महाराष्ट्र में नहीं बनेगी फडणवीस सरकार : क्या शिवसेना ने किया जनादेश का अनादर ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को स्पष्ट जनादेश मिलने के बावजूद चुनाव परिणामों की घोषणा के 17 दिन बाद भी सरकार नहीं बन पाई है। इसके लिये कौन जिम्मेदार है, क्या शिवसेना ने जनादेश का अनादर किया है ? महाराष्ट्र भाजपाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के अनुसार पूर्व सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने रविवार को राज्यपाल से मिल कर उन्हें बता दिया है कि राज्य में भाजपा सरकार नहीं बनाएगी। उधर कांग्रेस ने भी कह दिया है कि उसे विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है, इसलिये वह विपक्ष में ही बैठेगी। इससे ऐसा चित्र बन रहा है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की महत्वाकांक्षा ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।

महत्वाकांक्षा ने शिवसेना से कराया जनादेश का अनादर

महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 सीटों में से भाजपा को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी। राज्य में सरकार बनाने के लिये जरूरी 145 सीटों की संख्या तक कोई पार्टी नहीं पहुँच पाई थी, परंतु भाजपा और शिवसेना ने मिल कर चुनाव लड़ा था, इसलिये उन दोनों की कुल सीटें मिला कर 161 सीटों के साथ उन्हें सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश मिला था। हालाँकि शिव सेना ने मुख्यमंत्री उसका होगा कहकर रार डाल दी और इससे दोनों सहयोगी दलों में विवाद उत्पन्न हो गया। इसके परिणाम स्वरूप 9 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया। इससे एक दिन पहले ही फडणवीस ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा दे दिया। जबकि शनिवार को शिवसेना ने भाजपा से रिश्ता खत्म कर लिया।

फडणवीस ने सरकार बनाने से किया इनकार

इसके बाद रविवार को फडणवीस मुंबई स्थित राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने पहुँचे, जहाँ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के अनुसार फडणवीस ने राज्यपाल से कह दिया है कि भाजपा प्रदेश में सरकार नहीं बना रही है। राज्यपाल ने शनिवार को भाजपा से पूछा था कि वह प्रदेश में सरकार बनाने को लेकर जवाब दे। भाजपा ने अल्पमत की सरकार बनाने से इनकार करके शिवसेना को झटका भी दिया और अब गेंद भी उसके पाले में फेंक दी है। अगर बीजेपी अल्पमत की सरकार बनाती तो शिवसेना को एनसीपी के साथ मिल कर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का बहाना मिल जाता। अब गेंद शिवसेना के पाले में फेंक दी है। कांग्रेस विधायकों ने शिवसेना को समर्थन देने की इच्छा जताई है, वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि हमारी कांग्रेस से कोई दुश्मनी भी नहीं है। हालाँकि शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी की विचारधाराएँ विरोधी रही हैं। इसलिये यदि शिवसेना उनके सहयोग से सरकार बनाती भी है तो यह अवसरवादी युति होगी। शिवसेना ने पूरी मुंबई में जगह-जगह उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने की कार्यकर्ताओं की माँग वाले पोस्टर लगाकर भाजपा पर दबाव बनाने का प्रयास किया था, परंतु भाजपा ने उसके किसी भी दबाव में ना आकर शिवसेना का पासा ही पलट दिया है। अब शिवसेना के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश में सरकार बनेगी भी या राष्ट्रपति शासन लगेगा।

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