निर्भया केस : 4 अपराधियों को मिलेगा डेथ वारंट या कुछ और दिन की ज़िंदगी

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 17 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। दिल्ली के 7 साल पुराने सनसनीखेज निर्भया गैंगरेप केस के 4 अपराधियों की फाँसी का मामला एक बार फिर टलता नज़र आ रहा है। एक तरफ निर्भया की माँ आशा देवी ने स्थानीय पटियाला हाउस कोर्ट में निर्भया के अपराधियों को जल्द से जल्द फाँसी पर लटकाने के लिये याचिका दायर की है, जिसमें अपराधियों का डेथ वारंट जारी करने की माँग की है। इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई होने वाली है। दूसरी तरफ 4 अपराधियों में से एक अक्षय कुमार सिंह ठाकुर की पुनर्विचार याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में फैसला टल गया। अब इस याचिका पर भी बुधवार को ही सुनवाई होगी। ऐसे में पटियाला हाउस कोर्ट की ओर से अपराधियों का डेथ वारंट जारी किये जाने की संभावना फिलहाल टलती दिखाई दे रही है। क्योंकि जब तक पुनर्विचार याचिका का निपटारा नहीं हो जाता है, तब तक वह डेथ वारंट जारी नहीं कर सकती है। ऐसे में संभावना बढ़ गई है कि अपराधियों को कुछ और दिन की ज़िंदगी मिल जाएगी और कदाचित अब उन्हें नये साल 2020 में ही फाँसी की सज़ा दी जा सकेगी।

अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई टली

पटियाला हाउस कोर्ट से डेथ वारंट जारी होने से पहले सुप्रीम कोर्ट में फाँसी की सजा पर पुनर्विचार करने की माँग करने वाली निर्भया केस के अपराधी अक्षय सिंह की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई तब टल गई, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़े के भतीजे निर्भया की ओर से केस की पैरवी करने के लिये उपस्थित हुए। भतीजे की ओर से मामले की पैरवी किये जाने से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बोबड़े ने खुद को सुनवाई करने वाली तीन जजों की बेंच से अलग कर लिया। इससे पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई टल गई। अब जस्टिस भानुमति की अध्यक्षता वाली बेंच बुधवार को सुबह 10.30 बजे याचिका पर सुनवाई शुरू करेगी। इस बेंच में अन्य दो जज जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोपन्ना हैं। ऐसे में एक बार फिर पटियाला हाउस कोर्ट में डेथ वारंट जारी होने का मामला टल सकता है। ऐसा हुआ तो अपराधियों को कुछ और दिन की ज़िंदगी मिल जाएगी। क्योंकि डेथ वारंट जारी होने के बाद जेल प्रशासन की ओर से अपराधियों को फाँसी के लिये मानसिक रूप से तैयार होने को कम से कम 14 दिन का समय दिया जाता है।

ऐसे में पहले निर्भया केस के चारों अपराधियों अक्षय सिंह, विनय शर्मा, पवन और मुकेश को 16 दिसंबर को फाँसी दिये जाने की जो अटकलें लगाई जा रही थी, वह डेडलाइन बीत गई और अब 29 दिसंबर की डेडलाइन भी बीत जाने की संभावना है। क्योंकि अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज भी होती है तब भी दोषियों के पास कुछ और कदम उठाने के विकल्प तथा समय रहेगा, जिसमें यदि अन्य दोषी भी कोई याचिका दायर करते हैं तो ऐसे में भले ही उनकी याचिकाएँ खारिज हो जायें, परंतु जब तक उनकी याचिकाओं पर सुनवाई होगी और फैसला आएगा, तब तक के लिये उन्हें कुछ और दिन की ज़िंदगी मिलना तो तय है।

दूसरी ओर यदि अक्षय की याचिका खारिज होने पर पटियाला हाउस कोर्ट जब अगली तारीख को डेथ वारंट जारी करेगी, तब भी जेल प्रशासन की ओर से दोषियों को फाँसी के लिये मानसिक रूप से तैयार होने के लिये कम से कम 14 दिन का समय देने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में भी दोषियों को कुछ और दिन की ज़िंदगी मिलना तय है और अब उन्हें वर्ष 2019 में फाँसी दिये जाने की संभावना क्षीण हो गई है। यदि सुप्रीम कोर्ट में नई बेंच के गठन के तुरंत बाद पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की जाती है और सुनवाई के बाद याचिका खारिज होती है तथा इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट निर्भया की माँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए डेथ वारंट जारी करती है, तब भी 29 दिसंबर तक दोषियों को फाँसी दिये जाने की संभावना नहीं बचती है।

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