दिल्ली में वायु प्रदूषण ने तोड़े रिकॉर्ड : अस्पतालों में बढ़ी साँस-रोगियों की संख्या

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी दिल्ली में हालात सुधरने के बजाय और गंभीर होते जा रहे हैं। एक तरफ हालात में निकट भविष्य में किसी सुधार के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, दूसरी तरफ अस्पतालों में साँस-रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। विशेष कर बच्चों और बुजुर्गों को साँस लेने में तकलीफ हो रही है। इसके अलावा कमजोर फेफड़े वाले युवाओं को भी उपचार लेने की जरूरत पड़ रही है। दिल्ली में नवंबर के पहले दिन जो एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 500 के पार था वह रविवार सुबह 999 तक पहुँच चुका है, इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि राजधानी दिल्ली में हालात कितने भयावह हो चुके हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली के सिर पर छाया वायु प्रदूषण का यह जाल आसपास के अन्य इलाकों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग़ाजियाबाद के बाद इस प्रदूषण की छाया यूपी की राजधानी लखनऊ तक पहुँच गई है।

दिल वालों की दिल्ली में साँस लेना हुआ दूभर

दिल्ली-एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शनिवार शाम और रविवार सुबह हुई बारिश का भी प्रदूषण पर कोई असर देखने को नहीं मिला, उल्टा यह लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के कई क्षेत्रों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर को भी पार कर गया है। जानकारी के अनुसार पंजाबी बाग और नरेला क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है। रविवार सुबह 6 बजे दोनों इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 999 दर्ज किया गया। इसके अलावा बवाना में सुबह 7 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 999, रोहिणी में 967, पूसा में 947, आईटीआई पूसा में 943 और मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के पास पूसा में 930 दर्ज किया गया है। बताया जाता है कि सरकार की ओर से निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद इन इलाकों में कंस्ट्रक्शन का काम जारी रहा, इस कारण अधिकारियों ने छापे मारी की और कंस्ट्रक्शन करने के आरोप में लगभग 38 लोगों को गिरफ्तार किया। इधर बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली के बाद अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी स्कूलों में 5 नवंबर तक छुट्टी घोषित कर दी गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रविवार से मंगलवार तक 20-25 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति से हवाएँ चलने के साथ स्थिति में सुधार होने की संभावना दर्शाई है। इसके साथ ही 7-8 नवंबर को दिल्ली सहित 3 राज्यों में बारिश होने की भी संभावना व्यक्त की है। मेट्रो कार्यालय के अनुसार चक्रवात ‘महा’ और ताजा पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हलकी बारिश होने की संभावना है। इस बारिश से प्रदूषण के स्तर में कमी आने की आशा व्यक्त की जा रही है, परंतु जिस तरह से शनिवार शाम और रविवार सुबह की बारिश का प्रदूषण के स्तर पर कोई प्रभाव नहीं दिखा, इसलिये मौसम विभाग की ओर से कही जा रही बात पर लोग भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। इस साल की बात करें तो पहली बार गुरुवार रात को दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक ने बेहद गंभीर स्तर को भी पार किया है और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की है।

दिल्ली एयरपोर्ट से 32 फ्लाइट डायवर्ट

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं। दिल्ली के आसमान में धुंध की एक मोटी परत जम गई है, जिससे अंधेरा छाया हुआ है और विजिबिलिटी बहुत कम हो जाने से दिल्ली एयरपोर्ट से अभी तक 32 फ्लाइट्स को डायवर्ट कर दिया गया है। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 से लगभग 32 फ्लाइटों को डायवर्ट किया गया है, इनमें जयपुर, अमृतसर और लखनऊ की फ्लाइट्स शामिल हैं।

