महाराष्ट्र में ‘मीठे’ और हरियाणा में ‘खट्टे’ आये परिणाम : फिर भी बनेगी फडणवीस और खट्टर की सरकार

*4 दशक के बाद महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दल की सत्ता में वापसी

*हरियाणा में खट्टर का पूरा मंत्रिमंडल हारा, निर्दलीयों के सहयोग से बनेगी गवर्नमेंट

*चौटाला के हाथ में ही रह गई ‘चाबी’, नहीं खोल पाई सत्ता के द्वार

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। 21 अक्टूबर को हुए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के चुनावों का परिणाम गुरुवार को घोषित हुआ। सभी परिणाम लगभग-लगभग आ चुके हैं और दोनों राज्यों में चित्र भी स्पष्ट हो चुका है। दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार थी और दोनों प्रदेशों में वह सत्ता में वापसी भी करती दिख रही है। हालाँकि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा के लिये चुनाव परिणाम ‘मीठे’ आये हैं, जहाँ वो अपने साथी दल शिवसेना के साथ मिल कर स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार में वापसी करेगी। ऐसा 4 दशक बाद हो रहा है, जब किसी सत्तारूढ़ दल ने इस प्रदेश में सत्ता में वापसी की है। दूसरी तरफ हरियाणा में सत्तारूढ़ मनोहरलाल खट्टर के लिये चुनाव परिणाम ‘खट्टे’ सिद्ध हुए और न सिर्फ प्रदेश में खट्टर का पूरा मंत्रिमंडल चुनाव हार गया, बल्कि वे स्पष्ट बहुमत से भी दूर रह गये। हालाँकि प्रदेश में चुनाव जीतने वाले 8 से 10 निर्दलीयों में से बहुमत के लिये जरूरी 6 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भाजपा को सत्ता में वापसी करने के लिये सहयोग देने की बात कही है, जिससे खट्टे दिल के साथ ही सही, परंतु खट्टर भी प्रदेश में दोबारा सत्ता में वापसी की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच दोपहर को जब एक समय ऐसा आया कि हरियाणा में भाजपा की बढ़त 40 से घट कर 36 पर आ गई और 10 महीने पुरानी जननायक जनता पार्टी (JJP) ने 10 सीटों पर बढ़त बनाई तो कयास लगाये जाने लगे थे कि अब सत्ता की ‘चाबी’ जेजेपी के हाथ में है और इन 10 सीटों के साथ वह प्रदेश में किंगमेकर की भूमिका निभाएगी, परंतु जेजेपी के संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला की चाबी उनके हाथों में ही रह गई है जो उनके लिये सत्ता के द्वार नहीं खोल पाई। उधर लगभग 8 से 10 निर्दलीय भी चुन कर आये हैं, जिनमें से कुछ भाजपा के संपर्क में होने की बात कही जा रही है और उन्हीं के सहयोग से भाजपा प्रदेश में फिर से सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।

कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिये की थी भागदौड़

हरियाणा में भाजपा की सरकार को फँसता देख कर एक समय कांग्रेस के मुँह में पानी आ गया था और पार्टी ने हरियाणा से दिल्ली दरबार तक खूब दौड़ भी लगाई, परंतु अंततः उसके ‘हाथ’ कुछ नहीं लगा और देखते ही देखते एक बार फिर सत्ता उसके हाथ से फिसल गई। हरियाणा में हालाँकि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। प्रदेश की 90 सीटों में से सरकार बनाने के लिये 46 सीटों की आवश्यकता है, परंतु भाजपा को 40, कांग्रेस को 31, जननायक जनता पार्टी को 10, इनेलो और एचएलपी को 1-1 सीटें प्राप्त हुई हैं तथा 7 निर्दलीय चुनाव जीते हैं। खट्टर के एक कैबिनेट मंत्री को छोड़ कर सभी दिग्गज चेहरे चुनाव हार गये। इनमें खट्टर के बाद दूसरे नंबर के कद्दावर नेता राम बिलास शर्मा, कैप्टन अभिमन्यु, ओमप्रकाश धनखड़, कविता जैन, कृष्णलाल पंवार और मनीष कुमार ग्रोवर शामिल हैं। जबकि विपुल गोयल और नरबीर सिंह को इस बार टिकट नहीं दिया था। मंत्रिमंडल के एक मात्र सदस्य अनिल विज चुनाव जीतने में सफल रहे हैं।

