रोचक जानकारी : क्या है 4 का चमत्कार, जो हर असंभव कार्य को संभव बना देता है ?

आलेख : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 17, सितंबर 2019 (युवाPRESS)। “जहाँ चार यार मिल जायें ,वहीं रात हो गुलज़ार जहाँ चार यार महफ़िल रँगीन जमे … महफ़िल रँगीन जमे, दौर चले धूम मचे नज़र देखे नये चमत्कार, जहाँ चार यार”। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन की फिल्म शराबी (1984) के एक गीत की इस पंक्ति का फिल्म में चाहे जिस उद्देश्य से उपयोग हुआ हो, परंतु हम इस गीत की पंक्ति में उल्लेखित 4 के महत्व को समझाने जा रहे हैं। स्वयं इस गीत की पंक्ति में कहा गया है कि चार यार मिल जाते हैं, तो रात गुलज़ार हो जाती है। चमत्कार भी हो जाता है, परंतु आज हम आपको इस गीत के विषय में नहीं, अपितु इस गीत में इस्तेमाल किए गए 4 अंक से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं।

आज हम अपने लेख में 4 अंक का ज़िक्र इसलिए भी कर रहे हैं, क्योंकि भारत सहित समूचे विश्व में 4 के अंक का अत्यंत महत्व है। यह अंक ऐसा है, जो किसी भी असंभव कार्य को संभव कर सकता है। किसी की प्रशंसा करते समय भी हम ‘चार चांद’ लग गए जैसे गए मुहावरे का प्रयोग कर ही लेते हैं। हम आते तो अपनी जननी यानी माँ की कोख से हैं, परंतु दुनिया से हमारी विदाई चार कँधों पर ही होती है। मौसम भी अपने रंग चार बार बदलता है, सर्दी, गर्मी, वर्षा और बसंत, तो आइए जानते हैं कि हमारे जीवन और देश-दुनिया में 4 अंक का कितना और क्या-क्या महत्व है ?

पहले बात करते हैं सृष्टि की, जो युगों-युगों से चली आ रही है, परंतु इन युगों की संख्या 4 है यानी सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। सृष्टि की रचना के आधार हमारे वेद ग्रंथ माने जाते हैं। हमारे वेदों की संख्या भी चार है, ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद, इन वेदों में ही मानव जाति के उत्थान से लेकर पतन तक की बातें कही गई हैं, फिर आते हैं जीवन की चार अवस्थाओं पर जो हमारा मूल आधार है, बालपन, किशोर, युवा और वृद्ध, जिससे संसार के हर मानव जाति के लोगों को गुज़रना पड़ता है, फिर वह भारत के हों या किसी अन्य देश के।

आर्यसत्य की संकल्पना बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांत में भी चार ‘चत्वारि आर्यसत्यानि’ और पालि में ‘चत्तरि अरियसच्चानि’ चार अवस्थाओं का वर्णन किया गया है, पहला दुःख, दूसरा समुदय, तीसरा निरोध और चौथा मार्ग, अर्थात प्राणी जन्म से ही विभिन्न दु:खों की शृंखला में जीता है, संसार के विषयों के प्रति उसकी तृष्णा सदैव समुदय के रूप में बना रहती है, तृष्णा का अशेष प्रहाण कर देना निरोध कहलाता है और जब संसार की वस्तुओं के कारण न कोई दु:ख होता है और न मरणोंपरांत उसका पुनर्जन्म होता है, तो वह मोक्ष का मार्ग बन जाता है।

हिंदू धर्म-ग्रंथों के अनुसार मनुष्य जीवन के जो पुरुषार्थ बताए गए हैं, वह भी चार हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। हिन्दू समाज को भी चार वर्णों में कार्यों की ईकाइयों के अनुरूप बाँटा गया है। ब्राह्मण (शिक्षाविद), क्षत्रिय (सुरक्षाकर्मी), वैश्य (वाणिज्य) और शूद्र (उद्योग व कला)। इसमें सभी वर्णों को उनके कर्म मे श्रेष्ठ माना गया है। शिक्षा के लिए ब्राह्मण श्रेष्ठ, सुरक्षा करने मे क्षत्रिय श्रेष्ठ और वैश्य व शूद्र उद्योग करने मे श्रेष्ठ माने जाते हैं।

