किर्गिज़स्तान व बिश्केक के बारे में इतना कुछ नहीं जानते होंगे आप, जहाँ पहुँचे हैं PM नरेन्द्र मोदी

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 14 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार सुबह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भाग लेने के लिये किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक पहुँच गये हैं। बिश्केक पहुँचने पर जहाँ पीएम मोदी का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया, वहीं एससीओ की शिखर बैठक में मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मौजूदगी में पाकिस्तान को जमकर खरी-खोटी सुनाई और स्पष्ट शब्दों में यह कहते हुए कि आतंक के साये में भारत पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं कर सकता, पीएम ने पाकिस्तान का शांति प्रस्ताव नकार दिया। यहाँ संगठन के सदस्य देशों की प्रमुख परिषद की बैठक शुक्रवार को भी होने वाली है।

किर्गिज़ लोग भारतीय आलू चिप्स के दीवाने

वैसे पीएम मोदी पहली बार किर्गिज़स्तान नहीं गये हैं, इससे पहले 2015 में भी वह बिश्केक गये थे। इसके अलावा पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बिश्केक जा चुके हैं। भारत और किर्गिज़स्तान के बीच पुराना और विशेष नाता है। भारत में लोग जो राजमा खाते हैं, वह किर्गिज़स्तान से ही आते हैं और किर्गिज़स्तान में लोग भारतीय कंपनी द्वारा निर्मित मसालेदार चटपटे आलू चिप्स के दीवाने हैं। किर्गिज़स्तान में तुर्की कंपनियाँ राजमा पैदा करती हैं, जो भारत में भी निर्यात होता है। जबकि भारत ने किर्गिज़स्तान के तलास शहर में आलू के चिप्स बनाने की फैक्ट्री लगाई है। इस क्षेत्र में आलू की खूब पैदावार होती है।

किर्गिज़ में अधिकांश लड़कियों के नाम इंदिरा

उल्लेखनीय है कि भारत और किर्गिज़स्तान के रिश्ते काफी पुराने हैं। यह रिश्ता तब से है जब बिश्केक सोवियत संघ (USSR) का हिस्सा हुआ करता था। भारत की आज़ादी के बाद उस समय के लोकप्रिय नेता जवाहरलाल नेहरू की पुत्री इंदिरा 1950 के दशक के मध्य में फ्रूंज़ (अब बिश्केक) के दौरे पर आई थी। इसके बाद फ्रूंज़ में पैदा हुई हजारों लड़कियों का नाम इंदिरा रखा गया था। आज के बिश्केक में भी यह नाम बहुत पसंद किया जाता है। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने धर्मपत्नी सोनिया गांधी के साथ 1985 में बिश्केक का दौरा किया था और बिश्केक के मुख्य चौराहे पर पौधारोपण किया था, तब से ही दोनों देशों के सम्बंधों में मजबूती आई।

किर्गिज़ संसद को संबोधित कर चुके नरसिम्हा राव

भारत मार्च-1992 में बिश्केक में अपना राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले राष्ट्रों में शुमार हो गया। वर्ष 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने किर्गिज़ संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को पहली बार संबोधित किया था। किर्गिज़स्तान के लोग अपने प्रसिद्ध साहित्यकार चिंगिज़ एतमातोव पर बहुत गर्व करते हैं, भारत ने भी एतमातोव को जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया है।

बिस्केक में भारतीय रेस्टोरेंट हैं लोकप्रिय

बिश्केक अपने वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के लिये भी पहचाना जाता है। यहाँ तक कि अमेरिका, रूस, चीन और तुर्की ने बिश्केक में अपने-अपने विश्वविद्यालय शुरू किये हैं। हालाँकि भारत का बिश्केक में विश्वविद्यालय शुरू करने का वादा अभी तक अधूरा ही है। वैसे किर्गिज़स्तान के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में भारत के 1,000 से अधिक छात्र मेडिकल की शिक्षा ले रहे हैं। कुछ भारतीय व्यवसायी भी किर्गिस्तान में व्यापार और सेवाओं में कार्यरत् हैं। वह अधिकांशतः वहाँ चाय और फार्मास्युटिकल्स का कारोबार करते हैं। किर्गिस्तान के लोग ग्रीन और ब्लेक टी के दीवाने हैं। बिश्केक में कुछ ऐसे भारतीय रेस्टोरेंट भी हैं, जो पश्चिमी राजनयिकों में काफी लोकप्रिय हैं।

किर्गिज़ गणराज्य के साथ भारत के राजनीतिक सम्बंध भी मजबूत हैं। हाल ही में 30 मई-2019 को पीएम नरेन्द्र मोदी के शपथ समारोह में भी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सोरोनबाय शारिपोविच जीनबेकोव आये थे। यहाँ हथियार बनाने वाली कई रूसी कंपनियों की फैक्ट्रियाँ भी हैं, जिनमें से एक लेनिन वर्क्स भी है, जो हर तरह की बंदूकों की गोलियाँ बनाती है। भारत भी इस कंपनी के खरीदारों में से एक है। यहाँ स्थित फ्रूंज़ मिलिट्री स्कूल फोर यूएसएसआर एयरफोर्स पायलट में भारत के कई वायुसेना अधिकारियों ने ट्रेनिंग ली है, एयर चीफ मार्शल दिलबाग सिंह भी इनमें शामिल हैं। बिश्केक में अन्य सैन्य साजो-सामान भी बनाया जाता है जिनमें इलेक्ट्रिक टॉरपीडो बनाने वाली कंपनी दास्तान शामिल है। भारतीय वायुसेना के इस कंपनी से अच्छे सम्बंध हैं, क्योंकि यह कंपनी आधुनिक ऑक्सिज़न टॉरपीडो और इलेक्ट्रिक टॉरपीडो बनाती है।

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