सेंगर तो सैम्पल है : बलात्कार के आरोपियों में 18 सांसद और 58 विधायक शामिल

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 21 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। कितना वीभस्त लगता है, जब आप किसी के पास समस्या लेकर जाएँ और आपकी उलझनों का निवार्ण करने वाला ही आपकी विपत्ति का सबसे बड़ा कारण बन जाए। इसे हमारे देश का दुर्भाग्य नहीं, तो और क्या कहें कि हम जिसे पूरे विश्वास के साथ अपना उत्तरदायित्व सौंपते हैं, वही हमारे ही अधिकारों का हनन करने लगे। हमारा संकेत देश के उन महानभाव नेताओं की ओर है, जो देश कि सुरक्षा की शपथ तो ले लेते हैं, यद्यपि उसकी रक्षा करना भूल जाते हैं। वहीं बात जब नारी के सम्मान की हो, तो सोचकर ही आक्रोश जागृत हो उठता है कि जिनके भरोसे महिलाएँ समाज में चलने का हौसला करती हैं, वही नेता उनके दामन को दागदार कर जाते हैं। अब सवाल ये उठता है कि 1-2 की नहीं, जब पूरा का पूरा कुनबा ही दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध कर बैठे, तो समाज में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आख़िर किसे सौंपी जाए ?

वर्ष 2017 में घटी एक घटना ने यही सवाल खड़ा किया था, परंतु जिसका उत्तर आज तक नहीं मिल पाया। दरअसल उत्तर प्रदेश के उन्नाव में विधान सभा के सदस्य (Member of the Legislative Assembly) MLA कुलदीप सिंह सेंगर ने एक महिला की अस्मिता को तार-तार कर दिया था, जिसकी आज सुनवाई हुई और उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई, परंतु प्रश्न ये है कि किसी महिला के सम्मान को कलंकित करने वाले को 2 वर्ष के पश्चात अपराधी साबित किया गया और उसे सजा दी गई अर्थात महिला से दुष्कर्म करने वाले को अपराधी मामने में भी पूरे दो वर्ष लग गए। हालाँकि कुलदीप सिंह सेंगर को बांगरमऊ विधायक पर दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 25 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। सोचने वाली बात तो ये है कि अकेले कुलदीप सिंह सेंगर इस अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं है। उसकी तरह कुल 76 जनप्रतिनिधि, जिनमें 18 सांसद और 58 विधायक महिलाओं के साथ अपराध करने की कतार में खड़े हैं।

बात अगर न्याय सिद्धांत की करें, जिसके अमुसार दोष साबित न होने पर किसी को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता, तो इसके साथ ही यह भी एक कटु सत्य है कि अगर रेप का आरोपी कोई निर्वाचित प्रतिनिधि है, तो वह अपने कथित अपराध की जाँच प्रक्रिया को निश्चित तौर पर प्रभावित करता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब रेप के आरोपी 3 नेताओं को सांसद चुना गया। इतना ही नहीं, राज्य चुनाव में रेप के 6 आरोपियों को विधायक बनने में सफलता मिली थी।

(Association for Democratic Reforms) ADR की रिपोर्ट के अनुसार बीते 10 वर्षों यानी 2010-2019 के दौरान सांसदों पर महिला अपराध के दर्ज किए गए मामलों में 850 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव के दौरान महिला अपराधों में आरोपी उम्मीदवारों की कुल संख्या 231 थी। दुष्कर्म के अतिरिक्त ऐसिड अटैक, यौन उत्पीड़न, महिलाओं को देह व्यापार में धकेलना और नाबालिगों की खरीद-फरोख्त जैसे अपराधों में 17 राजनीतिक पार्टियों के सांसद या विधायक शामिल हैं। इन 17 पार्टियों में देश की वर्तमान सबसे बड़ी 2 राजनीतिक पार्टियाँ अर्थात बीजेपी और कांग्रेस के 50 प्रतिशत राजनेता शामिल है। वहीं महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले में बीजेपी 21 से अधिक एमपी और एमएलए आरोपी शामिल हैं। कांग्रेस इस लिस्ट में 16 अपराधियों के साथ दूसरे नंबर पर है। अन्य पार्टियों की बात करें, तो ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 5 सांसद/विधायक ऐसे मामलों में आरोपी हैं। महिला अपराध के मामले में बंगाल के 16 एमपी-एमएलए आरोपी हैं। इसके अतिरिक्त ओडिशा में 12, महाराष्ट्र में 12, आंध्र प्रदेश में 8 और तेलंगाना में 5 सांसद/विधायक अपराधी के कटघरे में खड़े हैं।

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