पीएम मोदी और अमित शाह ने जिस तरह से चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बहुमत से दूर रहने के बावजूद वह निर्दलीयों के सहयोग से प्रदेश में एक बार फिर से सत्ता पर काबिज होगी। पीएम मोदी और अमित शाह के आत्म विश्वास को देखते हुए एक संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि कदाचित बीजेपी को जेजेपी का समर्थन प्राप्त हुआ है। भाजपा किसके सहयोग से सरकार बनाएगी, यह अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है, कदाचित शुक्रवार को चित्र पूरी तरह से साफ हो जाएगा।

महाराष्ट्र में फिर बनेगी भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार

उधर महाराष्ट्र में भी कुल 288 सीटों में से बहुमत के लिये आवश्यक 145 सीटों का आँकड़ा बीजेपी और शिवसेना गठबंधन ने पार कर लिया है, जिससे इस प्रदेश में दोनों दल मिल कर एक बार फिर सरकार बनाएँगे। इस गठबंधन को प्रदेश में 158 सीटों पर जीत प्राप्त हुई है, जिसमें भाजपा को104 और शिवसेना को 56 सीटें प्राप्त होने की संभावना है। क्योंकि भाजपा अभी तक 84 सीटें जीत चुकी है, जबकि 20 सीटों पर बढ़त बनाये हुए है। जबकि शिवसेना 52 सीटें जीत चुकी है और 4 सीटों पर बढ़त बनाये हुए है। इसके बाद प्रदेश में तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) उभरी है, जिसने 54 सीटें प्राप्त की हैं और कांग्रेस चौथे नंबर पर खिसक गई है, उसे 43 सीटें ही प्राप्त हुई हैं। भाजपा का दावा है कि वह देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनाएगी, परंतु दूसरी तरफ उसके सहयोगी दल शिवसेना के सुर बदल गये हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बहुमत मिलने के साथ ही भाजपा को फिफ्टी-फिफ्टी का फॉर्मूला याद दिलाया है, जिसका अर्थ है कि ढाई वर्ष भाजपा के सीएम रहेंगे और ढाई साल शिवसेना का सीएम होगा। फडणवीश ने भी अपने बयान में कहा है कि शिवसेना के साथ गठबंधन में जो शर्तें तय हुई हैं, उसी के अनुसार भाजपा प्रदेश में आगे बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि पहली बार ठाकरे परिवार में से आदित्य ठाकरे जो कि उद्धव ठाकरे के बेटे हैं, उन्होंने चुनाव लड़ा है और मुंबई की वरली विधानसभा सीट से वे चुने गये हैं। माना जा रहा है कि शिवसेना उन्हें पहले मुख्यमंत्री बनाने की अथवा उन्हें फडणवीश के साथ उप मुख्यमंत्री बनाना चाह रही है। इसके अलावा यह भी संभव है कि शिवसेना महत्वपूर्ण विभागों पर अपना आधिपत्य जमा सकती है।

50 साल में पहली बार फडणवीस ने किया 5 साल काम

उल्लेखनीय है कि पिछले 4 दशक में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब सत्तारूढ़ दल की सत्ता में वापसी हो रही है, वहीं आज पीएम मोदी ने अपने वक्तव्य में इस बात का भी उल्लेख किया है कि पिछले 5 दशक में ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश में देवेन्द्र फडणवीस ने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है, अन्यथा राज्य में कोई भी मुख्यमंत्री 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। फडणवीस भी युवा नेता हैं, अनुभव की कमी है, इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के नारे को साकार करते हुए अपने कार्यकाल में जिस सफलता के साथ काम किया है, उनकी उसी मेहनत और नेतृत्व को जनता ने फिर से आशीर्वाद दिया है। यही बात उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के लिये भी कही। पीएम मोदी ने कहा कि इससे पहले वे किसी मंत्रिमंडल में भी नहीं रहे। इसके बावजूद जिस ढंग से उन्होंने प्रदेश में काम किया है, उसी के प्रतिफल के रूप में प्रदेश में जनता ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में भाजपा को चुना है।

You may have missed