और अब सब्जी बेचने वाला बना CM : खट्टर के पिता और दादा करते थे मजदूरी

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। पीएम नरेन्द्र मोदी के बारे में सब जानते हैं कि वे एक अत्यंत गरीब परिवार से आते हैं और बचपन में चाय बेचते थे तथा उनकी माँ लोगों के घरों में काम करती थी। पीएम बनने से पहले मोदी गुजरात के सीएम बने थे और उन्होंने लगातार तीन टर्म तक 2002, 2007 और 2012 में भाजपा को प्रदेश में सत्ता दिलाई थी। हरियाणा के दोबारा मुख्यमंत्री बने मनोहरलाल खट्टर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वे भी अत्यंत गरीब परिवार से आते हैं। यहाँ तक कि उनके पिता और दादा मजदूरी करते थे तथा खुद मनोहरलाल खट्टर साइकिल पर सब्जी बेचते थे। आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें…

कौन हैं मनोहरलाल खट्टर ?

5 मई 1954 को हरियाणा के रोहतक जिले के निदाना गाँव में जन्मे मनोहरलाल खट्टर के पिता का नाम हरबंस लाल था, जो 1947 में भारत-पाकिस्तान बँटवारे समय परिवार को लेकर रोहतक में आ बसे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल थी और इस कारण खट्टर के पिता और दादा को मजदूरी भी करनी पड़ी थी। परिवार का गुजारा करने के लिये खुद मनोहरलाल खट्टर भी साइकिल पर सब्जियाँ बेचते थे। बाद में जैसे-तैसे कुछ पैसे जुटा कर उन्होंने जमीन खरीदी थी और खेतीबाड़ी का काम शुरू किया था। पंजाब मूल के 65 वर्षीय मनोहरलाल खट्टर की शुरुआती पढ़ाई पंडित नेकीराम शर्मा सरकारी कॉलेज से हुई है। उनके पिता उन्हें आगे नहीं पढ़ाना चाहते थे, परंतु खट्टर को आगे की पढ़ाई करके डॉक्टर बनने की इच्छा थी। इसलिये पढ़ाई के जुनून में वे हाईस्कूल की शिक्षा पूरी करके घर वालों से पैसे लेकर दिल्ली चले गये थे। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल की तैयारी शुरू की। हालाँकि तीन बार प्री-मेडिकल का टेस्ट देने के बावजूद वे क्लियर नहीं कर पाये थे।

24 साल की उम्र में RSS से जुड़े

24 साल की उम्र में मनोहरलाल खट्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गये थे। 1979 में वे इलाहाबाद में आयोजित हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) के समागम में पहुँचे थे और यहाँ कई संतों व संघ प्रचारकों से मिले थे। 1980 में उन्होंने आजीवन आरएसएस से जुड़ने तथा शादी नहीं करने का फैसला किया था। खट्टर के इस फैसले का उनके परिवार वालों ने काफी विरोध भी किया था, परंतु वे फैसले पर अटल रहे। आरएसएस प्रचारक के रूप में उन्होंने 14 साल तक गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर समेत एक दर्जन राज्यों में काम किया। इसके बाद 1994 में संघ की ओर से उन्हें सक्रिय राजनीति के लिये भारतीय जनता पार्टी (BJP) में भेजा गया था। 1995 में उन्हें भाजपा ने हरियाणा का संगठन मंत्री बनाया तो 1996 में ही उन्होंने बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन करके अपनी पार्टी को सत्ता में हिस्सेदारी दिला दी। खट्टर ने पहला विधानसभा चुनाव 2014 में करनाल से लड़ा और जीतकर हरियाणा के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। 5 वर्ष सरकार चलाने के बाद एक बार उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया और दीवाली के दिन ही उन्होंने चंडीगढ़ में दोबारा हरियाणा के मुख्यमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ ली है। वे कांग्रेस के भूपेन्द्रसिंह हुड्डा के बाद दूसरे ऐसे नेता हैं, जो लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने हैं।

दुष्यंत चौटाला बने हरियाणा के डिप्टी सीएम

उनके साथ जननायक जनता पार्टी (JJP) के संस्थापक अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालाँकि आज किसी मंत्री ने शपथ नहीं ली। शपथ समारोह में दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला भी उपस्थित रहे, जो रविवार सुबह ही तिहाड़ जेल से फरलो पर रिहा हुए हैं। अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल भी समारोह में पहुँचे थे।उल्लेखनीय है कि खट्टर के साथ 13 मंत्रियों के भी शपथ लेने की उम्मीद जताई जा रही थी। माना जा रहा था कि 13 मंत्रियों में 2 जेजेपी के भी हो सकते हैं। जबकि खट्टर के पुराने मंत्रिमंडल के अधिकांश सीनियर नेता चुनाव हार चुके हैं, इसलिये उनके बाद दूसरी पंक्ति के सीनियर नेताओं को खट्टर के नये मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की संभावना जताई जा रही है, इस प्रकार खट्टर के मंत्रिमंडल में एक-दो पुराने चेहरों को छोड़कर सभी नये चेहरे देखने को मिल सकते हैं।

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