VIDEO : लाचार बुजुर्गों की मदद के लिये आगे आई मोदी सरकार : बेटों को ही नहीं अब पूरे परिवार को करनी होगी बूढ़ों की सेवा

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 5 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। विपक्षी नेता जब भी सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हैं तो उनकी सोच कुंठित नज़र आती है। वे बच्चों, युवाओं, उनकी शिक्षा, व्यापार और रोजगार तक ही सोच पाते हैं और इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार का घेराव करते हैं, परंतु मोदी सरकार ने उनकी सोच से एक कदम आगे बढ़ कर उन बुजुर्गों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई है, जो अपने ही घरों में अपने ही परिवार के बीच खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, अपमानित हो रहे हैं या फिर खुद को असुरक्षित अनुभव कर रहे हैं। मोदी सरकार ने न सिर्फ ऐसे बुजुर्गों के प्रति उनके पारिवारिक सदस्यों की जिम्मेदारी सुनिश्चित की है, बल्कि खुद भी ऐसे बुजुर्गों तक पहुँचकर उनकी देखभाल की जिम्मेवारी लेने का सराहनीय कदम उठाया है।

इसके लिये सरकार ने सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत ‘सीनियर सिटीज़न केयर होम्स’ के नाम से बुजुर्गों को आश्रय देने का काम करने वाली संस्थाओं का पंजीकरण करने का प्रावधान किया है। ऐसी पंजीकृत संस्थाओं की स्थापना, उनका संचालन और रखरखाव के लिये केन्द्र सरकार ही मानक निर्धारित करेगी। इतना ही नहीं, बुजुर्गों को ‘होम केयर सर्विसेज़’ उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों का भी पंजीकरण करेगी और बुजुर्गों तक पहुँचने के लिये हर पुलिस थाने में एक पुलिस अधिकारी को नोडल ऑफीसर के रूप में नियुक्त भी करेगी।

माता-पिता ही नहीं, सास-ससुर की भी करनी होगी देखभाल

केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जानकारी दी है कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित हुई केन्द्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में बुजुर्गों की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये महत्वपूर्ण चर्चा की गई और इसी बैठक में बुजुर्गों के लिये लागू वर्तमान कानून ‘मेंटिनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीज़न एक्ट-2007’ में बदले हुए समय को ध्यान में रख कर कुछ संशोधनों को मंजूरी दी गई। अब नया संशोधित बिल शीघ्र ही संसद के जारी शीतकालीन सत्र में लाया जाएगा और पास कराया जाएगा। संसद से पास होने के बाद इस पर राष्ट्रपति की मुहर लगेगी। इसी के साथ यह नया कानून बन जाएगा और सरकार इसे देश भर लागू कर देगी।

क्या हैं नये कानून के संशोधित प्रावधान, यहाँ समझें

  • वर्तमान कानून के अनुसार माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी बेटों के कंधों पर थी, परंतु मोदी सरकार ने इस कानून में संशोधन किया है, जिसके अनुसार बेटों के साथ-साथ बहू, बेटी, दामाद, पोते-पोतियाँ, नाती-नातिन, गोद ली हुई संतान तथा सौतेले बेटे या बेटी की भी यह जिम्मेदारी है कि वे माता-पिता और सास-ससुर की देखभाल करें और उन्हें सुरक्षित तथा खुशहाल अनुभव कराएँ। माता-पिता या सास-ससुर सीनियर सिटीज़न हों या न हों। फिर भी उपरोक्त सभी पारिवारिक सदस्यों को उनकी देखभाल करनी होगी।
  • कुछ बिगड़ैल संतानें जिनकी कमाई अच्छी होती है, वे अपने माता-पिता को गुजारा भत्ता देकर उनसे अलग रहने चली जाती हैं। वर्तमान कानून में इसके लिये अधिकतम 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता (मेंटिनेंस) देने का प्रावधान है, परंतु मोदी सरकार ने मेंटिनेंस की सीमा को ही समाप्त करने का प्रावधान किया है। अब से मेंटिनेंस की राशि बुजुर्गों, परिजनों, बच्चों और रिश्तेदारों की कमाई और रहन-सहन के आधार पर सुनिश्चित की जाएगी।
  • मोदी सरकार ने बुजुर्गों की देखभाल की परिभाषा में भी बदलाव किया है और बुजुर्गों को घर तथा सुरक्षा दोनों प्रदान करने का प्रावधान किया है। अभी तक कुछ लोग अपने माता-पिता को विभिन्न कारणों से वृद्धाश्रमों में छोड़ कर उनका खर्च वहन करते थे और यह जताने का प्रयास करते थे कि उनके बुजुर्ग माता-पिता अकेला महसूस न करें और उन्हें वहाँ अपने जैसे अन्य बुजुर्गों का साथ मिले, इसके लिये उन्होंने उन्हें वहाँ रखा है। अपनी पत्नी और बच्चों के साथ स्वतंत्र रहने की मानसिकता रखने वाली ऐसी आज़ाद ख्याल संतानों पर मोदी सरकार ने घर तथा सुरक्षा दोनों मुहैया कराने वाले प्रावधान के माध्यम से शिकंजा कसा है।
  • वर्तमान कानून में नियमों का उल्लंघन करने वाली संतानों के लिये 3 महीने की सज़ा का प्रावधान है। मोदी सरकार ने यह सज़ा बढ़ा कर दुगुनी करने यानी 6 महीने करने का प्रावधान किया है।
  • बुजुर्ग की किसी भी अपील के ट्रिब्युनल में जाने पर 90 दिन के भीतर उसका निपटारा करने की व्यवस्था की जाएगी, यदि बुजुर्ग नागरिक की उम्र 80 वर्ष या उससे अधिक है तो ऐसी स्थिति में उनके आवेदन को 60 दिन के भीतर निपटाना जरूरी होगा।

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कानून में बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य बुजुर्गों का सम्मान और उनकी खुशहाली को बरकरार रखना है। सरकार का यह भी मानना है कि इस नये कानून से बुजुर्गों के शारीरिक व मानसिक कष्टों को कम किया जा सकेगा और इस कानून के प्रावधानों से संतानें भी अपने परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के प्रति ज्यादा संवेदनशील और जिम्मेदार बनेंगी।

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