कांग्रेस की सरकार आई, तो इस पूरे गाँव को जेल में डाल देगी ? जानिए यह मज़ाक है या हक़ीकत ?

फ्रांस द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान के सौदे पर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर इस सौदे में उद्योगपति अनिल अंबाणी को फायदा कराने का आरोप लगाते हैं। हालांकि एक पुरानी कहावत है कि जो दूसरों के लिये गड्ढा खोदता है, वह स्वयं ही उस खड्डे में गिरता है। ऐसा ही हुआ राहुल गांधी के साथ भी।

‘चौकीदार चोर है’ का नारा लगाने वाले राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का गलत अर्थघटन कर पीएम मोदी को राजनीतिक रूप से में फंसाने की कोशिश तो की, परंतु अब खुद राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने के मामले में फंस गये हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है और सुप्रीम कोर्ट के कथन का गलत अर्थघटन करने को लेकर उनसे खुलासा भी मांगा है।

राहुल गांधी तो राफेल के फेर में फंसते दिखाई दे ही रहे हैं, परंतु दिल्ली में राफेल पर मचे घमासान के बीच दिल्ली से करीब 750 किलोमीटर दूर एक गाँव के लोग मुसीबत में फँस गए हैं, क्योंकि इस गाँव का नाम राफेल है। यह गाँव छत्तीसगढ़ के राजसमंद जिले में है। दिल्ली से राजसमंद 605 किलोमीटर दूर है और राफेल गाँव राजसमंदस जिला मुख्यालय से करीब 135 किलोमीटर दूर बसा हुआ है। राफेल में दूसरे चरण में 18 अप्रैल को मतदान होने वाला है।

जब से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील पर सवालों की बौछार शुरू की है, तब से राजसमंद जिले के राफेल गाँव के लोगों के लिए गाँव का नाम ही मुसीबत का सबब बन गया है। इस नाम के कारण ही गाँव वालों का आसपास के अन्य गाँव के लोग राफेल के लोगों मज़ाक उड़ा रहे हैं और उन पर चुटकुले बना रहे हैं। अन्य गाँवों के लोग यहाँ तक कहते हैं कि अगर देश में कांग्रेस की सरकार आई, तो वह राफेल गाँव के लोगों को जेल में डाल देगी। इस प्रकार के परिहास से इन लोगों के लिये अपने गाँव का नाम लेना तक मुश्किल हो गया है।

पहले यह गाँव छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जिले में शामिल था, परंतु 1998 में इसे राजसमुंद जिले का हिस्सा बना दिया गया। यह गाँव अपने जिला मुख्यालय से तो कोसों दूर है ही, विकास से भी मीलों दूर है। अभी तक यहां विकास तो क्या किसी राजनीतिक दल का नेता भी नहीं पहुंचा है। पूरी तरह से खेती पर निर्भर इस गाँव के लोग खेती के लिये भी बारिश पर निर्भर हैं। इस गाँव के लोगों की एक मात्र मांग यही है कि उनके गाँव की खेती को सिंचाई योजनाओं से जोड़ा जाये ताकि उन्हें खेती के लिये बारिश पर निर्भर न रहना पड़े।

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