‘शं नो वरुण:’ : जब नौसेना ने मिसाइलों से तहस-नहस कर दिया था कराची बंदरगाह…

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 4 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। ‘शं नो वरुण:’ अर्थात जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगलकारी रहें। ये श्लोक है भारतीय नौसेना का नीति वाक्य। 407 वर्ष पुरानी भारतीय नौसेना (INDIAN NAVY) की स्थापना 1612 में ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) ने की थी, परंतु नौसेना दिवस 4 दिसंबर को मनाया जाता है, क्योंकि 48 वर्ष पूर्व भारतीय नौसेना ने इसी दिन अपने इतिहास का सबसे शौर्यपूर्ण और सफलतापूर्ण पराक्रम किया था। भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में 4 दिसंबर, 1971 के दिन को भारतीय नौसेना ने स्वर्णाक्षरों से अंकित किया था, जब उसने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को तबाह कर दिया था। इसी विजय की स्मृति में प्रतिवर्ष 4 दिसंबर को पूरे भारत में नौसेना दिवस (NAVY DAY) मनाया जाता है। नौसेना दिवस कोई स्थापना दिवस नहीं, अपुति भारतीय नौसेना के पराक्रम का प्रतीक है।

नौसेना दिवस की नींव में है भारत-पाकिस्तान के बीच तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से भारी संख्या में भारत में आ रहे शरणार्थियों की समस्या के कारण छिड़ा युद्ध। जब पाकिस्तान ने शरणार्थियों को भारत की समस्या बता कर हाथ खड़े कर दिए, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 3 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। पाकिस्तान के विरुद्ध छेड़े गए इस संग्राम को ऑपरेशन ट्राइडेंट (Operation Trident) नाम दिया गया। युद्ध में भारतीय सेना के तीनों अंग भाग ले रहे थे, परंतु नौसेना के मामले में यह पहली बार था कि उसने जहाज पर हमला करने वाली एंटी शिप मिसाइल (Anti Ship Missile) का प्रयोग किया। 4 दिसंबर, 1971 को भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत कराची नौसैनिक अड्डे पर हमला कर दिया। पाकिस्तान के एम्‍यूनिशन सप्‍लाई शिप समेत कई जहाज नेस्‍तनाबूद कर दिए गए। इस दौरान पाकिस्तान के ऑयल टैंकर भी तबाह हो गए। पाकिस्तान के तीन जहाज नष्ट हो गए। भारतीय नौसेना की आई.एन.एस. खुकरी पनडुब्बी (सबमरीन) भी पानी में डूब गई, जिसमें 18 अधिकारी सहित लगभग 176 नौसैनिक सवार थे। इसके चलते नौसेना और अधिक सतर्क व आक्रामक हो गई और छोटे-छोटे विमानो से पाकिस्तानी सेना पर नज़र रखना शुरू कर दिया, जिससे 60 किलोमीटर तक के पाकिस्तानी पोतों को देखना आसान हो गया।

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एक ओर भारतीय नौसेना के रेडार की रेंज बहुत सीमित थी, दूसरी ओर उसकी ईंधन क्षमता भी कम थी, परंतु भारतीय नौसेना ने साहस और उत्कृष्टता का प्रदर्शन करते हुए मिसाइल फिट पोतों को कराची पोर्ट के बहुत समीप जाकर हमला किया और अपनी कुशलता का परिचय दिया। हमले में पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बी पीएनएस गाज़ी तबाह हो गई, जो भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी सफलता थी, क्योंकि पीएनएस गाज़ी को पाकिस्तान ने अमेरिका से लीज़ पर लिया था और वह पहली ऐसी पनडुब्बी थी, जिसके अंदर बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने के लिए 11,000 समुद्री मील दूरी तय करने की क्षमता थी।

नौसेना प्रमुख एडमिरल एस. एम. नंदा के नेतृत्व में चलाया गया ऑपरेशन ट्राइडेंट 25वीं स्क्वॉर्डन कमांडर बबरू भान यादव की निगरानी में 7 दिनों तक चला। ऑपरेशन ख़त्म होते ही भारतीय नौसैनिक अधिकारी विजय जेरथ ने संदेश भेजा, ‘फॉर पीजन्स हैप्पी इन द नेस्ट. रीज्वॉइनिंग’। इस पर उन्हें उत्तर मिला, ‘एफ 15 से विनाश के लिए, इससे अच्छी दीवाली हमने आज तक नहीं देखी।’ कराची के तेल डिपो में लगी आग को 7 दिन-7 रात में भी नहीं बुझाया जा सका। अरब सागर में लड़े गए इस संग्राम में भारतीय नौसेना की जीत के साथ ही पाकिस्तान पर आंशिक नौसेना नाकाबंदी कर दी गई। 1971 के युद्ध में भारतीय नौसेना की पाकिस्तानी नौसेना पर जीत की स्मृति में प्रतिवर्ष 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाने लगा।

मोदी-राजनाथ ने दी नौसेना दिवस की बधाई

नौसेना दिवस के अवसर पर जहाँ भारतीय नौसेना ने ट्वीट कर 1971 के कराची विजय के शौर्य को याद किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट कर नौसेना तथा देशवासियों को नौसेना दिवस की बधाई व शुभकामनाएँ दीं।

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