अहो आश्चर्यम् ! पर्यावरण का सबसे बड़ा शत्रु प्लास्टिक ही बचाएगा पर्यावरण और बोनस में देगा सस्ता पेट्रोल भी ! जानिए कैसे ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 जून 2019 (YuvaPress.com)। हम सभी को ज्ञात है कि प्लास्टिक सालों साल तक नहीं गलने वाला पदार्थ है और यह पर्यावरण के लिये बहुत हानिकारक है। कई राज्यों में सरकारों ने प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाकर पर्यावरण की रक्षा करने का प्रयास किया, परंतु प्लास्टिक हमारी आधुनिक जीवन-शैली में इतनी घुल-मिल गई है कि इससे निजात पाना आसान नहीं है। हालाँकि अब प्लास्टिक से पर्यावरण की रक्षा का एक मजबूत नुस्खा ढूँढ लिया गया है। इस नुस्खे से प्लास्टिक को रिसायकल करके उससे पेट्रोल बनाया जाएगा। इससे एक पंथ दो काज़ हो जाएँगे। प्लास्टिक का सदुपयोग भी होगा और सस्ता पेट्रोल भी उपलब्ध होगा।

इस ME ने खोजा प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने का नुस्खा

आंध्र प्रदेश से हाल ही में अलग होकर नये राज्य के रूप में अस्तित्व में आए तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के 45 वर्षीय प्रो. सतीश कुमार ने यह अत्यंत उपयोगी नुस्खा खोज निकाला है। सतीश कुमार के अनुसार प्लास्टिक को तीन अलग-अलग प्रक्रियाओं तेल में बदला जा सकता है। इस प्रोसेस को प्लास्टिक पायरोलिसिस कहते हैं। कुमार ने इस प्रोसेस से प्लास्टिक को पिघलाकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाला तेल बनाया है। मैकेनिकल इंजीनियर प्रो. सतीश कुमार ने सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम मंत्रालय के साथ पंजीकृत हाइड्रोक्सी प्रा. लि. नामक कंपनी शुरू की है। इस कंपनी के अंतर्गत सतीश कुमार उपरोक्त रिसायकल प्रक्रिया से प्लास्टिक को डीजल, विमानन ईंधन और पेट्रोल में बदलते हैं। सतीश कुमार के अनुसार लगभग 500 किलो प्लास्टिक जिसे रिसायकल न किया गया हो, उसे इस प्रक्रिया से 400 लीटर ईंधन तेल में तब्दील किया जा सकता है। इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि यह एक सरल प्रक्रिया तो है ही, साथ ही इसमें पानी की भी आवश्यकता नहीं होती है, जिससे पानी व्यर्थ नहीं बहता है और वेस्ट वॉटर भी रिलीज नहीं होता है। इस प्रकार पानी की बचत होती है। सतीश कुमार 2016 से लेकर अभी तक लगभग 50 टन प्लास्टिक को पेट्रोल में बदल चुके हैं।

प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने के इच्छुक उद्यमियों का स्वागत

प्रो. सतीश कुमार के अनुसार इस प्रक्रिया से हवा में भी प्रदूषण नहीं फैलता है। उनकी कंपनी प्रति दिन 200 किलोग्राम प्लास्टिक से 200 लीटर पेट्रोल बनाती है और यह पेट्रोल उनकी कंपनी स्थानीय इंडस्ट्रीज़ में 40 से 50 रुपये प्रति लीटर की कीमत में बेचती है। सतीश कुमार ने कहा कि यह कंपनी शुरू करने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा करना है। इसके लिये वह किसी भी प्रकार के कॉमर्शियल बेनीफिट की उम्मीद नहीं करते हैं। वह तो प्रयास कर रहे हैं कि पर्यावरणीय भविष्य स्वच्छ रहे। उनका कहना है कि वह अपनी इस तकनीक को किसी भी उद्यमी के साथ शेयर करने के लिये तैयार हैं, यदि कोई उनकी तरह प्लांट लगाकर प्लास्टिक को रिसायकल करके पेट्रोल में तब्दील करने की रुचि रखता है।

प्लास्टिक कूड़ा पर्यावरण के लिये बन रहा चुनौती

उल्लेखनीय है कि पर्यावरण का संकट आजकल हम सभी के लिये एक चुनौती बनकर उभर रहा है। पर्यावरण रक्षा के लिये बने सभी नियम और कानून मात्र कागजी सिद्ध हो रहे हैं। पारिस्थितिकी असंतुलन को लोग समझते हुए भी सतर्क नहीं हो रहे हैं। विश्व में जल संकट गहराता जा रहा है। जंगल आग की लपटों में स्वाहा हो रहे हैं। प्राकृतिक असंतुलन के कारण ही पर्वत भी तबाह हो रहे हैं। पर्यावरण संकट की गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि पर्वतों की रानी कहलाने वाले शिमला में लोग पानी की बूँद-बूँद के लिये तरस रहे हैं। आर्थिक उदारीकरण और उपभोक्तावाद की संस्कृति गाँव तथा शहरों को निगल रही है। प्लास्टिक कचरे का बढ़ता अंबार मानवीय सभ्यता के लिये संकट बन गया है। इसके लिये हम इंसान ही जिम्मेदार हैं, जो मात्र वर्तमान में जीने की बात करते हैं और भविष्य कितना संकट वाला है इसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं करते हैं। दिल्ली और अहमदाबाद में पिछले दिनों एक घटना सामने आई, जहाँ प्लास्टिक व अन्य कचरे के ढेर ने पर्वत की शक्ल ले ली है। दिल्ली में तो इस कचरे के गिरने से पूर्वी दिल्ली के तीन लोगों की मृत्यु भी हो गई। महानगरों में इकट्ठा होने वाला प्लास्टिक कचरा पर्यावरण का गला घोंट रहा है। इसके बावजूद यह मुद्दा संसद या राजनीति के लिये चर्चा का विषय नहीं बन रहा है। बढ़ता प्रदूषण जनांदोलन का स्वरूप लेना चाहिये। प्रदूषण के विरुद्ध एक जंग छिड़नी चाहिये, जबकि सच्चाई यह है कि प्लास्टिक कचरा और बढ़ता प्रदूषण केवल मंचीय भाषण तक सीमित होकर रह गया है। अदालतों और सरकारों ने प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध के आदेश जारी किये, इसके बावजूद स्थिति क्या है, यह हम सभी के सामने है।

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