मोदी का हर ‘विश्वास’ वास्तविकता में बदलता है, तो राम मंदिर भी बनेगा ही

* जब धारा 370 से मिली मुक्ति, तो अयोध्या विवाद भी बनेगा इतिहास

* जब ट्रिपल तलाक़ से हुआ तलाक़, तो CCC का रास्ता भी होगा साफ

* हर संवैधानिक-न्यायिक कसौटी पर ख़रा उतर रहा है राष्ट्रवाद का एजेंडा

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 19 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। नरेन्द्र मोदी और विश्वास एक-दूसरे का पर्याय बन चुके हैं। एक साधारण व्यक्ति से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुँचे नरेन्द्र मोदी ने अपने लम्बे संघर्षपूर्ण तथा राजनीतिक जीवन में हर कार्य विश्वास के साथ किया, जो अंतत: वास्तविकता में बदला। फिर चाहे घर छोड़ना हो, संन्यास लेना हो, वैवाहिक जीवन से दूरी बनाए रखना हो, आपातकाल की चुनौतियों का सामना करना हो, भाजपा महासचिव के रूप में राज्यों में चुनावी जीत दिलानी हो, गुजरात का मुख्यमंत्री बनना हो, गुजरात दंगों के बाद एक बार नहीं, तीन-तीन बार गुजरात विधानसभा चुनाव जीतना हो, प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनना हो, छोटे-से राज्य गुजरात से निकल कर देशव्यापी लोकसभा चुनाव जीतना हो, दूसरी बार भी जीतना हो। इन सभी उपलब्धियों के पीछे नरेन्द्र मोदी का विश्वास काम कर रहा था।

यही विश्वास आज भी नरेन्द्र मोदी में बाहर और भीतर झलकता है। यह उसी विश्वास का परिणाम है कि देश स्वतंत्रता से पहले और बाद की अनेक ऐसी समस्याओं से धीरे-धीरे बाहर आ रहा है, जो नरेन्द्र मोदी से पहले वाली सरकारें नहीं कर सकीं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में तो भारत अब तक के सर्वोच्च शक्तिशाली स्थान को प्राप्त कर चुका है। आज विश्व में भारत का नाम गौरव के साथ लिया जाता है। साँप-सपेरों के देश को पूरे विश्व में जो आज प्रतिष्ठा मिली है, वह नरेन्द्र मोदी की कूटनीति और वैश्विक राष्ट्राध्यक्षों के साथ व्यक्तिगत संबंधों का परिणाम है। इन सबके पीछे भी मोदी के मन में निरंतर प्रज्वलित अखंड विश्वास ज्योति ही रही है।

जड़ बन चुकी समस्याओं की उखड़ रही जड़ें

देश की आंतरिक स्थिति, समस्याओं और उलझनों की बात करें, तो स्वतंत्रता से पहले और बाद में यानी 15 अगस्त, 1947 से लेकर नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले तक भारत कई समस्याओं में उलझा हुआ था। देश की कई समस्याओं को लेकर यह आम जनधारणा बन गई थी कि ये समस्याएँ कभी सुलझेंगी ही नहीं। इनमें तीन मुख्य ऐसी समस्याएँ थीं/हैं, जिनका सीधा संबंध भारत के साम्प्रदायिक ताने-बाने से जुड़ा हुआ था/है। इनमें पहली समस्या है अयोध्या में राम जन्म भूमि विवाद। यह 500 वर्ष पुराना विवाद है, परंतु स्वतंत्र भारत के इतिहास में नरेन्द्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकारों को छोड़ दें, तो हर सरकार ने वोट बैंक के नाम पर तटस्थता का रुख अपनाया या फिर वास्तविक तथ्यों की अनदेखी की। दूसरी समस्या थी/है कश्मीर। कहा जाता था कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाया जाना संभव ही नहीं है। बस कहा जाता था, किसी ने इसे हटाने का प्रयास नहीं किया, परंतु नरेन्द्र मोदी ने प्रयास भी किया और सफलता भी प्राप्त की। धारा 370 हटने के साथ ही कश्मीर समस्या इस हद तक सुलझ गई कि अब भारत के लोग और सरकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत में लाने की बात करने लगे हैं। इस समस्या को भी 72 वर्षों तक हिन्दू-मुस्लिम यानी धार्मिक वोट बैंक की दृष्टि से देखा गया, परंतु मोदी ने इस चश्मे को उतार कर आर-पार देखा कि कश्मीर की भलाई धारा 370 के साथ नहीं, धारा 370 के बाद है। तीसरी बड़ी समस्या देश को धर्म और जाति के आधार पर बाँट कर देखने की थी/है। नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद और दो-दो बार लोकसभा चुनावों में धर्म-जाति से ऊपर उठ कर लोगों को वोट देने के लिए विवश करके इस समस्या को भी काफी हद तक सुलझा दिया है।

‘मोदी है, तो मुमकिन है’ बनाएगा राम मंदिर

अब बात करते हैं राम मंदिर मुद्दे की। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के लिए शंखनाद करते हुए नासिक में एक रैली की। इस रैली में नरेन्द्र मोदी का राम मंदिर को लेकर भी वही विश्वास नज़र आया, जो धारा 370 को लेकर था। मोदी ने इस रैली में जिस अंदाज़ में राम मंदिर पर अनर्गल वक्तव्य देने वालों को आड़े हाथ लिया, उससे स्पष्ट प्रतीत हुआ कि नरेन्द्र मोदी को पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट अयोध्या में विवादास्पद स्थान पर भगवान राम का भव्य मंदिर बनाने का ही निर्णय सुनाएगा। ‘मोदी है, तो मुमकिन है’ नारे पर पूरे देश को विश्वास है और नरेन्द्र मोदी स्वयं अपने आप में एक विश्वास का पर्याय हैं। कुछ लोग मोदी सरकार के कई निर्णयों को राजनीति के चश्मे से देखते हैं और इसे भाजपा के हिन्दुत्ववादी राष्ट्रवादी एजेंडा से जोड़ कर देखते हैं, परंतु यह भी देखने की आवश्यकता है कि भाजपा का एजेंडा यदि ग़लत होता, तो वह हर संवैधानिक-न्यायिक कसौटी पर ख़रा नहीं उतरता। मोदी सरकार ने यदि भाजपा के एजेंडा में शामिल धारा 370 समाप्त की, तो वह पूर्णत: संवैधानिक रूप से की। मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीति ट्रिपल तलाक़ को तलाक़ दिया, तो वह भी पूर्णत: संवैधानिक रूप से। इसी तरह अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की 110 करोड़ हिन्दुओं की आस्था भी मोदी के विश्वास से अवश्य साकार होगी, क्योंकि मोदी के विश्वास को सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास है। बात सुप्रीम कोर्ट की ही निकली है, तो कुछ दिन पहले भाजपा के एजेंडा का ही एक मुद्दा समान नागरिक संहिता (CCC) भी सुप्रीम कोर्ट में आया। सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि सीसीसी लागू करने की दिशा में सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए। भाजपा के राष्ट्रवादी एजेंडा में यदि कोई खोट होती, तो सुप्रीम कोर्ट सीसीसी पर इस तरह की टिप्पणी नहीं करता। ट्रिपल तलाक़ पर जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मोदी सरकार ने काम किया, सीसीसी भी धर्म के बंधनों को तोड़ कर सुप्रीम कोर्ट की इच्छा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों से ही लागू होगा।

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