LAST CHANCE : हर गुजराती VOTE करने से पहले जान ले अपने प्रत्याशी और उससे बनने वाले PM को !

Report – Vineet Dubey

लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में 23 अप्रैल मंगलवार को 16 राज्यों की 117 सीटों के लिये मतदान हो रहा है। इसमें गुजरात की भी सभी 26 सीटों के लिये वोटिंग हो रही है। ऐसे में गुजरात के प्रत्येक मतदाता को मतदान करने से पहले अपने वोट का महत्व समझना जरूरी है। साथ ही उसे अपने प्रत्याशी को भी जानना चाहिये तथा अपने वोट से बनने वाले प्रधानमंत्री के बारे में भी अवलोकन करना चाहिये।

हम आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में एक तरफ भाजपा और उसके सहयोगी दल मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं। इस प्रकार भाजपा और एनडीए का प्रधानमंत्री कौन होगा यह सर्वविदित है। वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाला यूपीए है, जिसमें प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार हैं, इसलिये यह गठबंधन प्रधानमंत्री उम्मीदवार को लेकर दुविधा में है।

गुजरात में 26 सीटों पर 4 करोड़ 47 लाख से अधिक मतदाता हैं, जो कुल 371 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

अहमदाबाद पूर्व

अहमदाबाद पूर्व सीट पर पाटीदार मतदाताओं को ध्यान में रखकर कांग्रेस तथा भाजपा दोनों ने ही पटेल समुदाय के उम्मीदवारों को टिकट दिया है। यहां भाजपा के एच.एस. पटेल और कांग्रेस की गीता पटेल के बीच चुनावी मुकाबला है। 2014 में यहां से भाजपा के उम्मीदवार फिल्म स्टार परेश रावल जीते थे, जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी हिम्मतसिंह को हराया था।

अहमदाबाद पश्चिम

अहमदाबाद पश्चिम सीट एससी सीट है। यहां भाजपा के उम्मीदवार डॉ. किरीट सोलंकी के विरुद्ध कांग्रेस से पूर्व सांसद राजू परमार चुनाव मैदान में हैं। यहां से भाजपा के डॉ. किरीट सोलंकी 2009 और 2014 में दो बार सांसद चुने गये हैं और तीसरी बार पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।

गांधीनगर

गांधीनगर सीट पिछले दो दशक से भाजपा का गढ़ बनी हुई है। इस बार यहां से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह स्वयं चुनाव लड़ रहे हैं। उनके विरुद्ध कांग्रेस ने गांधीनगर उत्तर के विधायक सी. जे. चावड़ा को उम्मीदवार बनाया है। अमित शाह से पहले यहां से भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी चुनाव लड़ते आये हैं, भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।

मेहसाणा

उत्तर गुजरात की यह सीट पाटीदार मतदाताओं के वर्चस्व वाली सीट है। यहां से भाजपा की शारदा पटेल उम्मीदवार हैं, वहीं कांग्रेस ने भी पाटीदार समुदाय के ही ए. जे. पटेल को टिकट दिया है। यहां एक ही समुदाय के दो प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। पिछली बार यहां से भाजपा की जयश्री पटेल ने चुनाव जीता था।

पाटण

उत्तरी गुजरात की ही यह दूसरी ऐसी सीट है, जिस पर एक ही समुदाय के दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है। इस सीट पर ठाकोर समुदाय के मतदाताओं की बहुलता है। इसलिये यहां भाजपा के भरतसिंह डाभी और कांग्रेस के जगदीश ठाकोर के बीच कांटे की टक्कर है। पिछली बार यहां से भाजपा के लीलाधर वाघेला चुनाव जीते थे।

साबरकाँठा

साबरकांठा सीट पर भी ठाकोर समुदाय का वर्चस्व है, इसलिये यहां भी कांग्रेस तथा भाजपा ने ठाकोर समुदाय के उम्मीदवारों को ही टिकट दिया है। यहां से भाजपा के उम्मीदवार दीपसिंह राठौड़ तथा कांग्रेस के राजेन्द्र ठाकोर के बीच मुकाबला है। पिछली बार भी यहां से दीपसिंह राठौड़ ही सांसद चुने गये थे।

बनासकाँठा

उत्तर गुजरात की इस अंतिम सीट पर चौधरी समुदाय का वर्चस्व है। यहां भी एक ही समुदाय के दो प्रत्याशियों के बीच टक्कर है। भाजपा ने यहां से राज्य सरकार के एक मंत्री परबतभाई पटेल को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने परथी भटोळ को चुनाव मैदान में उतारा है। पिछली बार यहां से भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी चुनाव जीते थे।

