सावधान ! साबरमती जेल के 124 वर्षों के इतिहास में पहली बार आया इतना खूँखार अपराधी, नाम जान कर रूह काँप उठेगी !

* दाउद इब्राहिम से भी अधिक खतरनाक, जेल की बैरक में उतार लेता है चमड़ी

* जिसके नाम से थर्राते हैं जेलर भी, जेलर को अपनी सुरक्षा के लिये रखना पड़ता है गनर

* जिसकी बैरक में जाने से पहले पुलिस अधिकारी भी पहनते हैं बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट

* जिसे रखने के लिये तैयार नहीं होती है कोई जेल, जेल से ही करवाता है किडनैपिंग-मर्डर

* जिसके नाम दर्ज हैं डेढ़ सौ से भी अधिक केस, नाम है अतीक़ अहमद

अपराधी को लाने से पहले अतिरिक्त गृह सचिव ने जेल में लिया सुरक्षा प्रबंधों का जायजा

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 जून, 2019। अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे 1895 में स्थापित हुई साबरमती जेल ने अब तक के इतिहास में ऐसा खूँखार अपराधी नहीं देखा होगा, जो अब इस जेल में आया है। दाउद इब्राहिम जैसे गैंगस्टर और खतरनाक से खतरनाक आतंकवादी से भी अधिक खूँखार अपराधिक चरित्र वाले इस अपराधी का नाम सुनकर ही पुलिस अधिकारी भी सिहर जाते हैं। जो बैरक में किसी जंगली भेड़िये की तरह खड़े-खड़े इंसान की चमड़ी उतार देता है, जिसकी बैरक में जाने की हिम्मत बड़े-बड़े पुलिस अधिकारी भी नहीं करते हैं और जिसका खौफ इतना कि जेलर को भी अपनी सुरक्षा खतरे में नज़र आती है और जेलर को भी अपनी सुरक्षा के लिये गनर रखना पड़ता है, जिसकी बैरक में जाना हो तो पुलिस अधिकारी भी बुलेटप्रूफ जैकेट और सिर पर हेलमेट के साथ सज्ज होकर जाते हैं। जिसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश और बिहार में 150 से भी ज्यादा गंभीर प्रकार के केस चल रहे हैं, जिसे अपनी जेल में रखने से जेल प्रबंधन भी इनकार कर देता है, ऐसे खूँखार अपराधी को अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इलाहाबाद की जेल से अहमदाबाद की साबरमती जेल में शिफ्ट किया गया है। यह कितना खतरनाक और कितना खूँखार अपराधी है, इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उसे जेल में लाने से पहले राज्य के अतिरिक्त सचिव (गृह) को भी जेल में सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लेने के लिये आना पड़ा।

इस खूँखार अपराधी का नाम है अतीक़ अहमद। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और पूर्वांचल से सटे बिहार के कुछ जिलों में इस खूँखार अपराधी के नाम मात्र से लोग थर्रा जाते हैं। यह अतीक़ पूर्वांचल का बाहुबली है और कभी सांसद भी रहा है। लंबे समय से सलाखों के पीछे बंद अतीक़ अहमद पर सुप्रीम कोर्ट के जेल बदलने के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उसकी जेल बदली है और उसे अहमदाबाद की साबरमती जेल में भेजने के लिये राज्य सरकार तथा जेल अधिकारियों को पत्र लिखा था। वह अभी तक इलाहाबाद की नैनी जेल में था, अब उसे अहमदाबाद की साबरमती जेल में भेज दिया गया है। सोमवार सुबह 4 बजे पुलिस अधिकारी कड़ी निगरानी में अतीक अहमद को लेकर इलाहाबाद से वाराणसी हवाई अड्डे के लिये निकले और वाराणसी से अहमदाबाद लाया गया। उसे जेल में लाये जाने से पहले राज्य के अतिरिक्त सचिव (गृह) ए. एम. तिवारी, गृह विभाग के सचिव सुभाष सोनी, जेलों के डीजी मोहन झा, डीआईजी एस. के. गढ़वी सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जेल में सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। जेल में रखे जाने वाले हार्डकोर क्रिमिनल बैरकों का निरीक्षण करने के साथ ही जेल के सभी स्थानों का मुआयना किया और जेल के बाहर की दीवारों और वहाँ लगाये गये फिजिकल तथा इलेक्ट्रोनिक सिक्युरिटी सर्वेलंस आदि की जानकारी प्राप्त की। साबरमती जेल के वर्तमान जेल अधीक्षक डॉ. महेश नायक हैं।

