और इस तरह 30 अप्रैल का दिन बन गया है मोदी-राहुल के लिए महत्वपूर्ण : जानिए क्यों ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। (फाइल चित्र)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। (फाइल चित्र)

राफेल पर SC के संभावित फ़ैसलों से 169 सीटों पर पड़ सकता है असर

लोकसभा चुनाव 2019 में चुनाव प्रचार के दौरान देश के रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़ी राफेल डील में भ्रष्टाचार का एकतरफा शोर अभी तक भी गूंज रहा है। सुप्रीम कोर्ट (SC) कह चुका है कि हमने नहीं कहा कि चौकीदार चोर है, परंतु कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बराबर हमलावर बने हुए हैं। अपनी राजनीतिक अपरिक्वता और उन्माद के चलते अदालती अवमानना के केस में फँसे राहुल को लगा कि खेद जताने से काम चल जाएगा, परंतु भाजपा (BJP) राहुल इतनी आसानी से कहाँ छोड़ने वाली थी। यही कारण है कि आज राहुल को अपने 10 अप्रैल वाले बयान पर अदालती अवमानना का नोटिस जारी कर दिया गया, जिस पर 30 अप्रैल को सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही यह भी साफ कर दिया कि 30 अप्रैल को ही राफेल डील के लीक दस्तावेजों पर पुनर्विचार की याचिका पर भी सुनवाई होगी। इस प्रकार 30 अप्रैल, 2019 का दिन एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि एससी दोनों ही मामलों पर सुनवाई करने वाला है।

भाजपा चाहती है राहुल क्षमा मांगे

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी। (फाइल चित्र)

वास्तव में पहले चरण में 11 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक एक दिन पहले 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील के लीक दस्तावेजों को अवैध मानने की सरकार की दलील को ठुकराते हुए उन्हें वैध करार दिया था और इस पर पुनर्विचार कर सुनवाई करने का फ़ैसला सुनाया था। राहुल गांधी 10 अप्रैल को अमेठी से नामांकन पत्र दाखिल कर रहे थे, तभी उन्हें इस फ़ैसले की आधी-अधूरी जानकारी मिली और उन्होंने कह दिया, ‘सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चौकीदार चोर है, चौकीदार ने चोरी कराई है।’ राहुल गांधी का इशारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ था, क्योंकि पिछले 18 महीनों से वे चौकीदार शब्दप्रयोग मोदी के लिए ही कर रहे हैं।

CJI ने पूछा, ‘चौकीदार कौन है ?’

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई। (फाइल चित्र)

राहुल के 10 अप्रैल के बयान को अदालती अवमानना बताते हुए भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने सुप्रीम कोर्ट में राहुल के विरुद्ध मुकदमा दायर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल से अपने बयान पर 7 दिन में सफाई मांगी। राहुल ने एससी में सोमवार को ही अपनी सफाई देते हुए अपने बयान पर केवल खेद जताया। भाजपा इतने से संतुष्ट नहीं हुई। इसलिए मंगलवार को पुनः लेखी के वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला उठाते हुए कहा कि राहुल ने ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर केवल खेद जताया है, क्षमा नहीं मांगी है। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने रोहतगी से पूछा कि चौकीदार कौन है ? सीजेआई ने यह भी कहा कि उन्होंने राहुल का जवाब नहीं पढ़ा है, जिसके बाद रोहतगी ने राहुल का जवाब पढ़ते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का गलत अर्थघटन कर राहुल ने पूरे देश में कहा कि PM नरेन्द्र मोदी ‘चौकीदार’ चोर हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट खुद कह चुका है कि उसने ऐसा कुछ नहीं कहा। इसके बाद सीजेआई ने लेखी के वकील रोहतगी से कहा कि वे राहुल के हलफनामे में अपना जवाब दाखिल करें। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल के अदालती अवमानना और राफेल डील के लीक दस्तावेजों पर पुनर्विचार की याचिकाओं पर सुनवाई 30 अप्रैल के दिन निर्धारित कर दी।

दो तिहाई चुनाव निपट चुका होगा

इस तरह 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई फ़ैसला सुना सकता है, परंतु संभावित फ़ैसले के चुनाव पर प्रभाव की बात करें, तो 30 अप्रैल से पहले तक देश में 374 सीटों यानी दो तिहाई सीटों के लिए मतदान पूरा हो चुका होगा। केवल 169 सीटों के लिए मतदान शेष रहेगा। ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट के संभावित फ़ैसले राहुल-मोदी के विरुद्ध या पक्ष में आए, तो इन 169 सीटों पर इसका असर पड़ सकता है।

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