मोदी सरकार छोटे व्यापारियों को जनवरी-2020 से देने जा रही है यह बड़ी राहत

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। देश में जब से ‘एक देश-एक कर’ नीति के अंतर्गत माल एवं सेवा कर (GOODS AND SERVICE TAX) यानी GST लागू किया गया है, तब से कुछ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी लगातार यह भ्रम फैला रहे हैं कि छोटे व्यापारी बहुत परेशान हैं, परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने जीएसटी लागू करने के बाद हर बार छोटे व्यापारियों की मुश्किलों को दूर करने का ही प्रयास किया है। इसी क्रम में मोदी सरकार जनवरी-2020 से छोटे व्यापारियों को एक बड़ी राहत देने जा रही है, जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस यानी ई-इनवॉयस लागू करने की तैयारी की जा रही है। यह निर्णय गोवा में आयोजित जीएसटी परिषद् की 37वीं बठक में लिया गया था, जिसे अब जनवरी-2020 से लागू करने की तैयारी की जा रही है। अब तक ई-इनवॉयस को लेकर कोई विशेष नियम या मानदंड नहीं है, जिसके कारण अलग-अलग सॉफ्टवेयर अपने-अपने तरीके से इनवॉयस तैयार करते हैं।

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GOODS AND SERVICE TAX NETWORK) यानी GSTN के अनुसार मोदी सरकार छोटे करदाताओं को नि:शुल्क अकाउंटिंग व बिलिंग सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराएगी, जिससे आगामी समय में जीएसटी इकोसिस्टम पूर्णत: ऑनलाइन हो जाएगी। हर ई-इनवॉयस पर एक विशेष नंबर दिया जाएगा, जिसके बाद इसका मिलान सेल्स रिटर्न में दिखाए गए इनवॉयस से करना होगा।

साथ ही जीएसटीएन इस विकल्प पर विचार कर रहा है कि ई-इनवॉयस निकालने की अनिवार्यता मूल्य के हिसाब से नहीं, अपितु टर्नओवर की सीमा के आधार पर निर्धारित करने की आवश्यकता है। अन्यथा कंपनियाँ एक बिल को छोटे-छोटे बिलों में बाँट कर टैक्स चोरी कर सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में 50 हजार रुपए से अधिक के ट्रांज़ैक्शन पर ई-बिल निकालना अनिवार्य है, परंतु ई-इनवॉयस व्यवस्था लागू होने के बाद व्यापारियों को टैक्स रिटर्न फाइल करने में भी दिक्कतें नहीं आएँगी। वे जीएसटीएन की वेबसाइट पर जाकर रिटर्न फाइल करेंगे। इसी दौरान संबंधित इनपुट डेटा उनके समक्ष होगा। इससे कर अधिकारियों व कर्मचारियों का कार्य भी आसान हो जाएगा। जीएसटीएन का कहना है कि स्टैण्डर्ड ई-इनवॉयस की मदद से टैक्स चोरी को नियंत्रित किया जा सकेगा। नए सिस्टम से करदाता को कोई दिक्कत नहीं होगी। व्यापारी अपना सारा कार्य उसी तरह करते रहेंगे, जैवा वे करते आ रहे थे, परंतु स्टैण्डर्ड सॉफ्टवेयर की सहायता से डेटा शेयरिंग की पूरी प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

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