अतीक़ अहमद का क्रिमिनल रिकॉर्ड

अतीक़ अहमद के विरुद्ध 1979 से 2019 तक 40 वर्ष के दौरान 109 केस लंबित हैं। इनमें 17 केस धारा 302, 12 केस गैंगस्टर एक्ट, 8 केस आर्म्स एक्ट और 4 केस गुंडा एक्ट के हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अतीक के विरुद्ध 2015 से 2019 के दौरान 8 केस दर्ज हुए जिनमें अभी भी जाँच चल रही है, इनमें भी दो केस 302 के हैं। अतीक़ उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बड़ा नाम है। बाहुबली के रूप में पहचाना जाता है। पूर्वांचल और इलाहाबाद में सरकारी ठेकेदारी, खनन और उगाही के कई मामलों में उसका नाम सामने आया है। उसके विरुद्ध लखनऊ, कौशांबी, चित्रकूट और इलाहाबाद के साथ-साथ बिहार के देवरिया आदि जिलों में हत्या, अपहरण, जबरन वसूली आदि के कई मामले दर्ज हैं। सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद जिले में दर्ज हैं। अतीक़ ने इलाहाबाद के गोमतीनगर के रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायस्वाल का अपहरण करके उसे देवरिया जेल में अपनी बैरक में कैद करके रखा था और जमकर पिटाई की थी और उसकी चमड़ी उतार दी थी। उसने मोहित की कंपनी अपने दो साथियों के नाम करवा ली थी।

देवरिया जेल को बनाया था अड्डा

देवरिया जेल में अतीक़ का ठाठ था, वहाँ के सुरक्षा कर्मी भी उसके प्रभुत्व में आकर उसकी जी-हजूरी करते थे। इस जेल की बैरक नं. 7 में अतीक़ ने 3 अप्रैल-2017 से 31 दिसंबर-2018 के बीच लगभग 20 महीने में 8 लोगों की चमड़ी उतारी थी। अतीक़ के इशारे पर उसके साथी लोगों को यातनाएँ देकर उनसे जबरन वसूली करते थे और जमीनों पर कब्जा कर लेते थे। मोहित जायस्वाल की शिकायत के आधार पर इस मामले में अतीक़ के फरार पुत्र उमर व उसके साथियों समेत 12 लोगों की पुलिस तलाश कर रही है। इस बीच क्राइम ब्रांच ने जाँच में ऐसे आठ लोगों की जानकारी प्राप्त की जिनकी देवरिया जेल की बैरक नं. 7 में चमड़ी उतार ली गई थी, डर के मारे इन लोगों ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं करवाई थी। उसे देवरिया से बरेली और वहाँ से इलाहाबाद की जेल में रखा गया था। वह जेल की बैरक को ही अड्डा बनाने के लिये कुख्यात है। इसलिये सुप्रीम कोर्ट ने अब उसे अहमदाबाद जेल भेजने का आदेश दिया है।

अतीक़ के खौफ की कहानी

जब अतीक़ को देवरिया से बरेली जेल में भेजा गया तो अपनी बैरक को अड्डा बनाने के लिये कुख्यात अतीक़ बैरक से ही अपनी गैंग को संचालित करना शुरू कर देता है, जिसके लिये वह पुलिस अधिकारियों पर धौंस जमाता है। देवरिया जेल के सुरक्षा कर्मियों ने उसके समक्ष सरेंडर कर दिया था, जिससे उसके साथी उसे बैरक में ऐसे मिलने आते थे, जैसे उसके घर पर आते-जाते हों, इनका कोई रिकॉर्ड भी दर्ज नहीं किया जाता था। मोहित जायस्वाल को अपहरण करके जेल की बैरक में ही रखा गया था और उस पर अत्याचार किये गये थे। इस रिकॉर्ड को देखते हुए जब अतीक़ को बरेली जेल में लाया गया तो उसने यहाँ भी पुलिस अधिकारियों से कई तरह की डिमांड की और उन पर धौंस जमाई कि उसे कंट्रोल करना उनके लिये आसान नहीं होगा, भयभीत जेलर यू. पी. मिश्रा को डीएम को पत्र लिखना पड़ा और अपनी सुरक्षा के लिये गनर की मांग करनी पड़ी। गनर के साथ ही इस जेल के परिसर में भी सुरक्षा के लिये पीएसी की एक कंपनी तैनात की गई थी, जो बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट पहनकर तैनात रहती थी।

अतीक़ अहमद का राजनीतिक सफ़र

अतीक़ अहमद ने स्वतंत्र रूप से राजनीति में कदम रखा था, बाद में वह समाजवादी पार्टी और उसके बाद अपना दल में शामिल हो गया था। उसने पहली बार 1989 में विधायक का चुनाव लड़ा था और चुनाव जीतकर नेता बन गया था। 2004 तक वह लगातार 6 बार चुनाव जीता, इसमें 5 बार इलाहाबाद सीट से विधायक बना और एक बार फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद भी बना। 2014 के चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था, इसके बाद वह 2018 के उपचुनाव में भी चुनाव लड़ा, परंतु उसे फिर हार का मुँह देखना पड़ा। अतीक़ पर 2005 में बसपा के विधायक राजूपाल की हत्या का आरोप लगा। राजूपाल ने अतीक़ के भाई अशरफ को हराकर चुनाव में जीत हासिल की थी।

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