धर्म कर्म में प्रयोग होने वाला स्वस्तिक चिन्ह भी चार शुभ दिशाओं का प्रतीक है। पारंपरिक रूप से हिंदू धर्मों में सौभाग्य की निशानी के रूप स्वस्तिक का उपयोग किया जाता है। दिशा भी चार ही होती हैं, पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण। भगवान ब्रह्मा और कार्तिके के मुख भी चार माने गए हैं।

हिन्दु धर्म में 4 अंक का, तो अपना एक अलग महत्व है ही, परंतु इस्लाम में भी 4 अंक की बहुत मान्यता है। ईद अल-अज़हा चार दिनों तक मानाया जाता है। इस्लाम में चार रशीदुन या ख़लीफा (मुसलिम राष्ट्र में एक सर्वोच्च पद) भी चार हैं अबू बक्र, उमर इब्न अल-खट्टब, उथमन इब्न अफान और अली इब्न अबी तालिब। इस्लाम में चार ऐसे महीने हैं जिसमें युद्ध निषिद्ध है। ये महीने हैं जिबरेल (गेब्रियल), मिकील (माइकल), इजरायल (अजरेल), और इसराफिल (राफेल)। इन चार महीनों में युद्ध की अनुमति नहीं दी जाती। इस्लाम की पाक पुस्तकें भी चार हैं, तोराह, ज़बूर, इंजिल, कुरान।

भारत ही नहीं दुनिया भी मानती है कि पृथ्वी 4 अंक के बिंदुओं पर टिकी है, यानी ब्रह्मांड संबंधी प्रणालियाँ दुनिया के चार कोनों को अनिवार्य रूप से कम्पास के चार बिंदुओं के अनुरूप ही मानती है। चार जिया देश की पवित्र संख्या है, जो अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको में स्थित एक स्वदेशी जनजाति भी है। चीनी, वियतनामी, कोरियाई और जापानी चार नंबर को लेकर अंधविश्वासी होते हैं, क्योंकि यह उनकी भाषाओं में “मौत” का एक नाम है। स्लाव पौराणिक कथाओं में, देवता स्वेतोविद के भी चार सिर माने गए हैं। स्लाव लोग या स्लावी लोग ( Slavic peoples) पूर्वी यूरोप, दक्षिणी यूरोप और उत्तर एशिया में बसने वाली एक मानव जाति हैं। इनके पूर्वज स्लावी भाषाएँ बोलते थे, जो हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की एक उपशाखा है।

फोर फ्रीडम यानी चार मौलिक स्वतंत्रताएँ, जिसे अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूजवेल्ट ने 19421 में घोषित किया था, इसका अर्थ है कि दुनिया में सभी को आनंद लेना चाहिए, जिसके तहत लोगों को चार प्रकार की स्वतंत्रता दी गई, फ्रीडम ऑफ स्पीच, फ्रीडम ऑफ रिलिजन, फ्रीडम फ्रॉम वांट औरफ्रीडम फ्रॉम फियर।

गैंग ऑफ़ फोर, चीन की सांस्कृतिक क्रांति के दौरान प्रमुखता से उठने वाले चार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं का लोकप्रिय नाम था, परंतु 1976 में चेयरमैन माओ ज़ेडॉन्ग की मृत्यु के बाद इसे समाप्त कर दिया गया, परंतु तब से चीन में कई अन्य राजनीतिक गुटों के चार अध्यक्षता वाली पार्टी को “गैंग्स ऑफ़ फोर” कहा जाता है।

