महाराष्ट्र में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर काम शुरू : उद्धव सरकार में शिवसेना का एजेंडा ऊपर

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 2 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। महाराष्ट्र (MAHARASHTRA) में सत्ता के महासंग्राम का अंत होने के बाद गत गुरुवार को शिवसेना (SHIV SENA), एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (CONGRESS) के गठबंधन ‘महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MAHARASHTRA VIKAS AGHADI-MVA)’ की सरकार बन गई। अघाड़ी के नेता चुने गये शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (UDDHAV THACKERAY) ने प्रदेश के 19वें और ठाकरे परिवार के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ तीनों दलों के दो-दो सहित कुल 6 मंत्रियों ने भी शपथ ली। शिवाजी पार्क में शपथ ग्रहण के तुरंत बाद दक्षिण मुंबई में स्थित सहयाद्री गेस्ट हाउस में उद्धव सरकार के मंत्रिमंडल (UDDHAV GOVERNMENT CABINET) की पहली बैठक आयोजित हुई, जिसमें 4 प्रमुख निर्णय लिये गये। यह सभी निर्णय तीनों पार्टियों के चुनावी एजेंडे के आधार पर बनाये गये गठबंधन ‘एमवीए’ के ‘कॉमन मिनिमम एजेंडे (COMMON MINIMUM AGENDA)’ के अंतर्गत लिये गये, परंतु यदि गहराई में देखा जाए तो उद्धव ने शिवसेना का ही हाथ ऊँचा रखा है और पहला निर्णय मराठा साम्राज्य की राजधानी रहे रायगढ़ में महाराजा शिवाजी राव के किले (FORT) के पुनरुद्धार के लिये 20 करोड़ रुपये की धनराशि आबंटित करने की मंजूरी दी। दूसरा फैसला साथी दलों को साथ लेकर चलने के लिये लिया गया, तीसरा फैसला किसानों को लेकर और चौथा फैसला आरे मेट्रो प्रोजेक्ट (AAREY METRO CAR SHED PROJECT) को लेकर लिया गया। इस प्रकार उद्धव ने ओहदा सँभालने के साथ ही शिवाजी महाराज के किले के पुनरुद्धार के निर्णय से हिंदुत्ववादी लोगों, किसानों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण विदों के साथ-साथ अपने साथी दलों को भी खुश रखने वाले संतुलित निर्णय लिये हैं।

उद्धव सरकार के शुरुआती 4 प्रमुख फैसले

1- शिवाजी किले का पुनरुद्धार : ‘जय शिवाजी’ का नारा बुलंद करने वाली शिवसेना ने भले ही अपनी हिंदुत्ववादी विचारधारा से विपरीत विचारधारा वाले एनसीपी और कांग्रेस से समर्थन लेकर सरकार बनाई हो, परंतु उनके फैसलों ने यह सिद्ध किया है कि शिवसेना हिंदुत्ववादी विचारधारा पर कायम रहेगी और साथ ही अपने साथी दलों की सेक्युलर विचारधारा का भी दिखावे के लिये ही सही, परंतु समर्थन करती रहेगी। आखिरकार उद्धव ठाकरे को अपने पिता बालासाहेब ठाकरे से किये गये वायदे को निभाने के लिये राजनीतिक उठापटक करनी पड़ी, परंतु आखिरकार उन्होंने अपने पिता से किया हुआ वायदा पूरा किया है और पहली बार महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। उन्होंने अपने पिता से एक दिन महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार का मुख्यमंत्री बनाने का वायदा किया था। मराठा साम्राज्य की राजधानी रहे रायगढ़ में महाराजा शिवाजी राव के किले के पुनरुद्धार के लिये 20 करोड़ रुपये की धनराशि आबंटित करने की मंजूरी देकर उद्धव ठाकरे ने सिद्ध किया है कि वे शिवसेना के एजेंडे को ऊपर रखेंगे।

2- सरकार और गठबंधन की समितियाँ बनेंगी : उनके दूसरे फैसले से यह निष्कर्ष निकलता है कि प्रदेश में 5 साल तक सत्ता में रहकर अपने एजेंडे को अमलीजामा पहनाने के लिये समर्थक दलों को साथ लेकर चलना भी जरूरी है। इसलिये उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी के संयुक्त शपथपत्र के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों और शिवसेना के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र विकास अघाड़ी का कॉमन मिनिमम एजेंडा तैयार किया है, जिसका भी अमल किया जाएगा। इस एजेंडे में किसान, युवा, बेरोजगार, महिला, स्वास्थ्य आदि से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इस एजेंडे को लागू करने के लिये उन्होंने एनसीपी विधायक दल के नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री जयंत पाटिल के नेतृत्व में सभी 6 मंत्रियों की समन्वय समिति गठित की है। एक समिति अघाड़ी के नेताओं की भी बनाई जाएगी। दोनों समितियाँ एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करके सरकार और राजनीतिक दलों के बीच समन्वय बनाये रखने का काम करेंगी। साथ ही अघाड़ी के कॉमन मिनिमम एजेंडे में शामिल मुद्दों को लागू करने और उनके लक्ष्यों को हासिल करने के लिये सरकार का मार्गदर्शन भी करेंगी।

3- किसानों के लिये उद्धव लेंगे बड़ा और ठोस फैसला : इसके अलावा तीसरा सबसे बड़ा निर्णय किसानों को लेकर किया गया है। उद्धव ठाकरे ने सचिवालय के किसानों से जुड़े विभागों के सचिवों को राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं तथा किसानों को दिये जा रहे लाभों के बारे में पूरी जानकारी माँगी है, जिसके आधार पर किसानों के लाभ के लिये बड़े और ठोस निर्णय लेने की बात कही है। एक-दो दिन में ही इस बाबत उद्धव किसानों के हित में कोई बड़ा निर्णय घोषित कर सकते हैं।

4- आरे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट पर लगाई रोक : इसके बाद हुई मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक में ठाकरे सरकार ने मुंबई के बहुचर्चित आरे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी। इस प्रोजेक्ट के कारण आरे में मौजूद 4.8 लाख पेड़ों की कटाई की जानी थी, जिसको लेकर पर्यावरणविद और सामाजिक संगठन विरोध कर रहे हैं। मुंबई में पेड़ों की संख्या कुल लगभग 29.75 लाख है। इनमें से 4.8 लाख पेड़ अकेले आरे कॉलोनी में हैं। गत 29 अगस्त को बीएमसी के वृक्ष प्राधिकरण ने मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट के लिये आरे कॉलोनी के पेड़ काटने की अनुमति दी थी। प्राधिकरण ने 2,185 पेड़ काटने के साथ ही 461 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने का भी आदेश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध 16 सितंबर को पर्यावरण प्रेमियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका के आधार पर हाईकोर्ट ने 30 सितंबर तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी। बाद में 4 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने आरे प्रोजेक्ट को लेकर दाखिल की गई सभी याचिकाओं को रद्द कर दिया था। इसके बाद इसी दिन शाम से आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई शुरू हो गई। हर मिनट एक पेड़ काटा जा रहा था। पर्यावरण विद इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे और कटाई रोकने की माँग की तो सुप्रीम ने 16 नवंबर तक कटाई पर रोक लगा दी और 16 नवंबर को यह अवधि फिर बढ़ा दी। अब दिसंबर में इस मामले की अगली सुनवाई होने वाली है। इस बीच पर्यावरण प्रेमियों ने शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के महागठबंधन की सरकार से इस मुद्दे को अपने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में शामिल करने की माँग की थी। उद्धव सरकार की ओर से आरे मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के फैसले से पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

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