किया है, तो मोदी सरकार के दौरान हुई सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक सहित राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी निर्णयों में अजित डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्र सुरक्षा के मामले में पीएम मोदी की मजबूत और दृढ़ छवि है, जिसके नैपथ्य में अजित डोभाल पूरी तरह सटीक बैठते हैं।

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