क्या इस मंगल को होगा ऐसा ‘कोई’ मंगल, जो PM मोदी के लिए सबसे बड़ी BIRTHDAY GIFT बन जाए ?

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 13 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगामी मंगलवार को 69वाँ जन्म दिवस है। 17 सितंबर, 1950 को जन्मे नरेन्द्र मोदी स्वतंत्र भारत के 14वें और ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भारतीय स्वतंत्रता के बाद जन्मे हैं। इससे पहले जो 13 प्रधानमंत्री हुए, उन सबका जन्म भारत के दासता काल में यानी 15 अगस्त, 1947 से पहले हुआ था।

यह तो हुई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस की कई विशेषताओं में से एक विशेषता। नरेन्द्र मोदी ने निर्धन बालपन के दौरान जन्म दिवस मनाया होगा या नहीं, यह तो स्वयं वे ही जानते होंगे, परंतु जब 7 अक्टूबर, 2001 को वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब से उनका जन्म दिवस गुजरात के लोगों के लिए विशेष दिन बन गया। 17 सितंबर, 2002 से लगातार गुजरात में मोदी के जन्म दिवस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP-बीजेपी) की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं और जब मोदी 16 मई, 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री बने, उसके बाद 17 सितंबर, 2014 से मोदी का जन्म दिवस धूमधाम से मनाया जाने लगा।

कुल मिला कर 2002 से नरेन्द्र मोदी का जन्म दिवस हर वर्ष 17 सितंबर को अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया में मोदी के जन्म दिवस को लेकर आलेख प्रकाशित-प्रसारित होते हैं। 2002 से अब तक 2018 तक नरेन्द्र मोदी का 18 बार जन्म दिवस आया और स्वाभाविक है तथा सौभाग्य की बात भी है कि हर जन्म दिवस नरेन्द्र मोदी के लिए कोई न कोई उपहार अवश्य लेकर आता है। वैसे मोदी को जन्म दिवस पर मिलने वाले उपहारों की संख्या अगणित है, तो मोदी को उपहार देने के लिए भी लोग लालायित रहते हैं, परंतु मोदी के लिए सर्वश्रेष्ठ उपहार वह होता है, जिसकी उन्होंने इच्छा की हो और जन्म दिवस वाले दिन वह इच्छा पूर्ण हो।

क्या हो सकता है मोदी के लिए सबसे बड़ा उपहार ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यक्तिगत रूप से अपने जन्म दिवस पर कोई उत्सव-समारोह आयोजित करने के विरुद्ध हैं, परंतु मोदी ने जब से शासकीय राजनीति में कदम रखा है, तब से अनायास ही उनके जन्म दिन पर कोई न कोई ऐसी घटना अवश्य घट जाती है, जो उनके लिए उपहार सिद्ध हो जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि क्या नरेन्द्र मोदी के इस बार के जन्म दिवस पर भी कोई ऐसी घटना घटने वाली है, जो उनके लिए उपहार सिद्ध हो ? उत्तर है हाँ। संभव है कि इस मंगलवार यानी 17 सितंबर, 2019 को एक ऐसी घटना घट जाए, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पिछले 68 वर्षों में मिले सभी उपहारों से सबसे बड़ा उपहार सिद्ध हो। अब आपको यह भी बता देते हैं कि वर्तमान परिस्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सबसे बड़ी इच्छा क्या हो सकती है ? आपके पास यदि इस प्रश्न का उत्तर नहीं है, तो हम बता देते हैं। स्मरण कीजिए 10 दिन पहले 7 सितंबर, 2019 की वह रात, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर्नाटक में बेंगलुरू स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मुख्यालय में थे। मोदी सहित 136 करोड़ भारतीय आशा लगाए बैठे थे कि भारत चंद्र के दक्षिण ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन कर अंतरिक्ष विश्व में इतिहास रचेगा, परंतु कुछ क्षणों में ही इस आशा पर विराम लग गया, जब इसरो का संपर्क चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर से सम्पर्क टूट गया।

ये हो सकता मोदी के लिए सबसे बड़ा उपहार

आप सोच रहे होंगे कि मोदी के जन्म दिवस और चंद्रयान 2 का क्या संबंध है ? वास्तव में देखा जाए, तो 7 सितंबर की उस रात के जितने लोग साक्षी बने, वे सभी अच्छी तरह जानते होंगे कि इसरो, मोदी और पूरे भारत ने अभी भी चंद्रयान 2 मिशन को विफल नहीं माना है, क्योंकि ऑर्बिटर इसरो के सम्पर्क में है। इसरो ने यह भी पता लगा लिया है कि विक्रम लैंडर क्रैश नहीं हुआ है, केवल सम्पर्क नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि हर भारतीय के मन के किसी कोने में अभी भी यह आशा है कि विक्रम से सम्पर्क हो जाएगा और अब इस आशा को पंख लगाने का काम करने जा रहा है अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA, जिसका ऑर्बिटर आगामी मंगलवार यानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस के दिन 17 सितंबर, 2019 को चंद्रमा की सतह पर उस जगह के ऊपर से उड़ान भरने वाला है, जहाँ विक्रम ने लैंडिंग की है। नासा का ऑर्बिटर लैंडिंग साइट की तसवीरें भी भेज सकता है और बहुत अधिक संभावना है कि इसरो को विक्रम लैंडर से सम्पर्क करने में भी सफलता मिल सकती है। नासा का जो ऑर्बिटर चंद्र की सतह के ऊपर से गुज़रने वाला है, उसमें हाई रिजॉल्युशन कैमरा लगा हुआ है, जिसने पिचले दिनों अपोलो 11 की लैंडिंग के चित्र भेजे थे। ये चित्र काफी स्पष्ट थे और 40 वर्ष पूर्व चंद्र पर मनुष्य की लैंडिंगग के पदचिह्न तक दर्शा रहे थे। इसी ऑर्बिटर ने हाल ही में क्रैश हुए इज़राइली स्पेसक्राफ्ट के चित्र भी भेजे थे। नासा के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट नोआह पेत्रो के हवाले से स्पेसफ्लाइट नाउ ने लिखा है कि नासा का ऑर्बिटर 17 सितंबर को विक्रम की लैंडिंग साइट के ऊपर से गुज़रेगा। नासा की नीति के अनुसार उसके ऑर्बिटर का डाटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध होता है। पैत्रो ने कहा, ‘हमारा ऑर्बिटर विक्रम लैंडर की साइट से गुज़रेगा, तो उसकी तसवीरें जारी करेगा, ताकि इसरो को पूरी स्थिति का विश्लेषण करने में सहायता मिल सके।’ उल्लेखनीय है कि इसरो ने गत मंगलवार को ही विक्रम का पता तो लगा लिया था, परंतु अभी तक भी वह विक्रम से सम्पर्क करने में सफल नहीं हो पाया है। ऐसे में यदि नासा का ऑर्बिटर 17 सितंबर, 2019 को विक्रम का पता लगा कर उसका इसरो से सम्पर्क करवा दे, तो यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए उनके जीवन का सबसे बड़ा जन्म दिवस उपहार बन सकता है।

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