क्या VOTING TREND विपक्ष के लिए ख़तरे की घंटी और ‘MODI ONCE MORE’ का इशारा है ? मतदान के आँकड़े क्यों ममता और नीतिश को कर सकते हैं बेचैन ? जानिए इस रिपोर्ट में

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए प्रथम चरण का मतदान गुरुवार को सम्पन्न हो गया। प्रथम चरण में 20 राज्यों की 91 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ। हमेशा की तरह इस बार भी मतदान के बाद चुनाव आयोग (EC) मतदान के आँकड़ों के साथ मीडिया से मुख़ातिब हुआ। इसमें कोई नई बात नहीं थी, परंतु ईसी ने मतदान को लेकर जो बयान दिया, उसके निहितार्थ निकाले जाएँ, तो यह बयान मोदी विरोधी एजेंडा लेकर चल रहे कांग्रेस सहित सभी राजनीतकि दलों और राहुल गांधी सहित सभी नेताओं के लिए ख़तरे की घंटी है। दूसरी तरफ ईसी का यह बयान इस बात की ओर भी इशारा करता है कि पहले चरण में लोगों ने ‘MODI ONCE MORE’ के पक्ष में मतदान किया है। इतना ही नहीं, मतदान के जो आँकड़े ईसी ने प्रस्तुत किए, वो एक तरफ मोदी विरोधी टोली की मुखर नेता ममता बैनर्जी, तो दूसरी तरफ मोदी के सहयोगी नीतिश कुमार को भी बेचैन करने वाले लग रहे हैं।

क्या कहा चुनाव आयोग ने ?

चुनाव उपायुक्त उमेश सिन्हा

सबसे पहले जानते हैं कि आखिर पहले चरण के मतदान के बाद चुनाव आयोग ने क्या कहा ? चुनाव आयोग ने गुरुवार शाम पहले चरण के मतदान का निर्धारित समय सम्पन्न होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें चुनाव उपायुक्त उमेश सिन्हा ने कहा, ‘पहले चरण में मतदाताओं ने भारी उत्साह के साथ मतदान किया। पहले चरण के मतदान में वोटिंड ट्रेंड 2014 की ही तरह था। दूसरे चरण में वोटिंग बढ़ने की उम्मीद है अलग-अलग राज्यों से मिले मतदान के रुझान को देखते हुए लगता है कि वोटिंग ट्रेंड पिछले लोकसभा चुनाव की तरह ही है।’

EC का बयान मोदी के पक्ष में और विरोधियों के लिए चिंताजनक ?

चुनाव आयोग के बयान का राजनीतिक रूप से विश्लेषण करें, तो काफी हद तक यह लगता है कि पहले चरण में लोगों ने फिर एक बार-मोदी सरकार के लिए वोट दिया है। यदि वोटिंड ट्रेंड पांच वर्ष पहले जैसा ही है, तो 2014 में भाजपा-एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला था और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे। ऐसे में ईसी के इस बयान से विपक्षी खेमे में चिंता पैदा होना स्वाभाविक है, जो अलग-अलग होकर भी एकजुट होने का दावा और दिखावा करता आ रहा है। यद्यपि ईसी ने केवल वोटिंग ट्रेंड 2014 जैसा रहने की बात कही है।

ममता और नीतिश को क्यों परेशान कर सकते हैं आँकड़े ?

वास्तव में पहले चरण में जिन 20 राज्यों में मतदान हुआ, उनमें पश्चिम बंगाल की 2 और बिहार की 4 लोकसभा सीटें शामिल थीं। महत्वपूर्ण बात यह है कि पश्चिम बंगाल की 2 लोकसभा सीटों के लिए 81 प्रतिशत तक भारी मतदान हुआ, तो बिहार की 4 लोकसभा सीटों के लिए 50 प्रतिशत ही वोट पड़े। इन आँकड़ों का राजनीतिक विश्लेषण करें, तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती पैठ के पक्ष में यदि भारी मतदान हुआ है, तो ममता के गढ़ में सेंध लगना निश्चित है। इसी तरह यदि बिहार के मतदाताओं ने मतदान के प्रति निरुत्साह जताया है, तो सीधा अर्थ यह है कि वहाँ मोदी-नीतिश लहर काम नहीं कर रही है और इसका सीधा फायदा कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन को हो सकता है।

योगी-मोदी या गठबंधन पर मुहर ?

देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश की बात करें, तो गुरुवार को 8 लोकसभा सीटों सहारनपुर, कैराना, मुज़फ्फरपुर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाज़ियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में लगभग 64 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2014 के 65.79 प्रतिशत के मुकाबले कुछ ही कम है। अंतिम आँकड़ों में मतदान का प्रतिशत बढ़ भी सकता है। इन सभी सीटों पर 2014 में भाजपा का कब्जा था, परंतु इस बार भाजपा को सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है। ऐसे में एक अनुमान यह लगाया जा सकता है कि मायावती, अखिलेश यादव और अजित सिंह तथा उनके गठबंधन के मोदी का भारी विरोध करने के बावजूद मतदान प्रतिशत में बड़ी वृद्धि न होना, गठबंधन के विरुद्ध और भाजपा के पक्ष में भी जा सकता है। तो यह भी संभव है कि मतदान प्रतिशत न बढ़ने का नुकसान सीधा भाजपा को हो।

इन तीन मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दाव पर

ईसी के आँकड़ों के मुताबिक आंध्र प्रदेश की 25 सीटों पर 66, उत्तराखंड की 5 सीटों पर 57.85, तेलंगाना की 17 सीटों पर 60, सिक्किम की 1 सीट पर 69.90, मिज़ोरम की 1 सीट पर 60, नगालैण्ड की 1 सीट पर 79, त्रिपुरा की 1 सीट पर 81.8, असम की 6 सीटों पर 68, छत्तीसगढ़ की 1 सीट पर 56, जम्मू-कश्मीर की 2 सीटों पर 54.49, अरुणाचल प्रदेश की 2 सीटों पर 66, महाराष्ट्र की 7 सीटों पर 56, मेघालय की 2 सीटों पर 67.16 और ओडिशा की 4 सीटों पर 69 प्रतिशत वोट पड़े। इनमें तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों चंद्रबाबू नायडू, के. चंद्रशेखर राव (KCR) और नवीन पटनायक की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है।

इन दिग्गजों की चुनावी किस्मत EVM में कैद

पहले चरण के मतदान के साथ ही जिन बड़े राजनीतिक दिग्गजों की चुनावी किस्मत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में कैद हो गई, उनमें नागपुर से नितिन गडकरी, हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी, मुज़फ्फरनगर से अजित सिंह, गाज़ियाबाद से वी. के. सिंह, गौतम बुद्ध नगर से डॉ. महेश शर्मा, बाग़पत से जयंत चौधरी, जमुई से चिराग पासवान, गया से जीतनराम मांझी और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर से हरीश रावत शामिल हैं।

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