23 मई नहीं, 23 अप्रैल को ही तय हो जाएगी देश की नई सरकार, 14 चुनावों से वलसाड बना हुआ है ‘GATEWAY OF DELHI’, परंतु 71 जैसा अपवाद हुआ तो मोदी-राहुल की हो जाएगी छुट्टी !

भारत में 1951 से 2014 तक 15 लोकसभा और अनेकों विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और हर चुनाव के साथ कुछ मिथक और परम्पराएँ जुड़ी हुई होती हैं। अंतिम निर्णय तो मतदाता का ही होता है, परंतु अनायास ही कुछ मिथक और परम्पराएँ ऐसी जुड़ जाती हैं, जो वर्षों तक सही सिद्ध होती रहती हैं। ऐसा एक मिथक है जो जीता वलसाड, उसी पार्टी की केन्द्र में सरकार।

देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी बने रहेंगे या फिर राहुल गांधी या किसी अन्य चेहरे को प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिलेगा ? इस प्रश्न का उत्तर 23 मई को मिलेगा, जब लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आएँगे, परंतु जहाँ तक मिथक और परम्परा की मानें, तो गुजरात की वलसाड लोकसभा सीट ऐसी है, जो वर्ष 1957 से 2014 तक हुए पिछले 15 में से 14 चुनावों में (1971 अपवाद) लगातार यह निर्धारित कर रही है कि देश में नई सरकार किस पार्टी की बनेगी ? क्या लोकसभा चुनाव 2019 में भी ऐसा ही होगा ? चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार गुजरात में 23 अप्रैल को मतदान है और वलसाड में भी उसी दिन वोट पड़ेंगे। ऐसे में यदि वलसाड के साथ जुड़ा यह मिथक सही साबित होने वाला होगा, तो यह निश्चित है कि 23 मई नहीं, अपितु 23 अप्रैल को ही तय हो जाएगा कि देश में अगली सरकार भाजपा या कांग्रेस की ही होगी, क्योंकि वलसाड में मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच ही है। ऐसे में 23 मई को तो वास्तविक परिणाम आएँगे, परंतु वलसाड के मतदाता 23 अप्रैल को ही देश की नई सरकार पर मुहर लगा चुके होंगे।

14 चुनावों से कसौटी पर खरा उतर रहा वलसाड

वलसाड लोकसभा सीट पिछले 15 में से 14 चुनावों से अपनी इस मिथक और परम्परा रूपी कसौटी पर खरी उतर रही है। वलसाड सीट का अस्तित्व 1957 में आया और 2014 तक हुए 15 में से 14 चुनावों में जिस पार्टी ने वलसाड में जीत हासिल की, केन्द्र में उसी पार्टी की सरकार बनी। प्रधानमंत्री कोई भी हो सकता है। वलसाड केवल सत्ता पर आने वाली पार्टी पर ही मुहर लगाता है।

आइए अब आपको 1957 से 2014 तक का वलसाड इतिहास बताते हैं :

1957, 1962 और 1967

वलसाड में लोकसभा का पहला चुनाव 1957 में हुआ, जिसमें कांग्रेस के नानू पटेल जीते और केन्द्र में कांग्रेस की ही सरकार बनी। 1962 और 1967 में भी कांग्रेस के नानू पटेल जीते और इतिहास ने अपने आपको दोहराया।

1971

यद्यपि लोकसभा चुनाव 1971 में वलसाड का परिणाम अपवाद बन गया, क्योंकि इस चुनाव में नानू पटेल ही जीते, परंतु वे स्वतंत्र कांग्रेस के टिकट पर जीते, जबकि केन्द्र में सरकार कांग्रेस की बनी थी।

1977

लोकसभा चुनाव 1977 में पूरे देश ने इंदिरा के आपातकाल के विरुद्ध जनादेश दिया, तो वलसाड ने भी अब जनता पार्टी में आ चुके नानू पटेल को जिताया और केन्द्र में जनता पार्टी की सरकार बनी।

1980 और 1984

लोकसभा चुनाव 1980 और 1984 में वलसाड से कांग्रेस के उत्तम पटेल जीते। 1980 में इंदिरा गांधी, तो 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी।

1989

लोकसभा चुनाव 1989 में देश में राजीव और कांग्रेस विरोधी तथा जनता दल के वी. पी. सिंह के पक्ष में लहर थी। भाजपा का जनता दल के साथ गुजरात सहित पूरे देश में गठबंधन था। गठबंधन के तहत वलसाड सीट जनता दल के हिस्से में आई थी और यहाँ से जनता दल के अर्जुन पटेल जीते थे। केन्द्र में जनता दल की ही सरकार बनी।

1991

लोकसभा चुनाव 1991 में कांग्रेस ने फिर वलसाड पर विजय हासिल की। उसके उम्मीदवार उत्तम पटेल जीते और केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनी।

1996, 1998 और 1999

लोकसभा चुनाव 1996 में वलसाड ने भाजपा के मणि चौधरी पर मुहर लगाई और केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी। भले ही यह सरकार 13 दिनों में गिर गई। 1997 में भी वलसाड में भाजपा के मणि चौधरी जीते और केन्द्र में भाजपा सरकार बनी, जो 13 महीनों में गिर गई। 1999 में फिर मणि चौधरी ने वलसाड में भाजपा को जीत दिलाई और केन्द्र में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनी, जो छह साल चली।

2004 और 2009

लोकसभा चुनाव 2004 में वलसाड के मतदाताओं का मन पलटा। इस बार उन्होंने कांग्रेस के किशन पटेल को जिताया और केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनी। 2009 में भी वलसाड ने यही का यही इतिहास दोहराया और केन्द्र में कांग्रेस सरकार बनी।

2014

लोकसभा चुनाव 2014 में वलसाड के लोग मोदी लहर से अछूते नहीं रहे और भाजपा के डॉ. के. सी. पटेल जीते। परिणामस्वरूप केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी।

वलसाड इतिहास दोहराएगा या 1971 जैसा अपवाद होगा ?

अब सवाल यह उठता है कि लोकसभा चुनाव 2019 में वलसाड 14 चुनावों का इतिहास दोहराएगा या 1971 वाला अपवाद होगा? यदि इतिहास ने अपने आपको दोहराया, तो सीधा अर्थ है कि 23 अप्रैल को वलसाड की जनता भाजपा-कांग्रेस में से जिस पार्टी को जिताएगी, वही पार्टी केन्द्र में सरकार बनाएगी और यदि 1971 जैसा अपवाद हुआ, तो वलसाड में जीत चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की, केन्द्र में सरकार किसी और पार्टी की ही बनेगी।

केसी और जीतू के हाथों में मोदी-राहुल की नाव ?

यदि भाजपा और कांग्रेस यह मान लें कि वलसाड विजय ही केन्द्र में सरकार बनाने की गारंटी है, तो लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी और राहुल की नाव डॉ. के. सी. पटेल और जीतू चौधरी के हाथों में है। पटेल भाजपा प्रत्याशी हैं और 2014 में पहली बार जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के दो बार सांसद रह चुके किशन पटेल को हराया था। भाजपा ने दोबारा उन्हें प्रत्याशी बनाया है, तो जीतू चौधरी कांग्रेस उम्मीदवार हैं। यदि इतिहास, मिथक और परम्परा पर भरोसा किया जाए, तो स्पष्ट है कि केसी पटेल की जीत ही मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बना सकती है, तो जीतू चौधरी की जीत से कांग्रेस की सरकार और राहुल का प्रधानमंत्री बनना तय है।

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