HEALTH INDEX : केरल किंग, आंध्र-महाराष्ट्र की ऊँची छलांग, तो पंजाब-तमिलनाडु लुढ़के, गुजरात का क्या हाल ? जानने के लिए CLICK करें

उत्तर प्रदेश और बिहार उल्टी गिनती में ‘बादशाह’

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 26 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। देश में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति है ? कौन-सा राज्य अपनी जनता को श्रेष्ठ स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करा रहा है ? किस राज्य की स्थिति दो वर्षों के बाद भी बदतर बनी हुई है, तो किस राज्य ने प्रगति की है ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर नीति आयोग की ओर से जारी किए गए स्वास्थ्य सूचकांक यानी हेल्थ इंडेक्स (HE) में दिए गए हैं।

नीति आयोग की ओर से जारी किए गए स्वास्थ्य सूचकांक 2017-18 के अनुसार देश में सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में केरल लगातार किंग यानी पहले पायदान पर बना हुआ है। नीति आयोग ने अपनी इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य सूचकांक 2015-16 को आधार बनाते हुए 2017-18 में राज्यों की बदली हुई स्थिति का आकलन किया है, जिसके अनुसार केरल एचई 2015-16 में भी पहले स्थान पर था, और एचई 2017-18 में भी पहले स्थान पर रहा। इन दो वर्षों में पंजाब तमिलनाडु की स्थिति बुरी तरह बिगड़ी, क्योंकि 2015-16 में स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पंजाब जहाँ केरल के बाद दूसरे स्थान पर था, वहीं 2017-18 में वह लुढ़क कर पाँचवें स्थान पर चला गया है। इसी प्रकार तमिलनाडु तीसरे स्थान से लुढ़क कर नौवें स्थान पर आ गया है। एचई 2017-18 में सबसे अधिक ध्यान खींचा है आंध्र प्रदेश ने, जो केरल के बाद दूसरे स्थान पर है। 2015-16 में आंध्र प्रदेश 8वें स्थान पर था, तो महाराष्ट्र ने भी लम्बी छलांग लगाते हुए 2017-18 में तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जो 2015-16 में छठे स्थान पर था।

मोदी-शाह-रूपाणी का गुजरात स्थिर

जब राज्यों की बात हो रही हो, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात की स्थिति में न कोई सुधार आया है और न ही कोई बिगाड़। एचई 2015-16 में गुजरात चौथे स्थान पर था, तो एचई 2017-18 में भी गुजरात ने चौथे पायदान पर स्थिरता बनाए रखी है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के नेतृत्व में गुजरात ने स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर श्रेष्ठता बनाए रखने में सफलता हासिल की है। गुजरात में जब नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री थे, तभी से स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा था। मोदी ने 13 वर्षों के शासन काल में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय किए और अनेक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पतालों, छोटे-बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का निर्माण कराया। मोदी के बाद मुख्यमंत्री बने आनंदीबेन पटेल और विजय रूपाणी ने भी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में श्रेष्ठतम् कार्य करने की निरंतरता बनाए रखी है।

ओडिशा विवश, परंतु यूपी-बिहार कब सुधरेंगे ?

नीति आयोग ने स्वास्थ्य सूचकांक 2017-18 को तीन श्रेणियों में तैयार किया है। इनमें प्रथम श्रेणी में 21 बड़े राज्य, दूसरी श्रेणी में 8 छोटे राज्य और तीसरी श्रेी में केन्द्र शासित प्रदेशों को रखा गया है। अब तक हम पहली ही श्रेणी के 21 राज्यों की बात कर रहे हैं, जिसमें केरल किंग है, तो उत्तर प्रदेश और बिहार लगातार कंगाल बने हुए हैं। ये दोनों राज्य भी बादशाह हैं, परंतु उल्टी गिनती में। एचई 2017-18 के अनुसार प्रथम श्रेणी वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे अंतिम पायदान यानी 21वें स्थान पर है। 2015-16 में भी वह इसी पायदान पर था। आश्चर्य तो इस बात का है कि बिहार की स्थिति 2015-16 की अपेक्षा बिगड़ी है, जो 19वें से गिर कर 2017-18 में 20वें पायदान पर आ गई है। ओडिशा तो अपनी ग़रीबी के कारण विवश है। ओडिशा 2015-16 में 18वें स्थान पर था, जो 2017-18 में 19वें स्थान पर आ गया है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश भी 17वें से गिर कर 18वें स्थान पर आ गया है, तो उत्तराखंड की स्थिति 15वें से गिर कर 17वें स्थान पर आ गई है। यद्यपि राजस्थान ने लम्बी छलांग लगाई है। 2015-16 में 20वें स्थान पर रहे, राजस्थान ने 2017-18 में 16वाँ स्थान हासिल किया है।

दिल्ली से बेहतर पूर्वोत्तर !

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार छोटे राज्यों में त्रिपुरा पहले स्थान पर रहा, तो मणिपुर दूसरे, मिज़ोरम तीसरे व नगालैण्ड चौथे स्थान पर रहे। इस सूची में अरुणाचल प्रदेश 8वें, सिक्किम 7वें और गोवा छठे स्थान पर रहे। बात करें देश के दिल दिल्ली की, तो इसे 8 छोटे राज्यों की सूची में रखा गया था, जिसमें वह पाँचवें स्थान पर रहा। दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाएँ त्रिपुरा, मणिपुर, मिज़ोरम और नगालैण्ड के मुक़ाबले कमतर हैं। दिल्ली से श्रेष्ठ स्वास्थ्य सुविधाएँ इन चार राज्यों में हैं।

देश के 21 बड़े राज्यों के स्वास्थ्य सूचकांक की पूरी सूची निम्नानुसार है :

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