याचिका खारिज होने के बाद अब क्या विकल्प बचते हैं निर्भया के अपराधियों के पास ? जानिए सब कुछ !

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 18 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। दिल्ली के सनसनीखेज निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के 4 अपराधी खुद को फाँसी दिये जाने से पहले जो भी संवैधानिक विकल्प उनके पास मौजूद हैं, वह सब आजमा लेना चाहते हैं। इसी क्रम में एक अपराधी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समक्ष दया याचिका पेश की है, वहीं एक अपराधी अक्षय कुमार सिंह ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष फाँसी की सज़ा पर पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अब इन अपराधियों के पास बचने का कोई विकल्प बचता है या अब उन्हें फाँसी दी जाएगी ? इसका जवाब यह है कि अभी भी इन अपराधियों के पास विकल्प मौजूद हैं और फिलहाल इन्हें अगले एक महीने तक का जीवन दान भी मिल गया है।

अपराधी अक्षय भी कर सकता है दया याचिका

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुसार निर्भया के दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट उसे राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भेजने के लिये एक सप्ताह का समय दे सकती है। यदि वह इस एक सप्ताह की अवधि में दया याचिका करता है तो जब तक उसकी दया याचिका पर कोई फैसला नहीं आता है, तब तक चारों अपराधियों को फाँसी नहीं दी जा सकती। एक अन्य अपराधी विनय शर्मा की दया याचिका पहले से ही राष्ट्रपति के समक्ष लंबित है।

पटियाला हाउस कोर्ट में फिर टली डेथ वारंट की तारीख

दूसरी तरफ पीड़िता निर्भया की माँ आशा देवी ने दिल्ली की स्थानीय पटियाला हाउस कोर्ट में फाँसी की सज़ा पाने वाले चारों अपराधियों को जल्द से जल्द फाँसी देने के लिये डेथ वारंट जारी करने की माँग करने वाली याचिका दायर की है। इस याचिका पर भी अदालत में सुनवाई चल रही है, परंतु जब तक अपराधियों की कोई याचिका किसी भी स्तर पर पेंडिंग है, तब तक यह कोर्ट डेथ वारंट जारी नहीं कर सकती है। इसीलिये बुधवार को भी याचिका पर सुनवाई तो हुई, परंतु कोर्ट कोई फैसला नहीं दे सकी और अगली सुनवाई 7 जनवरी तक के लिये टाल दी है।

अब 20 जनवरी तक नहीं हो सकती है फाँसी

यदि 7 जनवरी से पहले विनय शर्मा की याचिका का निपटारा हो जाता है और अक्षय या पवन, मुकेश में से कोई दया याचिका दाखिल नहीं करता है तो स्थानीय कोर्ट 7 जनवरी को आशा देवी की याचिका पर फैसला दे सकती है। यदि कोर्ट इस दिन डेथ वारंट जारी करती भी है तो भी यह वारंट जारी होने के बाद 14 दिन तक अपराधियों को फाँसी नहीं दी जा सकती है। क्योंकि यह 14 दिन का समय अपराधियों को इसके लिये दिया जाता है, ताकि वे मानसिक रूप से फाँसी पर लटकने के लिये तैयार हो सकें। इस प्रकार आगामी 20 जनवरी तक यानी अगले एक महीने के लिये फिलहाल अपराधियों को जीवन दान मिल गया है। दूसरी ओर यदि अक्षय या बाकी अन्य दो में से कोई भी या तीनों अपराधी मामले को लटकाये रखने के लिये पुनर्विचार याचिका अथवा राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भेजते हैं तो ऐसी सूरत में जब तक उनकी सभी याचिकाओं का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक अपराधियों के विरुद्ध डेथ वारंट जारी नहीं हो पायेगा और अपराधियों की फाँसी टलती रहेगी।

क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करेंगे अपराधी

निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह के अनुसार पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद उनके पास दोषियों की ओर से क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने का विकल्प है, जो एक-दो दिन में दाखिल की जाएगी। इस पिटीशन में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाये जाते हैं और उसके समक्ष ऐसे केसों के उदाहरण पेश किये जाते हैं, जिसमें खुद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों को बदला है और फाँसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया है। इसमें 2017 के बाद के ऐसे 17 उदाहरण पेश करने की बात की जा रही है। यदि क्यूरेटिव पिटीशन में सुप्रीम कोर्ट अपराधियों की फाँसी को उम्रकैद में बदल देती है, तब तो राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और जो दया याचिका की गई है उसे भी वापस ले लिया जाएगा। यदि क्यूरेटिव पिटीशन भी खारिज होती है, तब अंतिम विकल्प के तौर पर दया याचिका दाखिल की जाएगी।

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