जानिए कैसे POK और गिलगिट-बाल्टिस्तान बन गये भारत का हिस्सा ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। अभी पहली नवंबर को ही ‘युवाPRESS’ की ओर से ‘जानिए भारत ने दबाई कौन-सी नस, जिससे चिल्ला रहा है चीन’ शीर्षक के साथ एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें 31 अक्टूबर-2019 गुरुवार को जम्मू कश्मीर और लद्दाख के दो नये केन्द्र शासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आने के बाद चीन की ओर से की गई टिप्पणी का विश्लेषण किया गया था। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन को जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन से क्या परेशानी है ? इस रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर और लद्दाख का नक्शा भी प्रस्तुत किया गया था, जिसमें उस ‘अक्साई चिन’ का हिस्सा भी दिखाया गया है, जो चीन के कब्जे में है। रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया गया है कि इसी हिस्से को लेकर चीन की नस दब रही है, जिससे चीन को पुनर्गठन पर आपत्ति हुई। अब भारत ने दोनों राज्यों के गठन के बाद अपना नया नक्शा जारी कर दिया है। इस नक्शे में भारत ने सिर्फ अक्साई चिन को ही नहीं, अपितु पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और उत्तरी कश्मीर यानी गिलगिट-बाल्टिस्तान के हिस्से को भी भारत में दर्शाया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन और पाकिस्तान की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है ?

ये है भारत का नया नक्शा

जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद बना भारत का नया नक्शा
जम्मू कश्मीर पुनर्गठन से पहले का भारत का पुराना नक्शा

सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से भारत का नया मानचित्र तैयार किया गया है। 31 अक्टूबर-2019 को पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन लागू होने के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो नये केन्द्र शासित प्रदेश बन गये। इस पुनर्गठन के बाद सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया ने देश का यह नया मानचित्र तैयार किया है, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK), उत्तरी कश्मीर यानी गिलगिट-बाल्टिस्तान और चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन तथा ट्रांस काराकोरम यानी शक्सगाम घाटी को भी भारत के मानचित्र में दर्शाया है।

ऐसे हुआ जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन

दरअसल संवैधानिक प्रावधान के अंतर्गत जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा केन्द्र सरकार से जम्मू कश्मीर से अस्थाई धारा 370 और 35ए को समाप्त करने की सिफारिश की गई थी, जिसके आधार पर 5 अगस्त को केन्द्र सरकार संसद में धारा 370 के खंड एक को छोड़ कर शेष सभी प्रावधानों और धारा 35ए को पूर्णतः समाप्त करने का बिल लाई थी। इस बिल को संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई समर्थन के साथ पारित किया गया था। आपको बता दें कि संविधान में इन धाराओं को हटाने के लिये जम्मू कश्मीर विधानसभा की सहमति लेने का प्रावधान है, परंतु जब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हो तो विकल्प के रूप में राज्यपाल की ओर से धाराओं को समाप्त करने की सिफारिश की जा सकती है। इसी प्रावधान के तहत केन्द्र सरकार ने राज्यपाल की ओर से सिफारिश होने के बाद दोनों विवादित धाराओं को हटाने का बिल पेश किया जो कि दोनों सदनों में भारी बहुमत से पारित भी हो गया। इस बिल में 31 अक्टूबर-2019 को अखंड भारत के निर्माता सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्म जयंती के दिन जम्मू कश्मीर प्रदेश का पुनर्गठन करने का प्रावधान किया गया था। बिल को 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद तीन दिन पहले 31 अक्टूबर को प्रदेश का पुनर्गठन किया गया और जम्मू कश्मीर एक संपूर्ण राज्य से केन्द्र शासित प्रदेश में तब्दील हो गया। इसी के साथ लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग कर दिया गया और वह भी एक नये केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आ गया। इसके बावजूद कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दल मोदी सरकार के इस कदम को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक बताते हुए विरोध कर रहे हैं। इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिकाएँ भी लगाई गई हैं, जिन पर सुनवाई होनी बाकी है।

जम्मू कश्मीर में 27 और लद्दाख में 2 जिले

इस पुराने नक्शे से समझें कहाँ है पीओके, गिलगिट बाल्टिस्तान, शक्सगाम वैली और अक्साई चिन
इस नये नक्शे में जम्मू कश्मीर में दिखता है पीओके (पीले रंग में) गिलगिट बाल्टिस्तान और अक्साई चिन लद्दाख में दर्शाया गया है (नीले रंग में)

लद्दाख में लेह और कारगिल नामक दो जिले हैं। जबकि जम्मू कश्मीर में अब 27 जिले हैं। कारगिल के लद्दाख में जाने से पहले जम्मू कश्मीर में 28 जिले थे, जबकि आज़ादी के समय 1947 में संपूर्ण जम्मू कश्मीर में कुल 14 जिले थे, जो राज्य विधानसभा की ओर से समय-समय पर बढ़ाते हुए 2019 तक 28 तक पहुँच गये थे। आज़ादी के समय जो 14 जिले थे, वह इस प्रकार हैः कठुआ, जम्मू, ऊधमपुर, रियासी, अनंतनाग, बारामूला, पुँछ, मीरपुर, मुज़फ्फराबाद, लेह, लद्दाख, गिलगिट, गिलगिट वज़ारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटॉरी। बाद में इनमें जो 14 नये जिले बने, वह हैः कुपवाड़ा, बांदीपोरा, गांडेरबल, श्रीनगर, बड़गाम, पुलवामा, शूपियान, कुलगाम, राजौरी, रामबन, डोडा, किश्तवाड़, सांबा और कारगिल।

जम्मू कश्मीर के एलजी ने अनंतनाग का दौरा किया

उल्लेखनीय है कि केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद गिरीशचंद्र मुर्मु ने जम्मू कश्मीर के प्रथम उप-राज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) के रूप में शपथ ली है। उन्होंने शनिवार को दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग का दौरा किया और अधिकारियों के साथ बैठक करके प्रदेश के हालात की जानकारी प्राप्त की।

प्रदेश में हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। इसी के साथ सरकार की ओर से बंदिशों में क्रमशः ढील भी दी जा रही है। प्रदेश में एक ओर जहाँ शांति बहाल हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में आतंकी बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों और ट्रक ड्राइवरों पर हमले करके दहशत फैलाने के प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्रदेश में हालात पर कड़ी नज़र रखी जा रही है और सैनिकों की ओर से आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है।

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