50 दिन प्रचंड प्रहार : 27 राज्यों में 144 रैलियाँ कर 216 घण्टे दहाड़े महाप्रचारक PM नरेन्द्र मोदी : बंगाल पर बमबारी, तो यूपी में महामिलावट पर पड़े भारी

मेरठ से महाप्रारंभ पर खरगोन में लगी खूँटी

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 17 मई, 2019। 28 मार्च, 2019 से 17 मई, 2019 यानी कुल 50 दिन यानी कुल 7 सप्ताह 1 दिन यानी 1 महिना 19 दिन। जी हाँ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2019 में गत 28 मार्च, 2019 को मेरठ में दोपहर लगभग 12 बजे पहली चुनाव रैली के साथ चुनाव प्रचार अभियान का महाप्रारंभ किया था, जो आज पूरे 50 दिन बाद 17 मई, 2019 को खरगोन पर ख़त्म हो गया। मेरठ से 28 मार्च, 2019 को दोपहर 12 बजे से दहाड़ शुरू करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग-NDA) के महाप्रचारक तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 50 दिन बाद 17 मई, 2019 को खरगोन में अंतिम चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दोपहर 12.57 मिनट पर अपनी वाणी को विराम दे दिया।

मेरठ से भरी हुंकार

लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा 6 मार्च को हुई और इसके साथ ही सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार अभियान में जुट गए, परंतु सबसे आगे रही भाजपा और उसके स्टार प्रचारक-महाप्रचारक नरेन्द्र मोदी। मोदी ने चुनावों की घोषणा के 22 दिन बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ से विजयी शंखनाद किया। लोकसभा चुनाव 2014 में भी मोदी ने मेरठ से ही चुनाव प्रचार अभियान का शुभारंभ किया था और इसीलिए 2019 में भी उन्होंने मेरठ से ही महासंग्राम के लिए महाप्रचार का महाप्रारंभ किया, जो 50 दिनों बाद आज खरगोन पर ख़त्म हो गया। ऐसा नहीं है कि चुनाव प्रचार अभियान में भाजपा के अलावा अन्य दलों ने मेहनत नहीं की, परंतु कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कोई भी अभाजपाई या अकांग्रेसी नेता मोदी जितनी रैलियाँ नहीं कर सका। सबसे अधिक 27 राज्यों में और सबसे अधिक 144 रैलियाँ करके प्रचार अभियान का मैदान मोदी मार गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आम तौर पर एक रैली को लगभग 1 से 2 घण्टे तक संबोधित करने की क्षमता रखते हैं। यदि औसत निकाला जाए, तो प्रधानमंत्री ने प्रत्येक रैली को करीब डेढ़ घण्टे संबोधित किया होगा और इस लिहाज से मोदी ने इन 144 रैलियों में कुल 216 घण्टों तक भाषण दिया।

पहली बार यूपी के बाद बंगाल में सर्वाधिक गर्जना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेरठ से लेकर खरगोन तक जो 144 रैलियाँ कीं, उनमें सर्वाधिक 31 रैलियाँ अकेले उत्तर प्रदेश में कीं, जहाँ लोकसभा की 80 सीटें हैं। 2014 में भाजपा-एनडीए ने 73 सीटें जीती थीं। यह प्रदर्शन दोहराने के लिए ही मोदी ने सबसे अधिक रैलियाँ उत्तर प्रदेश में कीं, परंतु आश्चर्य की बात यह है कि 2014 में भाजपा की हॉट लिस्ट से नदारद रहे पश्चिम बंगाल में मोदी ने यूपी के बाद सबसे अधिक गर्जना की। पश्चिम बंगाल में भाजपा के जनाधार को धार देने और तृणमूल कांग्रेस (TMC) व मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी की सत्ता को सीधी चुनौती देने के लिए मोदी ने कुल 17 रैलियाँ कीं, जिनमें गुरुवार को चुनाव प्रचार समाप्त होने से पहले भी की गईं 2 रैलियाँ शामिल हैं। मोदी ने उत्तर प्रदेश में बुधवार तक 28 रैलियाँ की थीं, जो गुरुवार को और 3 रैलियाँ करने के साथ ही 31 तक पहुँच गईं।

महाराष्ट्र में केवल 9 रैलियों के पीछे क्या है रणनीति ?

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं, जबकि महाराष्ट्र में उससे अधिक 48 सीटें हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बंगाल में तो 17 रैलियाँ कीं, परंतु महाराष्ट्र में वे केवल 9 ही रैलियाँ कर सके। विश्लेषकों की मानें, तो महाराष्ट्र भाजपा और शिवसेना का गढ़ है और कांग्रेस-एनसीपी से बहुत बड़ी टक्कर मिलने की संभावना बहुत कम है, जबकि बंगाल में भाजपा को पैर ज़माने हैं। इसीलिए मोदी ने बंगाल के मुकाबले महाराष्ट्र में कम रैलियाँ कीं।

अहिन्दीभाषी राज्यों में ओडिशा पर भी ज़ोर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार अभियान की रणनीति के तहत जहाँ बंगाल में सबसे अधिक 21 रैलियाँ कीं, वहीं पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी मोदी ने 8 जनसभाओं को संबोधित किया। मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल में इस तरह पूरी ताकत झोंक दी कि 2014 में गढ़ रहे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मोदी की रैलियों की कुल संख्या 20 तक ही पहुँच सकी, जो बंगाल से कम हैं। इन तीन राज्यों में 65 सीटें पड़ती हैं।

दक्षिण में नहीं गँवाया समय ?

दक्षिण भारत में तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल में लोकसभा की कुल 101 सीटें हैं, परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन सभी राज्यों में केवल 9 रैलियाँ कीं। यद्यपि कर्नाटक में मोदी ने ज़ोर अवश्य लगाया, जहाँ भाजपा का मुकाबला कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से है।

सभी महत्वपूर्ण 27 राज्यों में दर्ज कराई उपस्थिति

अपने 50 दिनों के चुनावी अभियान में पीए मोदी ने देश के सभी 27 राज्यों में रैलियाँ कीं। कोई भी महत्वपूर्ण राज्य मोदी की गर्जना से अछूता नहीं रहा। इन रैलियों के दौरान मोदी ने कांग्रेस और विरोधी अवसरवादी गठबंधनों को महामिलावटी कहते हुए जहाँ एक ओर करारे प्रहार किए, वहीं अपनी सरकार के सर्जिकल-एयर स्ट्राइक जैसे कारनामों और कार्यों का बखान करके मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया।

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