इट हैप्पन्स ऑन्ली इन इंडिया : 22 सेंटीमीटर के GLOVES पर 22 गज गरजा हिन्दुस्तान

* बच्चा-बच्चा बोला, ‘धोनी हम तुम्हारे साथ हैं’

* BCCI और मोदी सरकार ने भी दिखाई आँखें

* विविधतापूर्ण भारत की एकता से चौंक गया ICC !

अहमदाबाद, 7 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। इंग्लैंड में खेले जा रहे WORLD CUP 2019 के पहले मैच में भारत के विकेटकीपर महेन्द्रसिंह धोनी अपने ग्लव्स पर पैरा कमांडो के ‘बलिदान चिह्न (बेज़)’ के साथ मैदान पर क्या उतरे, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कौंसिल (ICC)  की भौंए तन गई। उसने इसे लेकर आपत्ति व्यक्त की तो जैसे 22 सेंटीमीटर के ग्लव्स में पूरा भारत ही खड़ा हो गया। देश का बच्चा-बच्चा धोनी के समर्थन में खड़ा हो गया। विविधता में भारत की एकता देखकर आईसीसी की भी आँखें फटी रह गई। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) तो आईसीसी की आपत्ति को खारिज करते हुए टकराव पर उतर आया और साफ शब्दों में कह दिया कि आईसीसी के नियमानुसार कोई राजनीतिक या कॉमर्शियल चिह्न उपयोग नहीं किया जा सकता है, परंतु एम. एस. धोनी ने ऐसा कोई प्रतीक उपयोग नहीं किया है।

मोदी सरकार 2 के नये खेलमंत्री किरण रिजीजू ने एम. एस. धोनी के ग्लव्स विवाद के बाद बीसीसीआई से पूरी रिपोर्ट माँगी और कहा कि देश के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बीसीसीआई से इस मामले को जल्दी सुलझाने के लिये भी कहा। पूर्व सेनाध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री वी. के. सिंह ने भी धोनी का समर्थन करते हुए कहा कि इससे धोनी का सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और प्रेम व्यक्त होता है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक, धार्मिक या किसी नस्ल से जुड़ा मामला नहीं है, अपितु यह हमारे राष्ट्रीय गौरव का विषय है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित बीसीसीआई की प्रशासनिक समिति (कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स यानी COA) के प्रमुख विनोद राय ने भी कहा कि हम अपने खिलाड़ियों के साथ खड़े हैं। धोनी के दस्ताने पर जो निशान है, वह किसी धर्म का प्रतीक नहीं है और न ही वह कॉमर्शियल है। जहाँ तक आईसीसी से पहले अनुमति लेने की बात है तो इसके लिये आईसीसी को पत्र लिख दिया गया है कि वह धोनी को बलिदान बेज़ वाले दस्तानों का उपयोग करने की अनुमति प्रदान करे। इससे पहले आईसीसी की ओर से बीसीसीआई को पत्र लिखकर धोनी के ग्लव्स से बलिदान बेज़ हटाने के लिये कहा गया था।

इस बीच खेल जगत की हस्तियाँ और बॉलीवुड सहित विविध क्षेत्र के लोगों ने भी महेन्द्रसिंह धोनी का समर्थन किया है। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL)  की टीम चैन्नै सुपरकिंग्स के धोनी के सहयोगी खिलाड़ी सुरेश रैना के अलावा पूर्व तेज गेंदबाज आर. पी. सिंह, लंदन ओलिंपिक के कांस्य पदक विजेता भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त और भारतीय धाविका हिमा दास ने धोनी का समर्थन किया। रैना ने ट्वीट करके कहा कि धोनी ने अपने देश के नायकों के बलिदान को सलामी दी है, वह उनका सम्मान कर रहे हैं। इसे देश भक्ति के रूप में लेना चाहिये, राष्ट्रवाद के रूप में नहीं लेना चाहिये।

योगेश्वर दत्त ने कहा कि धोनी पर गर्व है और उन्हें सेना के बलिदान बेज़ वाले दस्ताने पहने रखना चाहिये। हॉकी के पूर्व कप्तान सरदार सिंह ने भी धोनी का समर्थन किया। मिल्खा सिंह ने कहा कि धोनी ने आर्मी को सम्मान दिया है। उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। इस मुद्दे को बढ़ाना नहीं चाहिये। ओलिंपियन सुशील कुमार ने कहा कि पाकिस्तान के मंत्री इस मुद्दे को उठा रहे हैं, बिना किसी की शिकायत के यह मुद्दा नहीं उछला।

आईसीसी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है और बीसीसीआई को पत्र भी लिखा है। आईसीसी ने बीसीसीआई के उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें बीसीसीआई ने आईसीसी से धोनी को दस्तानों पर बलिदान बेज़ उपयोग करने की अनुमति देने की गुहार लगाई थी। आईसीसी ने बीसीसीआई को दिये जवाब में कहा है कि वह किसी भी खिलाड़ी को कोई भी निजी लोगो उपयोग करने की अनुमति नहीं दे सकता है। इस प्रकार अब यह विवाद खत्म होने के बजाय और बढ़ रहा है। भारत को इसमें पड़ोसी देश पाकिस्तान का हाथ होने का संदेह है जो पीएम नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में निमंत्रण नहीं मिलने से भड़का हुआ है।

वैसे आईसीसी के नियमानुसार प्रत्येक खिलाड़ी को आईसीसी के नियमों का पालन करना होता है और ड्रेस, टोपी, ग्लव्स या अन्य किसी भी वस्तु में बिना पूर्वानुमति के कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। आईसीसी से अप्रूवल मिलने के बाद ही खिलाड़ी बदलाव के साथ मैदान पर उतर सकता है। आईसीसी के अनुसार किसी भी खिलाड़ी को आर्म बैंड या ड्रेस के माध्यम से कोई भी निजी संदेश देने की अनुमति नहीं है। हालांकि आईसीसी के क्रिकेट ऑपरेशंस डिपार्टमेंट से अनुमति लेकर ऐसा किया जा सकता है। आईसीसी के नियमानुसार किसी तरह के राजनीतिक या धार्मिक संदेश को फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यदि कोई बोर्ड या टीम किसी संदेश को लेकर खिलाड़ी को कोई विशेष मंजूरी देते हैं और आईसीसी असहमत है तो अंतिम निर्णय आईसीसी का ही मान्य होगा।

सेना के विशेष पैरा कमांडो को विशेष प्रकार की निशानी दी जाती है जिसे बलिदान चिह्न या बेज़ कहते हैं। यह बेज़ उन्हें ही मिलता है जो पैरा फोर्सेस से जुड़े होते हैं। धोनी को 2011 में टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनंट कर्नल की उपाधि से सम्मानित किया गया था। इसके बाद 2015 में धोनी ने पैरा फोर्सेज के साथ बुनियादी ट्रेनिंग और फिर पैराशूट से कूदने की विशेष तालीम भी पूरी की है। इसके बाद धोनी को पैरा रेजिमेंट में शामिल किया गया है और उन्हें यह बेज़ उपयोग करने की अनुमति दी गई है। यह पहली बार नहीं है, जब धोनी ने पैरा फोर्सेज से जुड़ी निशानी को उपयोग किया है, इससे पहले वह आईपीएल के दौरान बलिदान बेज़ वाले टोपी और फोन के कवर पर यह निशानी उपयोग कर चुके हैं। धोनी अक्सर सेना की टोपी, ड्रेस या सेना से जुड़ी निशानियों को अपने कपड़ों या बैग आदि पर लगाए दिखते हैं। वह कह भी चुके हैं कि क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वह सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं।

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