खेडा

अहमदाबाद से सटी मध्य गुजरात की इस सीट पर अलग-अलग समुदाय के मतदाता हैं। यहां भाजपा ने वर्तमान सांसद देवूसिंह चौहान को दोबारा टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व मंत्री बिमल शाह को उम्मीदवार बनाया है।

आणंद

मध्य गुजरात की इस लोकसभा सीट पर भी अलग-अलग समुदाय के मतदाता है, वैसे यह सीट कांग्रेस के पूर्व सांसद भरतसिंह सोलंकी का मजबूत गढ़ मानी जाती है और इस बार भी उन्होंने इसी अखाड़े से ताल ठोकी है। भरतसिंह सोलंकी और कांग्रेस इस सीट को लेकर आश्वस्त नज़र आ रहे हैं। हालांकि 2014 की मोदी लहर में यह सीट भी भाजपा के पाले में आ गिरी थी और यहां से भाजपा के दिलीप पटेल चुनाव जीते थे। इस बार भाजपा ने यहां से पटेल समुदाय के मितेश पटेल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार क्षत्रिय समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

वड़ोदरा

वड़ोदरा सीट भाजपा की गढ़ मानी जाती है। भाजपा इस सीट को लेकर आश्वस्त है। पार्टी ने इस बार भी यहां से वर्तमान सांसद रंजनबेन भट्ट को रिपीट किया है, वहीं कांग्रेस ने प्रशांत पटेल को चुनाव मैदान में उतारा है।

छोटा उदेपुर

यह सीट एसटी सीट है। यहां भाजपा ने गीताबेन राठवा को टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस की ओर से रंजीत मोहनसिंह चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार यहां से भाजपा के रामसिंह राठवा चुनाव जीते थे। इस सीट पर हर बार की तरह इस बार भी दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

पंचमहाल

गोधरा से पंचमहाल बनी इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। इस सीट पर भाजपा ने पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में जीते एक मात्र निर्दलीय विधायक रतनसिंह चौहान को भाजपा में शामिल होने के इनाम के तौर पर टिकट दिया है। पिछली बार यहां से भाजपा के पूर्व सांसद प्रभातसिंह चौहान चुनाव जीते थे।

दाहोद

दाहोद लोकसभा सीट भी एसटी सीट है। यहां से भाजपा के जसवंतसिंह भाभोर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने बाबूभाई कटारा को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर भी हर बार की तरह इस बार भी कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। पिछली बार भी यहां से भाजपा के जसवंतसिंह भाभोर चुनाव जीते थे।

भरूच

दक्षिण गुजरात की भरूच लोकसभा सीट में आदिवासी और मुस्लिम समुदाय की अच्छी खासी आबादी है। यह कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल का गढ़ माना जाता है। यहां भाजपा ने वर्तमान सांसद मनसुख वसावा को रिपीट किया है, वहीं कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय के शेरखान पठान को टिकट दिया है। शेरखान को टिकट मिलने से गुजरात में 35 साल बाद किसी मुस्लिम उम्मीदवार को लोकसभा का चुनाव लड़ने का मौका मिला है।

नवसारी

नवसारी सीट भाजपा की गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर स्थानीय मतदाताओं के अलावा बाहरी मतदाताओं की भी अच्छी खासी संख्या है, इन बाहरी मतदाताओं में भी मराठी मतदाता सविशेष हैं। इसलिये यहां से भाजपा ने मराठी समुदाय से आने वाले सी. आर. पाटिल को दोबारा टिकट थमाया है, जबकि उनके सामने कांग्रेस ने स्थानीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले धर्मेश पटेल को चुनाव मैदान में उतारा है।

सूरत

सूरत की लोकसभा सीट भी भाजपा का गढ़ मानी जाती है, यहां से भाजपा की दर्शनाबेन जरदोश दो बार से सांसद चुनी जा रही हैं और तीसरी बार भी विरोधियों को चुनौती दे रही हैं। जबकि कांग्रेस की ओर से यहां अशोक अधेवाला को चुनाव मैदान में उतारा गया है, जो पाटीदार समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

बारडोली

दक्षिण गुजरात की यह सीट एसटी सीट है। यह सीट कांग्रेस के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अमरसिंह चौधरी के बाद अब उनके सुपुत्र और केन्द्रीय मंत्री रहे तुषार चौधरी का गढ़ मानी जाती है, परंतु 2014 की मोदी लहर में कांग्रेस का यह किला भी ढह गया था और यहां से भाजपा के प्रभुभाई वसावा चुनाव जीते थे।

