कौन था वह पूर्व आयकर महानिदेशक, जो सिद्धार्थ की ‘जान का दुश्मन’ बन गया ?

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 30 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। देश के कॉफी किंग और कैफे कॉफी डे (CCD) के मालिक वी. जी. सिद्धार्थ सोमवार शाम 6.30 बजे से लापता हैं और आशंका व्यक्त की जा रही है कि उन्होंने कर्नाटक में नेत्रावदी नदी में कूद कर आत्महत्या कर ली है। यद्यपि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि कर्नाटक पुलिस सिद्धार्थ की ज़ोरों से तलाश कर रही है।

इस बीच वी. जी. सिद्धार्थ का एक पत्र सामने आया है, जो उन्होंने तीन दिन पहले 27 जुलाई को सीसीडी के निदेशक मंडल (BOD) को लिखा था। इस पत्र में सिद्धार्थ ने एक पूर्व आयकर महानिदेशक (IT DG) की ओर से प्रताड़ित किए जाने का उल्लेख किया है। ऐसे में प्रश्न यह उठ रहा है कि कौन था वह आईटी डीजी, जो सिद्धार्थ की जान का दुश्मन बन गया ? इस पत्र में सिद्धार्थ की व्यावसायिक विफलता की हताशा का भी संकेत मिल रहा है, परंतु इस हताशा के पीछे कंपनी पर आए धन का संकट ज़िम्मेदार है और पत्र के अनुसार धन का यह संकट एक पूर्व आईटी डीजी के क्रियाकलापों के कारण आया था। ऐसे में पुलिस के लिए अब इस पूर्व आईटी डीजी का पता लगाना भी चुनौती बन गया है।

माइंडट्री ने बिगाड़ा ‘माइंड’ !

कॉफी के व्यवसाय में सफलतापूर्वक काम कर रहे वी. जी. सिद्धार्थ के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनी माइंडट्री सिरदर्द बन गई थी। सिद्धार्थ की माइंडट्री में सबसे बड़ी हिस्सेदारी थी, जिसे गत फरवरी-मार्च में लार्सन एण्ड टुब्रो (L&T) ने टेकओवर करने का प्रयास शुरू किया था। सिद्धार्थ ने जून में ही माइंडट्री में अपनी पूरी हिस्सेदारी एलएण्डटी को 3,000 करोड़ रुपए में बेच दी थी। इससे पहले वे 21 प्रतिशत होल्डिंग के साथ माइंडट्री के सबसे बड़े शेयर होल्डर थे। सिद्धार्थ के पत्र में और भी कई बातें हैं, परंतु विशेष रूप से माइंडट्री डील का भी जिक्र है और यह डील ही सिद्धार्थ को हताशा की ओर ले गई। जो पत्र सामने आया है, उसमें सिद्धार्थ ने माइंडट्री को लेकर लिखा है, ‘पूर्व आईटी डीजी ने माइंडट्री की डील रोकने के लिए दो बार हमारे शेयर अटैच किए थे। बाद में कॉफी डे के शेयर भी अटैच कर दिए थे। यह ग़लत था, जिसकी वजह से हमारे सामने नकदी का संकट आ गया।’ सिद्धार्थ ने पत्र में पू्व आईटी डीजी पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा है, ‘एक पूर्व आईटी डीजी द्वारा हमारे शेयर्स दो बार अटैच किए जाने से माइंडट्री के साथ हमारी डील ब्लॉक हो गई और फिर कॉफी डे के शेयर्स की जगह ले ली, जबकि संशोधित रिटर्न्स हमारी ओर से फाइल किए जा चुके थे। यह अनुचित था। इसी कारण पैसों की कमी हो गई थी।’

‘कर्जदाताओं के दबाव से टूट चुका हूँ’

सिद्धार्थ ने इस पत्र में सीसीडी स्टाफ को संबोधित करते हुए लिखा है, ‘श्रेष्ठतम् प्रयासों के बावजूद मैं मुनाफे वाला बिज़नेस मॉडल तैयार करने में विफल रहा। मैंने लम्बे समय तक संघर्ष किया, परंतु अब और दबाव नहीं झेल सकता। एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर 6 महीने पुराने ट्रांज़ैक्शन से जुड़े मामले में शेयर बायबैक करने का दबाव बना रहा है। मैंने मित्र से बड़ी रकम उधार लेकर ट्रांज़ैक्शन का एक हिस्सा पूरा किया था। अन्य करदाताओं की ओर से भारी दबाव की वजह से मैं टूट चुका हूं। मेरी बिनती है कि आप सभी मज़बती से नए प्रबंधन के साथ व्यवसाय को आगे बढ़ाते रहें। सभी ग़लतियों के लिए मैं उत्तरदायी हूँ। सभी वित्तीय लेने-देन के लिए मैं उत्तरदायी हूँ। मेरी टीम, ऑडिटर्स और सीनियर मैनेमजमेंट को मेरे ट्रांज़ैक्शन के बारे में जानकारी नहीं है। कानून को सिर्फ मुझे उत्तरदायी ठहराना चाहिए। मैंने परिवार या अन्य किसी को इस बारे में नहीं बताया। मेरा इरादा किसी को गुमराह या धोखा देने का नहीं था। एक कारोबारी के तौर पर मैं विफल रहा। आशा है कि एक दिन आप समझेंगे, मुझे क्षमा कर दीजिए। हमारी संपत्तियों और उनके संभावित मूल्य की सूची संलग्न कर रहा हूं। हमारी संपत्तियाँ हमारी देनदारियों से अधिक है। इनसे सभी का बकाया चुका सकते हैं।’

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