कौन हैं कलियुग के ‘रामदूत’, जो 92 वर्ष की आयु में भी चट्टान की तरह खड़े हैं ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। ‘रामदूत अतुलित बलधामा, अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।’ हनुमान चालीसा की इस पंक्ति से आपको अनुमान लग गया होगा कि हम किसकी बात कर रहे हैं ? जी हाँ, त्रेता युग में भगवान श्री राम के परम सेवक हनुमानजी लंकापति रावण के दरबार में राम दूत के रूप में पहुँचे थे और उन्होंने वहाँ रावण तथा उसके दरबारियों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। अब हम कलियुग ‘रामदूत’ की बात लेकर आपके समक्ष उपस्थित हुए हैं। क्या आप जानते हैं उन्हें ? यदि नहीं, तो कोई बात नहीं, हम आपको उनसे अवगत कराएँगे।

भारत के न्यायिक इतिहास की अनूठी घटना

सामान्यतः जब कोर्ट में कोई मामला जाता है तो वादी और प्रतिवादी दो पक्ष होते हैं। दोनों पक्षों के वकील अदालत में अपना-अपना पक्ष रखते हैं और न्यायाधीश के समक्ष दोनों की ओर से दलीलें, सबूत और गवाह पेश किये जाते हैं, परंतु देश के न्यायिक इतिहास में यह पहली बार देखने को मिल रहा है, जहाँ वादी प्रत्यक्ष स्वरूप में उपस्थित नहीं है और उसकी ओर से एक 92 वर्ष के वयोवृद्ध एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट में अप्रत्यक्ष व्यक्ति की पैरवी कर रहे हैं। वह अप्रत्यक्ष व्यक्ति हैं भगवान श्री राम और उनके रामदूत हैं सुप्रीम कोर्ट में उनकी पेरोकारी करने वाले वयोवृद्ध एडवोकेट परासरन (PARASARAN)। दोनों दूत एक ही नामाराशि के हैं। हनुमानजी को पवनसुत और पवनपुत्र भी कहते हैं, वहीं वयोवृद्ध पेरोकार एडवोकेट का नाम भी परासरन है।

कौन हैं कलियुग के रामदूत ?

92 वर्षीय वयोवृद्ध सीनियर एडवोकेट परासरन का जन्म 1927 को तमिलनाडु के श्रीरंगम में हुआ था। उनके पिता का नाम केसवा अयंगर था और वह मद्रास हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के वकील थे। परासरन के तीन बेटे हैं – मोहन, सतीश और बालाजी। तीनों बेटे भी पेशे से वकील हैं। परासरन ने 1958 से सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। आपातकाल के दौरान वह तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल थे और 1980 में देश के सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किये गये थे। 1983 से 1989 तक उन्होंने भारत के अटॉर्नी जनरल के रूप में काम किया। वह 1970 के दशक से ही खासे लोकप्रिय रहे हैं। हिंदू धर्मग्रंथों पर उनकी खासी पकड़ है। यूपीए-2 के कार्यकाल में वह कुछ समय के लिये सोलिसिटर जनरल थे। 92 वर्ष के अत्यंत वयोवृद्ध परासरन 2016 से कोर्ट में बहुत कम दिखते हैं, परंतु वर्तमान में वह दो बड़े केसों के चलते एक बार फिर सुर्खियों में आये हैं। पहले सबरीमाला और अब अयोध्या केस। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस की दैनिक सुनवाई प्रारंभ हुई, तब एक अलग प्रकार की घटना देखने को मिली।

रामलला की ओर से अपना पक्ष रखने के लिये जब 92 वर्षीय सीनियर वकील परासरन अपनी सीट से खड़े हुए तो स्वयं चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उनसे पूछा कि ‘क्या आप बैठकर बहस करना पसंद करेंगे ? इस पर उन्होंने बड़ी ही शालीनता से प्रत्युत्तर दिया कि कोई बात नहीं, खड़े होकर बहस करने की परंपरा है।’ इससे परासरन के कद का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि न्याय क्षेत्र में उनका कद कितना विराट है ?

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