CDS होगा तीनों सेनाओं को ‘LEADER’ : अटलजी का सपना सच कर दिखाया मोदी ने

* मोदी ने ठंडे बस्ते से निकाला सीडीएस

* रक्षा क्षेत्र में 5वाँ सर्वोच्च पद होगा सीडीएस

* ब्रिटेन सहित 10 देशों में है सीडीएस पद

* कारगिल युद्ध 1999 के बाद आया था सुझाव

* राजनीतिक असहमति बनी थी बाधा

* 20 साल बाद पूरा हुआ अटलजी का अधूरा काम

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 15 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से आज भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी उद्घोषणा की। यह ऐसी उद्घोषणा है, जो कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी करना चाहते थे, परंतु राजनीतिक असहमति के चलते नहीं कर सके।

जी हाँ। यदि राजनीतिक असहमति बन जाती, तो भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद 20 साल पहले ही सृजित हो जाता और जल, थल, नभ तीनों सेनाओं को एक मजबूत और सुदृढ़ नेतृत्व मिल जाता। ख़ैर, मोदी अक्सर कहते हैं कि परमात्मा ने कुछ कामों करने के लिए उन्हें ही निमित्त बनाया है और आज मोदी अटलजी के एक और अधूरे काम को पूरा करने का निमित्त बन गए। मोदी ने लाल किले की प्राचीर से घोषणा की कि सेना के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित किया जाएगा। इस पद के गठन के बाद तीनों सेनाओं थलसेना (INDIAN ARMY), जलसेना (INDIA NAVY) और वायुसेना (INDIAN AIR FORCE) के स्तर पर एक प्रभावी नेतृत्व मिलेगा। इस पद की काफी समय से मांग उठ रही थी।

कारगिल समीक्षा समिति ने की थी अनुशंसा

देश में पहली बार सीडीएस के पद की आवश्यकता कारगिल युद्ध 1999 के बाद महसूस की गई। कारगिल युद्ध समाप्त होने के बाद तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कारगिल समीक्षा समिति (KRC) का गठन किया था। केआरसी ने पाया कि कारगिल युद्ध के दौरान सेना की विभिन्न शाखाओं के बीच संचार और प्रभावी सामंजस्य का अभाव था, जिसके कारण कारगिल युद्ध में भारत को अपेक्षाकृत अधिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी कारण केआरसी ने सीडीएस पद के सृजन का सुझाव दिया, जो तीनों सेनाओं के बीच तालमेल स्थापित कर सके और सैन्य मसलों पर सरकार के लिए सिंगल पॉइंट सलाहकार के रूप में काम कर सके। सीडीएस पद का कार्यकाल 2 वर्ष रखने का सुझाव दिया गया था, परंतु राजनीतिक असहमति के चलते और सशस्त्र बलों के कुछ वर्गों के विरोध के कारण 20 साल पहले सीडीएस का पद सृजित नहीं हो सका। अब तक देश में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय का जिम्मा चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी (CSC) पर है। 1945 से गठित सीएससी तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास तो करती है, परंतु उसके पास अधिक पावर और अधिकार नहीं है। सीएससी के अध्यक्ष की सहायता एकीकृत रक्षा कर्मी (आईडीएस) नामक संगठन करता है। आईडीएस की स्थापना कारगिल युद्ध के बाद 23 नवम्बर, 2001 को हुई। आईडीएस सीएससी अध्यक्ष को सुझाव और सहायता देता है, परंतु यह बहुत प्रभावशाली व्यवस्था नहीं है।

इन देशों में है सीडीएस पद

भारत सीडीएस पद सृजित करने वाला पहला देश नहीं है। भारत से पहले कनाडा, फ्रांस, गांबिया, घाना, इटली, नाइज़ीरिया, सिएरा लिओन, स्पेन, श्रीलंका और युनाइटेड किंग्डम (UK) यानी ब्रिटेन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद है। जिन देशों में इस पद की व्यवस्था है, उनमें से अधिकांश देशों में यह सर्वोच्च सैन्य पद होता है। भारत की बात करें, तो चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं के प्रमुख राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवाल के बाद रक्षा क्षेत्र में पाँचवाँ सर्वोच्च पद होगा। सीडीएस अपने से ऊपर वाले चारों पदों पर विराजित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और एनएसए का मुख्य सैन्य सलाहकार होगा।

युद्ध के समय बढ़ जाती है सीडीएस की भूमिका

सीडीएस की भूमिका युद्ध काल में सर्वाधिक होती है। युद्ध के दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय करने वाले सीडीएस के चलते दुश्मनों का मुकाबला करने में बड़ी मदद मिलेगी। भारत ने 1947 से लेकर 1999 तक हुए सभी युद्धों में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी का भारी खामियाजा भुगता है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय इसी समन्वय के अभाव में वायुसेना को कोई भूमिका नहीं दी गई, जबकि वह तिब्बत की पठारी पर जमा चीनी सैनिकों को निशाना बना सकती थी।

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