क्या ‘किंगमेकर’ बनेगा ‘किंग’, ठाकरे परिवार के ‘युवराज’ राजतिलक को आतुर हैं ?

*अब तक ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाता रहा है ठाकरे परिवार

*आदित्य ठाकरे ने खोले पहली बार शासन में भागीदारी के द्वार

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 25 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। 1966 में गठित शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे राजनेता होने के बावजूद कभी चुनाव नहीं लड़े। उन्होंने हमेशा प्रदेश में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाई। उनके सुपुत्र उद्धव ठाकरे भी पिता के नक्शे-कदम पर चले और उन्होंने पिता की दी हुई विरासत यानी शिवसेना के सुप्रीमो की गद्दी सँभाली और पिता की ही तरह प्रदेश में अभी तक ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाई। हालाँकि अब अगली पीढ़ी के आदित्य ठाकरे जो उद्धव ठाकरे के सुपुत्र हैं, उन्होंने अपनी पारिवारिक परंपराओं की बेड़ियों को तोड़ दिया और मुंबई की वरली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में वे सबसे युवा कंडीडेट और ठाकरे परिवार के ‘युवराज’ के रूप में खूब चर्चित हुए। उन्होंने चुनाव जीत कर ठाकरे परिवार के लिये राजनीति में विजयी शुरुआत की है। उनके जीतने के साथ ही अब वरली सहित मुंबई में जगह-जगह एक पोस्टर लगा दिखाई दे रहा है, जिसने मुंबईकरों के साथ-साथ देश भर के नागरिकों में भी हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे गुरुवार को आये हैं, जिसमें भाजपा-शिवसेना गठबंधन को फिर से सत्ता में आने का मेंडेट मिला है। यह मेंडेट मिलने के साथ ही शिवसेना सुप्रीमो के स्वर बदल गये हैं और वे सहयोगी दल भाजपा को 50-50 का फॉर्मूला याद दिलाने लगे हैं। अब इस पोस्टर में जो कुछ लिखा है, उससे उद्धव ठाकरे के मंसूबे साफ होने लगे हैं। वह मंसूबा है महाराष्ट्र में ‘किंगमेकर’ का ‘किंग’ बनने के लिये बेसब्र होना।

क्या मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा-शिवसेना में कलह होगी ?

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले पिछले महीने 28 सितंबर को एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बालासाहेब ठाकरे को दिये एक वचन का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने पिता को वचन दिया है कि एक दिन महाराष्ट्र में एक शिवसैनिक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जरूर बैठेगा। इसके बाद शिवसेना और भाजपा के बीच चुनावी गठबंधन हुआ और दोनों ने ये विधानसभा चुनाव मिल कर लड़ा। इसमें शिवसेना को 56 और भाजपा को 105 सीटें प्राप्त हुई हैं। 2014 में इन दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था और जीतने के बाद गठबंधन करके महाराष्ट्र में सरकार का गठन किया था। अभी तक शिवसेना ने महाराष्ट्र में बाहर से समर्थन देकर अथवा सरकार में शामिल होकर ही सरकारें बनाई हैं और शिवसेना की ओर से पहली बार 1995 से 1999 के दौरान मनोहर जोशी महाराष्ट्र के सीएम भी बन चुके हैं। हालाँकि जहाँ तक ठाकरे परिवार की बात है तो किसी ने चुनाव ही नहीं लड़ा और सरकार में उनकी कोई पारिवारिक भागीदारी अभी तक नहीं रही। अब जब आदित्य ठाकरे ने पारिवारिक परंपराओं को तोड़ कर चुनाव लड़ा है और जीत के साथ शुरुआत की है तो ‘किंगमेकर’ उद्धव ठाकरे उन्हें सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रमोट करने लगे हैं। उन्हें अपने पिता को दिया गया वचन याद आने लगा है और गुरुवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही वे सहयोगी भाजपा को आँखें दिखाने लगे हैं। आँकड़ों के लिहाज से सर्वाधिक 105 सीटें जीतने वाली प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को गठबंधन धर्म निभाने के लिये कहने लगे हैं। उसे 50-50 फॉर्मूले की याद दिलाने लगे हैं। ये 50-50 फॉर्मूला है सरकार में दोनों की बराबर-बराबर भागीदारी और ढाई-ढाई साल के लिये दोनों दलों को मुख्यमंत्री बनने का अवसर देना। ये और बात है कि भाजपा ने भी उन्हें आश्वस्त किया है कि भाजपा गठबंधन धर्म को निभाएगी, परंतु शिवसेना ने मुंबई में जिस तरह के पोस्टर लगाये हैं और उसमें ठाकरे परिवार के ‘युवराज’ आदित्य ठाकरे को जीत की बधाई देते हुए जिस तरह से उन्हें ‘भावी मुख्यमंत्री’ कह कर संबोधित किया है। उससे मुंबईकरों में ही नहीं, अपितु देश भर में ऐसी अटकलें शुरू हो गई हैं कि क्या ‘किंगमेकर’ शिवसेना और उसके सुप्रीमो उद्धव ठाकरे आदित्य ठाकरे की जीत को लेकर इतने आंदोलित हो गये हैं कि अब उनके सब्र का बाँध टूटने लगा है। उनके बयानों में भाजपा के लिये जो तीखापन नज़र आ रहा है, उसे देख कर लगता है कि वे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री या उप-मुख्यमंत्री का पद दिलाने पर ही आमादा है। दूसरी ओर भाजपा ने जिस विश्वास के साथ कहा है कि देवेंद्र फडणवीस दोबारा महाराष्ट्र के सीएम बनेंगे, उससे जाहिर होता है कि भाजपा अभी तो शिवसेना को मुख्यमंत्री पद देने के मूड में बिल्कुल नहीं है। ऐसे में संभावना यह बनती है कि आदित्य ठाकरे उप-मुख्यमंत्री बन जाएँ और ढाई साल का सत्ता और सरकार चलाने का अनुभव लेने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए। यही उचित भी लगता है, परंतु शिवसेना प्रमुख के बयानों में जिस तरह की उग्रता देखने को मिल रही है, उसे देख कर तो लगता है कि दोनों पार्टियों के बीच आने वाले दिनों में कलह देखने को मिल सकती है ?

You may have missed