मानव शारीरिक रचना का आधार भी चार डीएनए और आरएनए एक न्यूक्लियोबेस प्रकार की संख्या पर ही आधारित है, एडेनिन, ग्वानिन, साइटोसिन, थाइमिन (आरएनए में यूरैसिल)। स्तनधारियों के हृदय में चार कक्ष होते हैं। हमारे शरीर में दौड़ने वाला रक्त सामान्य ABO रक्त समूह प्रणाली 4 भागों में बँटी है, (A, B, O, AB) । मनुष्य के चार कैनाइन और चार ज्ञान दांत होते हैं। चार तपेदिक अवस्थाएँ मानव शरीर का संचालन करती है, संगीन, पित्तशामक, मंदनाशक, कफनाशक। गाय के पेट को चार पाचन डिब्बों में विभाजित किया गया है, रेटिकुलम, रूमेन, ओस्सम और एबॉसम। सुपरऑर्डर एंडोप्रोटेगोटा के कीड़े, जिन्हें होलोमेटाबोला के रूप में भी जाना जाता है, जैसे कि तितलियाँ, चींटियाँ, मधुमक्खियाँ, अपने जीवन की चार चरणों से होकर गुजरते हैं, 1. भ्रूण (डिंब, अंडा) से पूर्ण मेटामोर्फिज़्म, 2. लार्वा (जैसे ग्रब, कैटरपिलर), 3.प्यूपा (जैसे क्रिसलिस), और अंत में (4) इमागो। मक्खियों को छोड़कर सभी कीटों में चार पंख होते हैं।

देश भी चार कार्डिनल गुणों पर चलता है, न्याय, विवेक, संयम, भाग्य। रासायन विज्ञान में भी 4 अंक का अपना अलग ही महत्व है। कार्बन की वैधता (जो पृथ्वी पर जीवन का आधार है) चार ही है, इसके अलावा अपने टेट्राहेड्रल क्रिस्टल बॉन्ड संरचना के कारण, हीरा (कार्बन के प्राकृतिक अलॉट्रोप्स में से एक) सबसे कठिन प्राकृतिक रूप से ज्ञात सामग्री है। यह भी सिलिकॉन की वैधता है, जिसके यौगिक पृथ्वी के क्रस्ट के अधिकांश द्रव्यमान का निर्माण करते हैं। बेरिलियम की परमाणु संख्या पदार्थ की चार मूल अवस्थाओं से बनी है, ठोस, तरल, गैस और प्लाज्मा। भौतिक विज्ञान में भी चार मूलभूत बल (विद्युत चुंबकत्व, गुरुत्वाकर्षण, कमजोर परमाणु बल और मजबूत परमाणु बल) माने जाते हैं। बिग फोर (डिसएम्बिगेशन) भी चार नियमों जोड़, घटाना, गुणा और भाग पर आधारित है।

चौहराहे पर भी चार रास्ते होते हैं। ताश के पत्तों के भी चार सूट होता हैं दिल, हीरे, क्लब, हुकुम। देश भी ‘चतुर्थ स्तंभ (फोर्थ इस्टेट) पर ही टिका है, राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका और पत्रकारिता।

जब 4 यार मिले, तो सेप्पा बन गया स्वर्ग

हाल ही में 4 युवकों ने मिलकर अरुणाचल प्रदेश के एक कस्बा जिसका नाम सेप्पा है, का कायाकल्प ही कर दिया। चार सदस्यों वाली, इस युवा टीम ने अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी-कमेंग जिला के सेप्पा कस्बे की दीवारों को वाल-पेंटिंग से प्राकृतिक दृश्यों से रग कर सजा डाला। ‘आई लव सेप्पा’ ( I Love Seppa ) नामक अभियान के तहत जुडी बगंग, जैकी बोडो, ब्रूस तलोंग और टोरुंग बगंग नाम के इन चार युवकों ने एक टीम तैयार की और पूर्वी-कमेंग जिले के सेप्पा कस्बे की दीवारों को एक वर्ष में ही वाल-पेंटिंग से सजा दिया। ‘आई लव सेप्पा’ अभियान सेप्पा उपायुक्त एसएच. गौरव सिंह राजावत के ने शुरू की, इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है, जिनमें स्वच्छता, कानून और नियम, महिला सशक्तिकरण, गर्ल-चाइल्ड, ड्रग्स निवारण, सौ-फीसदी टीकाकरण, कुपोषण विहीनता और स्कूल से जीरो ड्रॉपआउट शामिल है। ये चार युवा आज समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

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