पूरा हुआ ‘नौतपा’ : तपते रहे भारत-पाकिस्तान, क्या अब आएँगे अच्छे दिन ?

अहमदाबाद, 4 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। वैसे भी भारत दुनिया में पूर्व दिशा में है और सूर्य के सबसे निकट है। इसलिये भारत की प्रकृति गर्म है। इसमें भी गरमी के मौसम में खासकर नौतपा के दिनों में भारत भूमि तपकर गर्म हो जाती है और तीव्रतम गरमी का स्तर छू लेती है, जैसा कि नौतपा के दिनों में हुआ और राजस्थान के चुरू में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया। हालाँकि भारतीय ज्योतिष के अनुसार नौतपा अच्छा होता है और यह अच्छी बारिश का संकेत देता है, जबकि विज्ञान और मौसम विभाग नौतपा में विश्वास नहीं करता। हालाँकि उसका भी पूर्वानुमान तो यही कहता है कि इस बार बारिश सामान्य रहेगी। इस प्रकार कहा जा सकता है कि खेत और किसानों के लिये अच्छे दिन आने वाले हैं।

सामान्यतः नौतपा गर्मी के मौसम के वह सबसे गर्म 9 दिन होते हैं, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करके पृथ्वी के सबसे निकट आ जाता है और मध्य भारत के सिर पर आ जाने से उसकी सीधी किरणें पृथ्वी को सबसे अधिक गर्म कर देती हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 25 मई के बाद नौतपा शुरू हुआ जो 2 जून तक चला। इस दौरान भारत के कई हिस्से और पाकिस्तान के भी कई भाग जमकर तपे। नौतपा के दौरान भारत-पाकिस्तान के 15 शहर दुनिया के सबसे गर्म शहर रहे। इनमें भी राजस्थान का चुरू तो 50 डिग्री को भी पार कर गया। 15 शहरों में भारत के 10 और पाकिस्तान के 5 शहर शामिल हैं। भारत के 10 शहरों में भी 8 सबसे गर्म शहर राजस्थान के रहे। चुरू के बाद दूसरे नंबर पर राजस्थान का ही श्रीगंगानगर और तीसरे स्थान पर बीकानेर रहा। चौथे नंबर पर फलौदी, पाँचवें नंबर पर जैसलमेर रहा। छठे नंबर पर मध्य प्रदेश का नौगाँव और सातवें नंबर पर हरियाणा का नारनौल, आठवें नंबर पर राजस्थान के कोटा, नौवें नंबर पर पिलानी तथा दसवें नंबर पर बाड़मेर रहा। जबकि पाकिस्तान के सबसे गर्म शहरों में जैकोबाबाद, सीबी, खानपुर, बहावलनगर और रोहदी शामिल हैं। भारत के राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम में गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ भागों पर नौतपा का प्रभाव रहा।

मौसम विभाग भी मानता है कि तेज गरमी से मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र निर्मित होता है, जिसे हीट लो कहते हैं और यह मानसून को सक्रिय करने में सहायक होता है। दक्षिण में अरब सागर और उत्तर में बंगाल की खाड़ी में नमी वाली हवाएँ शुरू हो गई हैं, जिससे 6 जून के आसपास केरल में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मानसून दस्तक दे सकता है, जो सामान्यतः 1 जून से आ जाता है, वह कुछ दिन देरी से शुरू हो रहा है, परंतु इससे अब जून में गरमी कम होना शुरू हो जाएगी। वर्षा भी सामान्य रहने की संभावना है।

दूसरी ओर ज्योतिषी कहते हैं कि जबसे ज्योतिष की रचना हुई, तब से ही नौतपा भी चला आ रहा है। इस बार 22 मई को अगस्त का तारा अस्त हो गया, जिसका अर्थ है कि बादलों ने गर्भ धारण कर लिया है और अब यह बरसने के लिये तैयार हैं। ज्योतिष में सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में भी इस नौतपा का उल्लेख मिलता है। यदि नौतपा के दौरान बारिश होती है तो इसे नौतपा का गलना कहते हैं और ऐसा होने से अच्छी बारिश की संभावना कम हो जाती है। इसलिये पहली जून से मानसून ने दस्तक नहीं दी और कुछ दिन देरी से दस्तक दे रहा है, इसका अर्थ यह है कि नौतपा सफल रहा है और अब बारिश भी अच्छी होगी, जो देश की खेती और किसानों के लिये अच्छे संकेत हैं।

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