हर साल 90 हजार करोड़ के खाने की बरबादी : अब आ रहा यह कानून, भरना पड़ेगा भारी जुर्माना

अहमदाबाद, 21 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट भारतीयों को चौंकाने के लिये काफी है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में होटल, रेस्टोरेंट और शादी के फंक्शनों में ही हर साल लगभग 6,700 करोड़ किलो खाना बरबाद होता है, जिसकी कीमत लगभग 90 हजार करोड़ रुपये है। अर्थात् प्रति दिन भारत में 244 करोड़ रुपये का भोजन बरबाद हो रहा है। चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि इतने खाने से गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले देश के लगभग 26 करोड़ लोगों को छह महीने तक खाना उपलब्ध कराया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया जितना गेहूँ पैदा करता है, भारत करता है बरबाद

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल लगभग 2,100 करोड़ किलो गेहूँ खराब हो जाता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में इतने ही गेहूँ की हर साल पैदावार होती है। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रति वर्ष 23 मिलियन टन दालें, 12 मिलियन टन फल और 21 मिलियन टन सब्जियाँ वितरण प्रणाली में खामियों के कारण खराब हो जाती हैं। मुंबई महानगर पालिका के हर दिन के सॉलिड कचरे का आँकड़ा देखें तो पता चलता है कि मुंबई में हर दिन 94 लाख लाख किलो सॉलिड वेस्ट निकलता है। इसमें 73 प्रतिशत यानी लगभग 68.62 लाख किलो खाद्य सामग्री होती है।

भारत में 19.40 करोड़ लोग भूखे

देश में हर साल लगभग 19.40 करोड़ लोग भूखे रहते हैं। प्रति दिन सरकार मिड डे मील स्कीम के तहत लगभग 12 मिलियन बच्चों को भोजन कराती है। हर व्यक्ति को भोजन और रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर करोड़ों का सरकारी धन खर्च होता है। फिर भी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि देश में हर साल भूख और कुपोषण से 10 लाख बच्चों की मृत्यु उनके 5 वर्ष तक की आयु तक पहुँचने से पहले ही हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार यदि इसी तरह खाने की बरबादी होती रही तो 2030 तक दुनिया हर साल 2.1 अरब टन खाना बरबाद करने लगेगी। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 53 देशों में भूख की गंभीर मार झेल रहे लोगों की संख्या 11.3 करोड़ से ज्यादा है। इस समस्या से सबसे अधिक ग्रसित है अफ्रीकी महाद्वीप। इसके अलावा युद्ध झेल रहे यमन, सीरिया, अफगानिस्तान और डैमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो दुनिया के ऐसे आठ देशों में शामिल हैं, जहाँ भुखमरी का सामना करने वाले लोगों में से दो तिहाई लोग रहते हैं।

अब बचे हुए खाने का करना होगा सदुपयोग

इस रिपोर्ट के बाद अब सरकारी तंत्र भी जाग गया है और उसने खाने की बरबादी रोकने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिये हैं। इसलिये अब खाने की बरबादी करने वालों की खैर नहीं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) अब न सिर्फ होटल-रेस्टोरेंट और शादी के फंक्शन में खाने की बरबादी रोकेगा, बल्कि इस खाने का सदुपयोग हो सके, इसके लिये भी नियम बनाएगा। सूत्रों के अनुसार होटल-रेस्टोरेंट तथा शादियों के फंक्शन में खाने की बरबादी आम बात हो गई है। इसके चलते कुछ गैर सरकारी संगठन होटल-रेस्टोरेंट व शादियों वाली जगहों से बचा हुआ इकट्ठा करके गरीबों में बाँटने का काम भी कर रहे हैं, परंतु अभी तक इस खाने की गुणवत्ता कैसी है, इसे लेकर अभी तक कोई मानक नहीं है। इसलिये एफएसएसएआई ने एक मसौदा तैयार किया है, जिसमें इस मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस मसौदे के अनुसार होटल-रेस्टोरेंट तथा शादी जैसे फंक्शन आयोजित करने वाले हॉल आदि के संचालकों को अब एफएसएसएआई की वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण कराना होगा। यहीं पर खाना बाँटने के लिये विविध एनजीओ को भी अधिकृत किया जाएगा। सभी राज्यों में खाद्य आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जो दान में दिये जाने वाले भोजन की निगरानी करेगी और व्यवस्था में सुधार के लिये अपने सुझाव भी देगी।

नई व्यवस्था के तहत अब बचे हुए खाने में हाइजिन तथा सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा। खाना पैकेज्ड है तो उस पर असली लेबल लगाना होगा। खाने के पैकेट पर एक्सपायरी डेट और उसके शाकाहारी या माँसाहारी होने की जानकारी भी देनी होगी। दानकर्ता और दान लेने वाली संस्था को हर पैक के वितरण का रजिस्टर रखकर हिसाब मेन्टेन करना होगा। बचे हुए खाने को अच्छे से पैक करके सात डिग्री सेल्सियस तापमान में रखना जरूरी होगा।

इस मसौदे में खाने की बरबादी करने वाले होटल-रेस्टोरेंट तथा शादी संचालकों पर 5 लाख रुपये तक का भारी दंड लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। एफएसएसएआई शीघ्र ही इस मसौदे को मंजूरी के लिये केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समक्ष भेजने वाला है।

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