2014 में VOTE नहीं देने वाले 27,38,34,900 भारतीय इस NRI से सबक लेंगे ? ऑस्ट्रेलिया में लगी-लगाई नौकरी छोड़ कर मतदान करने भारत आया

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए पहले चरण का मतदान हो गया है और 18 अप्रैल गुरुवार को दूसरे चरण का मतदान होने वाला है। पहले चरण में जहाँ लगभग 69.43 प्रतिशत मतदान हुआ। इसका अर्थ है कि 30 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग नहीं किया। विशेष मामलों में विशेष कारण से कोई मतदाता मतदान न कर सके, तो भी मतदान न करने वालों का प्रतिशत बहुत-बहुत तो 5 तक रह सकता है, परंतु यह प्रतिशत 30 तक रहना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

यद्यपि चुनाव आयोग (EC) ने आशा जताई है कि अगले चरणों में मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा, परंतु बढ़-बढ़ कर कितना बढ़ेगा ? असली मुद्दा मतदान के प्रति लापरवाही, उदासीनता और असंवेदनशीलता का है। यदि देश का हर नागरिक अपने मताधिकार के महत्व को समझे, जैसा कि एक प्रवासी भारतीय (NRI) सुधींद्र हेब्बर ने समझा, तो भारत में मतदान का प्रतिशत 90 से 95 तक पहुँच सकता है। 41 वर्षीय सुधींद्र हेब्बर से देश के उन 27,38,34,900 मतदाताओं को भी सबक लेना चाहिए, जिन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 में मतदान नहीं किया था।

ईसी के आँकड़ों के मुताबिक 2014 में देश में 9 चरणों में 81 करोड़ 45 लाख मतदाता दर्ज हुए थे, परंतु मतदान केवल 66.38 प्रतिशत लोगों ने ही किया। इसका अर्थ यह है कि पिछले चुनाव में जब देश में परिवर्तन की लहर चल रही थी, वह लहर ॉभी देश के 33.62 प्रतिशत यानी 27,38,34,900 मतदाताओं को नहीं झकझोर सकी और ये लोग मतदान करने नहीं पहुँचे।

नौकरी छोड़ कर मोदी को VOTE देने भारत आए सुधींद्र हेब्बर

मूलतः कर्नाटक में सुरथकल निवासी 41 वर्षीय सुधींद्र हेब्बार सिडनी एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग ऑफिसर की नौकरी करते थे। सुधींद्र भारत के नागरिक हैं। इसलिए उन्होंने भारत में हो रहे लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व यानी लोकसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने की ठानी। सुधींद्र हेब्बर गुलबर्ग संसदीय क्षेत्र में रहते हैं और यहाँ तीसरे चरण में 23 अप्रैल को मतदान होना है। सुधींद्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बहुत बड़े फैन-प्रशंसक हैं। इसलिए भी उन्होंने अपना एक वोट देने के लिए दृढ़ निश्चय किया। सुधींद्र ने भारत आकर वोट देने के लिए छुट्टी मांगी। कंपनी ने उनकी 5 से 12 अप्रैल तक की ही छुट्टी मंजूर की, जबकि उनके मताधिकार के प्रयोग का दिन 23 अप्रैल है। कंपनी की ओर से कहा गया कि इस छुट्टी को वह और नहीं बढ़ा सकते थे, क्योंकि आने वाले दिनों में ईस्टर और रमज़ान के कारण एयरपोर्ट पर भारी भीड़ होती है। सुधींद्र ने जब देखा कि स्वीकृत की गई छुट्टी के दौरान वे मतदान नहीं कर सकेंगे, तो उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और भारत आ गये।

कौन हैं सुधींद्र हेब्बर ?

सुधींद्र ने एमबीए की शिक्षा प्राप्त की है और सिडनी में दुनिया भर से आनेवाले लोगों के बीच काम करते थे, जिनमें यूरोपियन और पाकिस्तानी भी होते हैं। सुधींद्र बड़े गर्व से कहते हैं कि भारत का भविष्य बहुत अच्छा है। वह भारत की दुनिया में बदलती इमेज और कामयाबी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हैं। सुधीन्द्र के मुताबिक वह सीमा पर जाकर देश की रक्षा तो नहीं कर सकते, इसलिये वोट देकर एक मतदाता का कर्तव्य निभाना चाहते हैं। सुधीन्द्र ऑस्ट्रेलिया में परमानेंट रेजिडेंट कार्ड होल्डर हैं। इससे पहले वह सिडनी में रेलवे में काम कर चुके हैं। इसलिये उन्हें भरोसा है कि यहां से लौटने के बाद उन्हें दूसरी नौकरी प्राप्त करने में कोई मुश्किल नहीं होगी। सुधीन्द्र के मुताबिक 2014 में भी वह मतदान करने के लिये भारत आये थे और मतदान करने के बाद सिडनी लौट गये थे। इस बार भी वह 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद सिडनी लौटेंगे।

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