यहाँ जानिए कैसे दुबला हो गया पाकिस्तान ? : मोदी-शाह के बाद अब हड़का रहे राजनाथ सिंह

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 18 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाकर जहाँ पाकिस्तान की नींद हराम कर दी है, वहीं अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान को बार-बार हड़काकर उसकी बेचैनी को और बढ़ा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने पहले तो बार-बार युद्ध की धमकी देने वाले पाकिस्तान को यह कहकर हड़काया कि भारत परमाणु हथियार का पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर कायम है, परंतु युद्ध के दौरान कोई देश नियमों की लिस्ट देखने नहीं बैठता है। इससे उनका इशारा साफ था कि पाकिस्तान को भी भारत से किसी भी तरह के रहम की उम्मीद नहीं करनी चाहिये। अब राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को एक और घुड़की दी है, उन्होंने साफ कर दिया है कि जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान से केवल पाक अधिकृत कश्मीर (POK) पर ही बात होगी और वह भी तब जब पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म करे। भारत की इन घुड़कियों से पाकिस्तान का हाजमा खराब है और वह दुबला होता जा रहा है।

डरे-डरे इमरान पर राजनाथ का प्रहार

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद से हलकान हुआ पाकिस्तान दर-दर की ठोकरें खा चुका है और दुनिया भर के देशों के पास उसकी मदद के लिये गुहार लगा चुका है, परंतु उसे हर दरवाजे से झिड़क दिया गया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने खुद स्वीकार किया कि कोई देश इस मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ नहीं दे रहा है। इसके बाद भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू कश्मीर में उठाए गये कदम से भयभीत पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भी स्वीकार किया कि भारत पीओके में बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक से भी बड़ा ऑपरेशन करने की तैयारी में है। इस प्रकार इमरान ने स्वीकार कर लिया कि भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी। इमरान के डर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक और प्रहार कर दिया। सिंह ने कहा कि पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर पर कोई बात नहीं होगी और उससे केवल और केवल पीओके पर ही बात होगी। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान का हाजमा खराब हो गया है और वह दिन ब दिन दुबला होता जा रहा है।

क्या है पीओके का मामला ?

आम तौर पर लोग जम्मू, कश्मीर और लद्दाख को एक ही प्रदेश की नज़र से देखते हैं, जो कि सही नहीं है। दरअसल यह तीनों अलग-अलग क्षेत्र हैं, जो देश के विभाजन और आज़ादी से पहले राजा हरि सिंह के अधीन थे। जब राजा हरि सिंह ने पाकिस्तानी कबाइलियों के आक्रमण से घबराकर भारत के साथ विलय की पेशकश की और सैन्य मदद माँगी। तब भारत ने उनसे उसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए थे, जिस पर अन्य राज्यों ने दस्तखत किये थे। इसमें अलग से कोई शर्त नहीं रखी गई थी। विशेष दर्जे की भी कोई बात नहीं थी। धारा 370 और अनुच्छेद 35ए बाद में तैयार की गईं और प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया, जिससे एक ही देश में दो संविधान, दो निशान (झंडे) और दोहरी नागरिकताओं के चलते विवाद उत्पन्न हुआ। जब राजा हरि सिंह के राज्य का भारत में विलय हुआ तब लद्दाख और जम्मू क्षेत्र भारत के साथ मिलकर खुश हुए और आज भी हैं। एक मात्र कश्मीर क्षेत्र में ही इसको लेकर विवाद है। इसमें भी एक सर्वे के अनुसार मात्र 2 प्रतिशत कश्मीरी ही भारत के साथ विलय के पक्ष में नहीं हैं, अन्य 98 प्रतिशत कश्मीरियों को इससे कोई परेशानी नहीं है। जब पाक कबाइलियों ने आधे से अधिक कश्मीर पर कब्जा कर लिया था और महाराजा हरि सिंह के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत ने कबाइलियों को खदेड़ने के लिये अपनी सेना भेजी थी, तब भारतीय सेना कश्मीर के काफी बड़े भाग को कबाइलियों से मुक्त करवा चुकी थी, परंतु बाकी क्षेत्र भी मुक्त करवाती, उससे पहले भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 31 दिसंबर 1947 को यूएनओ से अपील कर दी कि वह पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी लुटेरों को भारत पर आक्रमण करने से रोके। इसके परिणाम स्वरूप 1 जनवरी 1949 को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम की घोषणा करवा दी गई और जिनके कब्जे में जितना भाग था, वह उनके कब्जे में रहा। भारतीय सेना कबाइलियों से पूरा कश्मीर खाली कराने में सफल नहीं हो पाई थी। तब से ही कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया, जो भारत के कब्जे वाले कश्मीर से लगभग 3 गुना बड़ा है। इसी को पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहा जाता है, जिसे पाकिस्तान आज़ाद कश्मीर और भारत गुलाम कश्मीर कहता है। पाकिस्तान ने यह विवादित क्षेत्र होने से यहां कोई विकास नहीं किया, ऊपर से उसने इस हिस्से को भारत के कब्जे वाला कश्मीर भी हथियाने के लिये आतंकवाद का अड्डा बनाकर रखा है। यहाँ के शिया मुस्लिम भागकर भारत आते हैं, यह सिलसिला आज भी कायम है। पाकिस्तान ने दुनिया को दिखाने के लिये पीओके को आज़ाद कश्मीर का नाम दिया है और वहाँ अलग प्रधानमंत्री भी रखा है, जो कि इस्लामाबाद के इशारे पर ही चलता है।

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