नरक चतुर्दशी : भगवान कृष्ण को भी लेनी पड़ी थी ‘स्त्री शक्ति’ की सहायता

* इस दिन पूजा करने से नहीं होती अकाल मृत्यु

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 26 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। नरक चौदस (Narak Chaturdashi), नर्क चतुर्दशी और नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। नरक चतुर्दशी के दिन भूलकर भी अपने घर को खाली नहीं छोड़ना चाहिए। कोशिश करें घर में आपके अतिरिक्त कोई न कोई अवश्य मौजूद रहे। घर में समृद्धि का वास बनाए रखने और अकाल मत्यु से बचने के लिए आज के दिन घर की दक्षिण दिशा में एक दीपक में कौड़ी और 1 रूपये का सिक्का रखकर जलाएँ तथा यमराज से अकाल मत्यु से बचने की प्रार्थना करें। एक पौराणिक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध कर 16 हजार 1 सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कराया था और उन्हें सम्मान दिलाया था, जिस कारण नरक चौदस मनाई जाती है।

प्रागज्योतिषपुर नगर का राजा नरकासुर नामक दैत्य था। उसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर दिया। वह संतों को भी त्रास देने लगा। महिलाओं पर अत्याचार करने लगा। उसने संतों आदि की 16 हजार स्त्रीयों को भी बंदी बना लिया। जब उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नराकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वसान दिया। लेकिन नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया तथा उन्हीं की सहायता से नरकासुर का वध कर दिया। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को स्त्री शक्ति (पत्नी सत्यभामा) की सहायता से नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। उसी की खुशी में दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीए जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाने लगा।

पुण्यशाली होने के बावजूद पापी बने रंति देव को मिली मुक्ति

एक और मान्यता के अनुसार रंति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा हुआ करता था। जब उसकी मृत्यु का समय आया, तो यमदूत उसे नरक ले जाने के लिए आए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुआ और बोला मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया, फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो ? राजा ने कहा कृपा करें और बताएँ कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। पुण्यात्मा राजा की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा, “हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया था ये उसी पापकर्म का फल है।” यह सुनकर राजा ने यमदूतों से कहा कि “मैं आपसे विनती करता हूँ मुझे 1 वर्ष का समय दे दो। यमदूतों ने राजा को 1 वर्ष की समय दे दिया। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुँचा और उन्हें सब वृतान्त बताया। ऋषि बोले “हे राजन्! आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया। राजा को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल गई और उसे विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से ही पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित हुआ।

विधि-विधान से पूजा करने से मिलती है पापों से मुक्ति

नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करने का बड़ा महात्मय है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायक कहा गया है। इससे पाप कटता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है। शाम को दीपदान किया जाता है। इस त्योहार को विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। गोवा, कर्नाटक और तमिलनाडु में दीपावली पारंपरिक रूप से नरका चतुर्दशी के दिन मनाई जाती है, जबकि शेष भारत में इसे चंद्रमा की रात यानी अमावस्या के दिन मनाते हैं। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इसे दीपावली भोगी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान हनुमान को सरसों का तेल, फूल, चंदन, नारियल, तिल, गुड़ और चावल के गुच्छे (पोहा) का प्रसाद भी घी और शक्कर के साथ चढ़ाया जाता है।

नरक चतुर्दशी का महत्व

छोटी दिवाली को यम चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध महीने में आए हुए पितर इसी दिन चंद्रलोक वापस जाते हैं। इस दिन अमावस्या होने के कारण चांद नहीं निकलता जिससे पितर भटक सकते हैं इसलिए उनकी सुविधा के लिए नरक चतुर्दशी के दिन एक बड़ा दीपक जलाया जाता है। यमराज और पितर देवता अमावस्या तिथि के स्वामी माने जाते हैं।

कर्ज से मुक्ति का दिन

नरक चतुर्दशी पर कर्ज से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी के सामने एक शुद्ध सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए और “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हूँ फट” का यथाशक्ति जप करना चाहिए। इस जप के बाद हनुमान जी से कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करना चाहिए। इसके अतिरिक्त मुख्य द्वार पर एक बड़ा सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाना चाहिए। भोजन में प्याज लहसुन का प्रयोग न नहीं करना चाहिए।

नरक चतुर्दशी 2019

नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान प्रदोष काल में किया जाता है। दीपदान करने के लिए आज 26 अक्टूबर को संध्या काल में 5 बजकर 41 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट पर दीपदान किया जा सकता है।
दीपदान का समय
चतुर्दशी तिथि का आरंभ 26 अक्टूबर 3 बजकर 46 मिनट।
चतुर्दशी तिथि समाप्त 27 अक्टूबर 12 बजकर 33 मिनट।

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