पहले टी-20 मैच पर भी छाया संकट

बांग्लादेश की क्रिकेट टीम भारत के साथ टी-20 सीरीज और डे-नाइट टेस्ट मैच खेलने के लिये भारत आई हुई है। रविवार देर शाम 7 बजे भारत और मेहमान टीम बांग्लादेश के साथ 3 टी-20 मैचों की सीरीज़ का पहला मैच दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाने वाला है, परंतु दिल्ली में छाई प्रदूषण की धुंध से गहरा अँधेरा छाया हुआ है और प्रदूषण का स्तर 1000 के स्तर को पार कर गया है, ऐसे में इस मैच पर भी संकट के बादल छा गये हैं। प्रदूषण की घातकता को देख कर एहतियाती कदम उठाये जा रहे हैं और लोगों को मास्क पहन कर घर से बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है, ऐसे में यह मैच होगा या नहीं, इसका फैसला आईसीसी के रेफरी को लेना है। यदि मैच हुआ तो बड़ी संख्या में दर्शक मास्क पहने दिखाई दे सकते हैं।

अस्पतालों के इमरजेंसी विभाग में बढ़े मरीज

एम्स के डॉक्टरों के अनुसार दीवाली से पहले तक उनके यहाँ इमरजेंसी वॉर्ड में मात्र चार से पाँच मरीज साँस से जुड़ी तकलीफ को लेकर शिफ्ट किये जाते थे, परंतु दीपावली के बाद ऐसे मरीजों की संख्या में 5 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है और इनकी संख्या बढ़कर 25 से अधिक हो गई है। खास कर रात में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान अस्थमा के कारण मरीजों की परेशानी बढ़ती है। डॉक्टरों के अनुसार जो मरीज आ रहे हैं, उनमें आधे से अधिक बच्चे है और बाकी मरीजों में बुजुर्गों की संख्या भी अधिक है।

जानिए कैसे मापा जाता है वायु प्रदूषण ?

दिल्ली से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी हालात गंभीर हैं। यहाँ पर्टिकुलेट मीटर (PM) 10 का स्तर सुबह 9 बजे 637 और 2.5 का स्तर 667 रहा। इसी प्रकार ग़ाजियाबाद में भी आपातकाल जैसी स्थिति है। यहाँ पीएम 10 का स्तर 868 है और पीएम 2.5 का स्तर 808 है। हरियाणा के गुरुग्राम की बात करें यहाँ पीएम 10 का स्तर 655 और पीएम 2.5 का स्तर 737 है। उल्लेखनीय है कि एयर क्वॉलिटी इंडेक्स जब 0.50 होता है तो इसे अच्छी श्रेणी का माना जाता है। 51-100 को संतोषजनक, 101-200 को मध्यम, 201-300 को खराब, 301-400 को अत्यंत खराब, 401-500 को गंभीर, 500 से अधिक को बेहद गंभीर और आपात श्रेणी का माना जाता है। आपात श्रेणी में सूचकांक के पहुँचने से इसका स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

लखनऊ तक पहुँचा प्रदूषण का प्रभाव

प्रदूषण का घातक प्रभाव दिल्ली-एनसीआर से बाहर पाँव पसार रहा है। दिल्ली से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा तथा ग़ाजियाबाद के बाद अब इसका प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी दिखने लगा है। यहाँ भी वायु प्रदूषण के चलते लोगों को साँस लेने में परेशानी हो रही है। शहर के गोमतीनगर इलाके में शनिवार को एक 7 साल की बच्ची दिशा सीढ़ियाँ चढ़ने के दौरान साँस फूलने से हाँफने लगी और बेहोश होकर गिर पड़ी। उसके पिता उसे तुरंत अस्पताल ले गये, जहाँ उसे डॉक्टरों ने तुरंत ऑक्सीजन देकर बचाया। इसी प्रकार जानकीपुरम् में इंजीनियरिंग स्टूडेंट शरद अहिरवार को गत आधी रात को साँस लेने में परेशानी होने लगी, इसके बाद उसे भी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती कराया गया। इसी प्रकार पेशे से मजदूर रेशू को शनिवार को तेलीबाग इलाके में सड़क के किनारे बेहोशी की हालत में पाया गया, जिसके बाद उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसके फेफड़े कमजोर हैं, जिससे साँस लेने में दिक्कत आई और वह बेहोश हो गई। उसे भी ऑक्सीजन दिया गया था। इन तीन मामलों से साफ है कि लखनऊ में भी हवा का प्रदूषण स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है। यहाँ भी वायु गुणवत्ता सूचकांक 422 यानी बेहद खराब श्रेणी का दर्ज किया गया है।

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