वलसाड

दक्षिण गुजरात की यह अंतिम लोकसभा सीट अपनी विशेषता के लिये जानी जाती है। इस सीट से जिस राजनीतिक दल का प्रत्याशी चुनाव जीतता है, केन्द्र में उसी दल की सरकार बनती है। इस सीट के मतदाताओं का मिजाज बदलता रहता है। 2004 और 2009 में यहां से कांग्रेस के किशन पटेल जीते तो केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की सरकार बनी। 2014 में यहां से भाजपा के डॉ. के. सी. पटेल जीते तो केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार बनी। इस बार यहां से भाजपा के डॉ. के. सी. पटेल रिपीट किये गये हैं वहीं कांग्रेस ने जीतू चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।

सुरेन्द्रनगर

सौराष्ट्र की बात करें तो सुरेन्द्रनगर में कोली समुदाय के दो प्रत्याशी आमने-सामने हैं। यहां से भाजपा के डॉ. महेन्द्र मुंजपरा और कांग्रेस के सोमाभाई पटेल के बीच मुकाबला है। सोमाभाई पटेल सुरेन्द्रनगर के लिंबड़ी के विधायक हैं। पिछली बार यहां से भाजपा के देवजीभाई फतेपरा चुनाव जीते थे।

राजकोट

यह सीट भी भाजपा की गढ़ मानी जाती है। 1989 से 2014 तक यहां भाजपा का ही कब्जा रहा है। भाजपा यहां केवल एक बार 2009 में चुनाव हारी थी। भाजपा ने यहां अपने वर्तमान सांसद मोहनभाई कुंडारिया को रिपीट किया है, वहीं कांग्रेस ने ललितभाई कथगरा को उम्मीदवार बनाया है।

अमरेली

यहां पाटीदार समुदाय के उम्मीदवार आमने सामने हैं। गुजरात के विपक्षी नेता परेश धानाणी और भाजपा उम्मीदवार नारायणभाई काछड़िया के बीच मुकाबला है। अमरेली सीट सौराष्ट्र में पाटीदारों का गढ़ मानी जाती है। यहां पिछली बार भा नारणभाई काछड़िया चुनाव जीते थे। पाटीदार आंदोलन के बाद यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हो रहे हैं, इसलिये यहां मुकाबला दिलचस्प होगा।

जूनागढ

जूनागढ़ में भी कोली पटेल समुदाय के ही उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर है। यहां भाजपा के राजेश चूड़ास्मा के विरुद्ध कांग्रेस ने पुंजाभाई वंश को टिकट दिया है। पिछली बार भी यहां से राजेश चूड़ास्मा चुनाव जीते थे। यह सीट भी भाजपा की गढ़ मानी जाती है। पहली बार 1991 में भावनाबेन चीखलिया ने यह सीट भाजपा को दिलाई थी। इसके बाद वह 1996, 1998, 1999 में भी चुनाव जीतकर लगातार चार बार सांसद बनने वाली पहली महिला बनी। केवल 2004 में यहां से कांग्रेस के जशुभाई बारड़ सांसद चुने गये। 2009 में फिर भाजपा ने इस सीट पर कब्जा किया हुआ है।

पोरबंदर

यह सीट भी भाजपा की गढ़ मानी जाती है। 1991 से यहां लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। कांग्रेस और एक बार उसकी सहयोगी एनसीपी भी यहां से भाग्य आजमा चुकी हैं, परंतु उन्हें सफलता नहीं मिली। इस बार भाजपा ने अपने वर्तमान सांसद विट्ठल रादड़िया के स्थान पर रमेश धड़ुक को टिकट दिया है और कांग्रेस ने यहां ललित वसोया को उम्मीदवार बनाया है।

जामनगर

जामनगर के मतदाता परिवर्तन के मूड वाले रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा की पूनम माडम चुनाव जीती थी। इससे पहले दो बार यहां से कांग्रेस के सांसद रहे हैं। इस बार यहां भाजपा ने दोबारा पूनम माडम को टिकट दिया है, वहीं कांग्रेस ने मुलुभाई कंडोरिया को प्रत्याशी बनाया है।

भावनगर

यह सीट भी 1991 से लगातार भाजपा का गढ़ बनी हुई है। भाजपा ने वर्तमान सांसद भारतीबेन शियाल को रिपीट किया है, जबकि कांग्रेस ने यहां मनहरभाई पटेल को टिकट दिया है। भाजपा इस सीट को लेकर आश्वस्त है, वहीं कांग्रेस हर बार की तरह कड़ी टक्कर देने के दावे कर रही है।

कच्छ

यह एससी सीट है। इस सीट पर 1996 से लगातार भाजपा का कब्जा है। 2014 में भाजपा के युवा दलित उम्मीदवार विनोद चावड़ा ने पहली बार चुनाव लड़ा और सांसद बने। भाजपा ने इस बार भी उन्हें रिपीट किया है, जबकि कांग्रेस ने उनके सामने नरेश महेश्वरी को आजमाया है।

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